उदयपुर में बाल-मित्र सेल की स्थापना

अर्बन 95 का नन्हें बच्चों और अभिभावकों पर केंद्रित शहरी विकास को संस्थागत रूप देने की दिशा में बड़ा कदम

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उदयपुर 12 सितंबर 2025। अर्बन 95 पहल के तहत लाइटहाउस सिटी के रूप में उदयपुर सार्वजनिक अवसंरचना और सेवाओं की डिज़ाइन, योजना एवं प्रबंधन में नन्हें बच्चों और उनके अभिभावकों पर केंद्रित दृष्टिकोण को एकीकृत करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। नर्चरिंग नेबरहुड्स 2.0 पहल के अंतर्गत, जिसे आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय और वैन लियर फाउंडेशन का सहयोग तथा डब्ल्यूआरआई इंडिया का तकनीकी मार्गदर्शन प्राप्त है, उदयपुर का लक्ष्य संस्थागत सुधारों और दीर्घकालिक बदलावों के माध्यम से इस दृष्टिकोण को और अधिक मुख्यधारा में लाना है।

शुक्रवार को आयोजित प्रोजेक्ट स्टियरिंग कमेटी (PSC) की सफल बैठक इस दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव रही। बैठक की अध्यक्षता नगर निगम आयुक्त अभिषेक खन्ना ने की। बैठक में निगम आयुक्त खन्ना के साथ ही उदयपुर विकास प्राधिकरण, स्वास्थ्य विभाग, आईसीडीएस, शिक्षा विभाग, यातायात पुलिस, राजस्थान पुलिस विभाग और जतन संस्थान के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया।

बैठक के प्रथम सत्र में पैरेंट+ पहल के फेज-2 के समापन पर चर्चा हुई, जिसका उद्देश्य सामुदायिक गतिविधियों और लक्षित जागरूकता अभियानों के माध्यम से उत्तरदायी देखभाल और अभिभावक कल्याण को बढ़ावा देना था।

इस अवसर पर इसके परिणाम, सीख और दस्तावेज़ समिति के समक्ष प्रस्तुत किए गए। 

इसके बाद वर्तमान में चल रहे अर्बन 95 नर्चरिंग नेबरहुड्स 2.0 (फेज-3) कार्यक्रम की प्रगति साझा की गई, जिसमें डेटा संग्रहण, तकनीकी क्षमता निर्माण, तथा नन्हें बच्चों और अभिभावकों पर आधारित परियोजना डिज़ाइन एवं कैटलॉग पर कार्य हो रहा है।

स्टियरिंग कमेटी के दौरान आयुक्त ने दो ज्ञान उत्पादों को औपचारिक रूप से अंगीकृत किया:

 • प्लांटिंग शेड्यूल कैटलॉग – देशज एवं जलवायु-रोधी पौधों का उपयोग कर सुरक्षित, रंगीन और बच्चों के लिए आकर्षक हरित स्थल विकसित करने हेतु मार्गदर्शिका।

 • वेस्ट-टू-वंडर प्ले कैटलॉग – पुनर्चक्रित सामग्री से बने नवीन खेल तत्वों की मार्गदर्शिका, जो स्थिरता को बढ़ावा देती है और सुरक्षित, बाल-मित्र खेल का वातावरण उपलब्ध कराती है।

इसके अतिरिक्त, बैठक में विभिन्न फ्लैगशिप परियोजनाओं की रूपरेखा पर भी प्रकाश डाला गया, जिनमें पार्कों में टॉट-लॉट्स, कम्युनिटी हॉल में प्ले पॉकेट और बाल एवं परिवार-मित्र शौचालय का प्रोटोटाइप शामिल हैं। आयुक्त ने समयबद्ध क्रियान्वयन पर बल देते हुए परिवारों के लिए उच्च गुणवत्ता वाले सार्वजनिक स्थलों के निर्माण की आवश्यकता पर जोर दिया।

बैठक की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि उदयपुर बाल-मित्र सेल का शुभारंभ रहा। आयुक्त खन्ना ने कहा कि इस सेल का मुख्य उद्देश्य एक समावेशी मंच के रूप में कार्य करना है, जहाँ नगर निगम उदयपुर, स्वास्थ्य विभाग, आईसीडीएस, शिक्षा विभाग सहित विभिन्न हितधारक एक साथ आ सकें। 

यह सेल नन्हें बच्चों से संबंधित सभी पहलों एवं जानकारियों के लिए एकल प्रवेश बिंदु (Single Point of Access) होगा, ताकि यह सरलता से सभी तक पहुँच सके।

आयुक्त ने यह भी रेखांकित किया कि यह सेल एक संपूर्ण संसाधन केंद्र के रूप में कार्य करेगा, जिसमें बाल-मित्र दिशा-निर्देश, गतिविधियाँ, डिज़ाइन संदर्भ और श्रेष्ठ प्रथाएँ संग्रहित होंगी। यह उदयपुर के लिए एक संस्थागत स्मृति (Institutional Memory) बनेगा, जो बाल एवं देखभालकर्ता-मित्र शहरी विकास को बढ़ावा देगा।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह पहल उदयपुर के सार्वजनिक स्थलों को और बेहतर बनाएगी तथा नन्हें बच्चों और उनके देखभालकर्ताओं के लिए स्वस्थ, सुरक्षित और आकर्षक वातावरण तैयार करेगी।

यह पहल उदयपुर में बाल एवं देखभालकर्ता-मित्र शहरी नियोजन को संस्थागत रूप देने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है और सतत एवं समावेशी शहरी विकास का उदाहरण प्रस्तुत करती है।

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