गीतांजली मेडिकल कॉलेज में अत्यंत दुर्लभ “Bm” ब्लड ग्रुप की पहचान
महिला रक्तदाता की रूटीन ब्लड ग्रुप जाँच के दौरान परिणाम सामान्य से भिन्न पाए गए।
उदयपुर 12 मार्च 2026। गीतांजली मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल, उदयपुर के ब्लड सेंटर में B रक्त समूह के एक अत्यंत दुर्लभ उपप्रकार “Bm” की सफलतापूर्वक पहचान की गई है। यह महत्वपूर्ण खोज नियमित रक्तदान जाँच के दौरान सामने आई, जो संस्थान में अपनाए जा रहे उच्च स्तरीय परीक्षण मानकों और विशेषज्ञता को दर्शाती है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, एक महिला रक्तदाता की रूटीन ब्लड ग्रुप जाँच के दौरान परिणाम सामान्य से भिन्न पाए गए। प्रारंभिक परीक्षण में रक्त समूह स्पष्ट रूप से निर्धारित नहीं हो सका। इसके बाद रक्ताधान औषधि विभाग की टीम ने रक्त एवं सलाइवा (लार) के सैंपल की विस्तृत एवं विशेष जाँच की। उन्नत सेरोलॉजिकल परीक्षणों के बाद यह पुष्टि हुई कि यह B रक्त समूह का दुर्लभ उपप्रकार “Bm” है।
रक्ताधान औषधि विभाग के प्रभारी डॉ. अजय कुमार ने बताया कि ऐसे मामलों में लाल रक्त कणों (Red Blood Cells) की सतह पर B एंटीजन की मात्रा अत्यंत कम होती है। इसी कारण प्रारंभिक जाँच में यह कई बार “O” रक्त समूह जैसा प्रतीत हो सकता है। यदि बिना विस्तृत परीक्षण के किसी अन्य समूह का रक्त चढ़ा दिया जाए तो मरीज में गंभीर रिएक्शन होने की संभावना रहती है।
उन्होंने आगे बताया कि Bm ब्लड ग्रुप वाले व्यक्ति को रक्त चढ़ाने से पहले विशेष क्रॉस-मैच कम्पैटिबिलिटी परीक्षण करना अनिवार्य होता है, जिससे रक्ताधान की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
विशेषज्ञों के अनुसार Weak B जैसे दुर्लभ रक्त प्रकारों की पहचान के लिए उन्नत प्रयोगशाला तकनीक, विशेष सेरोलॉजिकल परीक्षण तथा अनुभवी टीम की आवश्यकता होती है। सामान्य जाँच में ऐसे उप प्रकार कई बार पहचान से छूट सकते हैं।
यह उपलब्धि गीतांजली ब्लड सेंटर में अपनाए जा रहे उच्च गुणवत्ता मानकों, सतर्क जाँच प्रक्रिया और सुरक्षित रक्ताधान सेवाओं के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
इस अवसर पर डॉ. अजय कुमार ने कहा, “दुर्लभ रक्त समूहों की समय पर और सटीक पहचान मरीजों की सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। हमारा प्रयास है कि प्रत्येक दाता और मरीज को सुरक्षित, विश्वसनीय और सटीक रक्ताधान सेवा उपलब्ध कराई जाए।”