राजस्थान में यहाँ स्थापित होगी देश की सबसे बड़ी व अत्याधुनिक गोट सीमन लैब, बढ़ेगा मिल्क प्रोडक्शन

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Goat Semen Lab

 

Udaipur Times, Rajasthan News: प्रदेश में पशुपालन क्षेत्र को बढ़ावा देने और उन्नत नस्ल के पशुओं विशेषकर बकरियों की उत्पादकता में वृद्धि करने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। 

केंद्रीय प्रवर्तित योजना-नेशनल लाइव स्टॉक मिशन (NLM) के तहत अजमेर के रामसर स्थित राजकीय पशु प्रजनन फार्म में  अत्याधुनिक 'गोट सीमन उत्पादन प्रयोगशाला' की स्थापना की जाएगी। यह भारत की सबसे बड़ी लैब होगी, जिसमें सालाना दो लाख डोजेज तैयार की जाएंगी। इस आधुनिक प्रयोगशाला की स्थापना के लिए वित्तीय स्वीकृति जारी कर दी गई है। इस पर ₹875 लाख रुपए खर्च होंगे, जिसमें 60 फीसदी हिस्सेदारी केंद्र व 40 फीसदी हिस्सेदारी राजस्थान सरकार की है। इस लैब का मुख्य उद्देश्य उच्च आनुवंशिक गुणवत्ता वाले बकरों के सीमन से कृत्रिम गर्भाधान (AI) को बढ़ावा देना है।

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प्रयोगशाला को विश्वस्तरीय तकनीकी और वैज्ञानिक मानकों के अनुरूप संचालित करने के लिए राजस्थान सरकार ने उत्तर प्रदेश सरकार के साथ एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदारी की है। पशुपालन, गोपालन, डेयरी एवं देवस्थान मंत्री जोराराम कुमावत को MoU की प्रति सौंपी गई है। यह MoU उत्तर प्रदेश सरकार के उप्र. पंडित दीनदयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय एवं गो अनुसंधान संस्थान, मथुरा' के साथ किया गया है।

इस अवसर पर जोराराम कुमावत ने कहा, "यह समझौता राजस्थान के पशुपालन क्षेत्र के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होगा। मथुरा विश्वविद्यालय की तकनीकी विशेषज्ञता का लाभ उठाकर हम रामसर फार्म को देश के बेहतरीन गोट सीमन सेंटर्स में से एक के रूप में विकसित करेंगे। 

उन्होंने बताया कि राजस्थान में करीब दो करोड़ बकरियां हैं, जो पूरे भारत का 16 फीसदी है। बकरियों की संख्या के आधार पर राजस्थान देश का दूसरा सबसे बड़ा राज्य भी है। राज्य की पारंपरिक और प्रसिद्ध बकरी नस्लों  सिरोही, मारवाड़ी व जखराना प्रजाति के आनुवंशिक सुधार में मदद मिलेगी। दो लाख डोजेज की मदद से राज्यभर के सुदूर गांवों में पशुपालकों के द्वार तक बकरियों में कृत्रिम गर्भाधान की सुविधा पहुंचेगी। वैज्ञानिक पद्धति से तैयार सीमन के इस्तेमाल से बकरियों में फैलने वाली कई संक्रामक और आनुवंशिक बीमारियों पर लगाम लगेगी। यह राजकीय फार्म अब एक नेशनल हब के रूप में उभरेगा। 

इस परियोजना के शुरू होने से राजस्थान के साथ ही पड़ोसी राज्यों के पशुपालक भी लाभान्वित हो सकेंगे। सरकार का लक्ष्य इस लैब को आगामी दिसंबर तक पूरी तरह क्रियाशील करने का है। पशुपालन विभाग के निदेशक डॉ. सुरेश कुमार मीना, राजस्थान पशुधन विकास बोर्ड के प्रबंधक डॉ. प्रीतपाल सिंह कालरा, 'उप्र. पंडित दीनदयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. अभिजीत मित्रा, मथुरा लैब गोट सीमन लैब के प्रभारी डॉ. मुकुल आनंद की मौजूदगी में MoU किया गया।

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