राजस्थान के इस इलाके मे जहां कभी टैंकरों का इंतजार था, वहां अब हर घर नल से जल

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Jal Jeevan Mission Pratapgarh

 

 

Udaipur Times, Jal Jeevan Mission, Pratpgarh News: एक वक़्त था जब उदयपुर संभाग के प्रतापगढ़ जिले के अरनोद क्षेत्र का कोटड़ी गांव गर्मियों की दस्तक के साथ ही पानी की बूंद बूंद की फिक्र से घिर जाता था। भूजल स्तर नीचे जाता तो हैंडपंपों का सहारा भी कमजोर पड़ जाता और गांव में टैंकरों से पानी पहुंचाना पड़ता था। जगह-जगह सार्वजनिक नल और हैंडपंप ही ग्रामीणों की पेयजल जरूरत का प्रमुख साधन थे। Jal Jeevan Mission

आज तस्वीर बदल चुकी है

जल जीवन मिशन के तहत तैयार की गई पाइप जल योजना ने कोटड़ी गांव और मजरा दूधिया के 570 परिवारों की जिंदगी में पेयजल के स्तर पर बड़ा बदलाव लाया है। अब पानी के लिए टैंकरों का इंतजार नहीं करना पड़ता। घरों तक पाइप लाइन के जरिए पेयजल पहुंच रहा है और गांव की पेयजल व्यवस्था पहले की तुलना में अधिक व्यवस्थित हुई है। Jal Jeevan Mission

पहले 21 हैंडपंप, फिर भी पानी की चिंता

जल जीवन मिशन से पहले गांव में कुल 21 हैंडपंप स्थापित थे, लेकिन इनमें केवल 7 चालू थे। 10 हैंडपंप मौसमी, 3 सूखे और 1 सिंगल फेज होने के कारण उपयोग में नहीं था। गर्मियों में भूजल स्तर गिरने से स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो जाती थी। ग्रामीणों को टैंकर से जलापूर्ति पर निर्भर रहना पड़ता था। इसके अलावा गांव के विद्यालय, आंगनबाड़ी केंद्र, स्वास्थ्य केंद्र और ग्राम पंचायत कार्यालय जैसे महत्वपूर्ण संस्थानों में भी नल कनेक्शन उपलब्ध नहीं थे। Jal Jeevan Mission

अब पाइप लाइन से घर-घर पेयजल

जल जीवन मिशन के अंतर्गत कोटड़ी में 5 नलकूप, 350 किलोलीटर क्षमता का उच्च जलाशय और 100 किलोलीटर क्षमता का स्वच्छ जलाशय तैयार किया गया। गांव में जल वितरण के लिए 9,406 मीटर लंबी पाइप लाइन बिछाई गई तथा 570 जल संबंध दिए गए। इसके बाद गांव की पेयजल व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव आया। गर्मियों में पर्याप्त पेयजल उपलब्ध होने के कारण टैंकरों से पानी पहुंचाने की आवश्यकता नहीं पड़ी। Jal Jeevan Mission

पानी सिर्फ घरों तक नहीं, संस्थानों तक भी

योजना ने गांव के सार्वजनिक जीवन को भी प्रभावित किया। वर्तमान में 6 स्कूलों और 3 आंगनबाड़ी केंद्रों में नल कनेक्शन से जलापूर्ति हो रही है। पंचायत कार्यालय, राजीव गांधी सेवा केंद्र और स्वास्थ्य केंद्र भी नल जल व्यवस्था से जुड़े हैं। पर्याप्त पेयजल उपलब्ध होने से गांव में स्वच्छता की स्थिति में भी सुधार आया। Jal Jeevan Mission

गांव बना अपनी जल व्यवस्था का भागीदार

कोटड़ी की सफलता केवल पाइप लाइन और जल संरचनाओं की कहानी नहीं है। इसके पीछे ग्रामीणों की भागीदारी भी महत्वपूर्ण है। ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति का गठन कर समुदाय को योजना के संचालन एवं संधारण से जोड़ा गया। समिति के सदस्यों को फील्ड टेस्ट किट के माध्यम से जल गुणवत्ता जांच का प्रशिक्षण दिया गया। स्थानीय ग्रामीणों को इलेक्ट्रीशियन, प्लंबर और फिटिंग जैसे ट्रेड में कौशल प्रशिक्षण भी दिया गया, ताकि गांव में ही योजना के संचालन एवं रखरखाव के लिए आवश्यक तकनीकी सहयोग उपलब्ध हो सके।

साझी जिम्मेदारी से बनी स्थायी व्यवस्था

योजना के संचालन एवं संधारण के लिए  प्रति जल संबंध 100 रुपये मासिक शुल्क निर्धारित किया गया। अगस्त 2026 तक ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति द्वारा 22.20 लाख रुपये की राशि एकत्रित की गई, जबकि संचालन एवं संधारण पर 23.43 लाख रुपये खर्च किए गए। नव निर्मित कॉलोनी के लिए 2,000 मीटर अतिरिक्त पाइप लाइन भी बिछाई गई।

कोटड़ी की कहानी बदलाव की उस तस्वीर को सामने लाती है, जहां “पानी की तलाश” धीरे-धीरे “पानी की नियमित उपलब्धता” में बदल गई। जल जीवन मिशन ने यहां केवल पेयजल Infrastructure नहीं बनाया, बल्कि समुदाय को अपनी जल व्यवस्था का सहभागी बनाकर उसके संचालन और संधारण की जिम्मेदारी से भी जोड़ा। Jal Jeevan Mission

कोटड़ी का संदेश साफ है - जब पानी घर तक पहुंचता है और गांव उसकी व्यवस्था में भागीदार बनता है, तो बदलाव सिर्फ नल में नहीं, पूरे गांव के जीवन में दिखाई देता है।

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