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2035 तक भारत का अपना भारतीय अंतरीक्ष स्टेशन होगा: डॉ देसाई, सेक, इसरो डायरेक्टर

भारत का जीपीएस सिस्टम नाविक जल्द ही काम करेगा, मोबाइल की जगह डिवाइस लेगी

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उदयपुर , 29 अगस्त 2025 - अरावली इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्निकल स्टडीज, उमरडा में दो दिवसीय अंतरीक्ष विज्ञान प्रदर्शनी उदयपुर। 2035 तक भारत का अपना भारतीय अंतरीक्ष स्टेशन होगा जिसके लिए प्रयास शुरु हो चुके हैं।

अगले कुछ सालों में भारत का स्वदेसी नेविगेशन सिस्टम नाविक भी होगा जो भारत का खुद का जीपीएस सिस्टम होगा। इसी तरह अगले करीब पांच साल की योजना के अनुसार भारत में भी मोबाइल फोन की जगह एक डिवाइस ले लेगी, जिसमें कभी भी नेटवर्क की समस्या नहीं रहेगी, बल्कि पूरे विश्व में कहीं से भी सेटेलाइट आधारित इस डिवाइस की मदद से बात कर सकेंगे।

भारत अंतरीक्ष विज्ञान की दुनिया में तेजी से काम कर रहा है और भारत ने 2062 तक की रणनीति तैयार कर ली है।

स्पेस एप्लीकेशंस सेन्टर, इसरो अहमदाबाद के डायरेक्टर डॉ निलेश एम देसाई ने शुक्रवार को अरावली इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्निकल स्टडीज, उमरडा में पत्रकारों से बात करते हुए यह जानकारी दी। संस्थान में आयोजित दो दिवसीय अंतरिक्ष विज्ञान प्रदर्शनी के शुभारंभ मौके पर श्री देसाई उदयपुर आए।

अरावली इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्निकल स्टडीज, उदयपुर के प्रांगण में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की शानदार उपलब्धियों को प्रदर्शित करने हेतु एक भव्य प्रदर्शनी का आयोजन किया गया जिसमें शहर के विभिन्न स्कूलों के विद्यार्थी भारत के अंतरीक्षा विज्ञान की उपलब्धियों के बारे में जानकारी प्राप्त कर रहे हैं।

प्रदर्शनी में रॉकेट लॉन्च वाहनों के मॉडल (जैसे पीएसएलवी व जीएसएलवी, प्रसिद्ध उपग्रहों और अंतरिक्ष यानों की प्रतिकृतियां (जैसे चंद्रयान, मंगलयान), अंतरिक्ष में भारत की यात्रा और भविष्य की योजनाओं की जानकारी तथा छात्रों और युवाओं के लिए प्रेरणादायक सत्र आयोजित किए जा रहे हैं।

डॉ देसाई ने कहा कि अंतराष्टीय अंतरीक्ष स्टेशन की स्थापना में भारत का सहयोग नहीं था जिसमें पांच छह अन्य देश शामिल थे। लेकिन अब भारत खुद का भारतीय अंतरीक्ष स्टेशन स्थापित करने की ओर से कदम बढा चुका है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की घोषणा अनुसार तथा इसरो द्वारा तय किए गए प्रोग्राम के मुताबिक 2035 तक इसका लक्ष्य रखा गया है। 2028 से 2035 तक इसके पांच माड्यूल होंगे जिसके प्रथम चरण के माड्यूल की करीब 22 हजार करोड रुपए की स्वीकृति मिल चुकी है।

प्रथम चरण में मुख्य मिशन गगनयान की लॉन्चिंग के साथ अंतरीक्ष स्टेशन की स्थापना का लक्ष्य है जिसके लिए यह बजट निर्धारित किया गया है। गगनयान के तीन मिशन मानवरहित होंगे जिसमें विभिन्न प्रकार के परीक्षण होंगे और उसकी सफलता के पश्चात दो मिशन मानव सहित होंगे।

डॉ देसाई ने बताया कि चंद्रयान-4 सन् 2028-29 तक लॉन्च किया जा सकता है जिसके लिए तैयारी चल रही है। भारत 2025 से 2040 तक 103 सेटेलाइट लॉन्च करेगा जिनमें 40 से 45 ऐसे हैं जिन पर वर्तमान में काम चल रहा है तथा बाकि समय की जरुरत के अनुसार नए होंगे। यह सारे सेटेलाइट इसरो ही लॉन्च करेगा ऐसा नहीं है, बल्कि इनमें प्राइवेट सेक्टर की भी मदद ली जाएगी। डॉ देसाई ने बताया कि वर्तमान में जो मोबाइल चल रहे हैं वे डायरेक्ट टू डिवाइस आधारित है।

अगले कुछ सालों में इसकी जगह ऐसी डिवाइस ले लेगी जो छोटी होगी, वजन में कम होगी, बार-बार चार्जिंग की जरुरत नहीं रहेगी और जिससे दुनिया के किसी भी कोने से बात हो सकेगी। इसके लिए एक सेटेलाइट लॉन्च करने जा रहे हैं और अगले पांच सालों में यह संभव पाएगा ऐसा प्रयास किया जा रहा है।

अमेरिका इस दिशा में आगे बढ चुका है और संभव है कि कुछ समय में अमेरिका में ऐसी डिवाइस ऑपरेशनल हो जाएगी। डॉ देसाई ने स्वदेसी नेविगेशन सिस्टम नाविक के बारे में भी चर्चा की तथा बताया कि इस पर कई सालों से काम चल रहा है, लेकिन कुछ तकनीकी दिक्कतों से इसमें अभी भी इसरो के इंजीनियर काम कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि अगले एक-डेढ साल में नाविक काम करने लगेगा जिसके बाद देश के नागरिकों के साथ देश की सेना को भी इसका सबसे ज्यादा लाभ मिलेगा।

उन्होंने कहा कि वर्तमान में एक जवान के लापता होने पर तलाशना मुश्किल हो जाता है, लेकिन नाविक के काम करने के बाद यह असंभव नहीं रहेगा। जवान की कलई में घडी की तरह डिवाइस लगेगी जो उसकी हर एक लोकेशन के बारे में जानकारी देगी।

भारत का यह अपना सिस्टम होने से किसी दूसरे देश पर निर्भर नहीं रहना पडेगा।

अरावली इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्निकल स्टडीज में इसरो (ISRO) की 2 दिवसीय प्रदर्शनी एवं संगोष्ठी का शुभारंभ भारतीय अन्तरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के विक्रम साराभाई अंतरिक्ष प्रदर्शनी केंद्र व अंतरिक्ष उपयोग केंद्र अहमदाबाद द्वारा अरावली इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्निकल स्टडीज, उमरड़ा में शुक्रवार को इसरो की दो दिवसीय विक्रम साराभाई स्पेस एग्जीबिशन एवं संगोष्ठी का भव्य शुभारंभ हुआ।

उद्घाटन समारोह के मुख्य अतिथि डॉ. निलेश एम. देसाई, माननीय निदेशक, स्पेस एप्लीकेशन्स सेंटर (SAC), ISRO, अहमदाबाद रहे।

इस अवसर पर मंचासीन अतिथियों में श्री नीरज माथुर, अध्यक्ष, SSME, श्री उल्केश वी. देसाई, उपाध्यक्ष, SSME, श्री विमल शाह, कोषाध्यक्ष, SSMB, इसरो अहमदाबाद, श्री एन.एल. खेतान, सचिव, अरावली ग्रुप ऑफ कॉलेजेज श्री अमित अग्रवाल, वित्त सचिव अरावली ग्रुप ऑफ कॉलेजेज एवं डॉ. हेमंत धाभाई, निदेशक, अरावली इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्निकल स्टडीज उपस्थित रहे।

संगोष्ठी का प्रथम सत्र मुख्य अतिथि डॉ. निलेश एम. देसाई द्वारा 'भारत की मानव अंतरिक्ष उड़ान एवं अंतरिक्ष स्टेशन तक की यात्रा' विषय पर मुख्य व्याख्यान से प्रारंभ हुआ।

इस दौरान उन्होंने विद्यार्थियों द्वारा पूछे गए अंतरिक्ष कार्य एवं उससे जुड़ी चुनौतियों से संबंधित सभी प्रश्नों का धैर्यपूर्वक उत्तर दिया और उन्हें विज्ञान एवं शोध की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। इसके पश्चात द्वितीय एवं तृतीय सत्र क्रमशः श्री नीरज माथुर श्री आशीष सोनी एवं श्री उल्केश बी. देसाई, श्री नितिन कुमार शर्मा द्वारा संचालित किए गए। कार्यक्रम का स्वागत भाषण डॉ. हेमंत धाभाई, निदेशक, AITS द्वारा प्रस्तुत किया गया।

दो दिवसीय इस आयोजन में प्रदर्शनी के माध्यम से इसरो की उपलब्धियों, रॉकेट, सैटेलाइट एवं अंतरिक्ष अभियानों के मॉडल प्रदर्शित किए गये।

इस प्रदर्शनी में भारतीय अनुसंधान के कुछ विशेष प्रोजेक्ट्स जैसे पोलर सेटेलाईट व्हीकल, जियो स्टेशनरी लॉन्च व्हीकल, अनेक सेटेलाईट ओर उनके पेलोड, ओ.सी.एम. आदि प्रक्षेपण यान, चन्द्रयान पेनल का विडियों मोडल, मंगल यान की डॉक्यूमेन्ट्री, सेटेलाईट्स के कार्यशील मोडल के अतिरिक्त और भी कई मॉडल्स की प्रदर्शनी की गयी। प्रदर्शनी का उद्देश्य विद्यार्थियों एवं युवाओं में अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति जिज्ञासा एवं अनुसंधान की भावना को प्रोत्साहित करना है।

अरावली संस्थान के निदेशक डॉ. हेमन्त धाभाई के अनुसार उदयपुर संभाग के कई निजी व सरकारी विद्यालय तकनीकी शिक्षण संस्थानों व अन्य कॉलेजों के तकरीबन 2700 से अधिक विद्यार्थियों ने उदघाट्न के पहले दिन प्रदर्शनी का लाम लिया। संस्थान के वित्त सचिव श्री अरिष्ठाभूताल के अनुसार यह आयोजन अरावली के उत्कृष्ट एकेडमिक श्रेष्ठता की ओर मील का पत्थर साबित होगा व इससे विज्ञान के क्षेत्र में रूचि रखने वाले संभाग के विद्यार्थीयों को तकनीकी एवं विज्ञान के क्षेत्र का अधिक एक्सपोजर मिलेगा।

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