आबू में मिला देश का दूसरा सबसे मोटा सफेदा वृक्ष

ब्रिटिशकाल में रोपा गया करीब 150 साल पुराना पेड़, राष्ट्रीय रिकॉर्ड से मिलान के बाद सामने आया महत्व

 | 
The Second Thickest tree of India
वन विज्ञानी डॉ. सतीश कुमार शर्मा के शोध से राजस्थान की वृक्ष विरासत का नया अध्याय उजागर

Udaipur Times News, Unique Discovery, Second Tickest Tree of India उदयपुर/जयपुर, 8 सितम्बर। राजस्थान की प्राकृतिक और वन विरासत को लेकर एक महत्वपूर्ण खोज सामने आई है। माउंट आबू वन्यजीव अभयारण्य में ब्रिटिशकाल में लगाया गया करीब 150 वर्ष पुराना सफेदा (यूकेलिप्टस) वृक्ष देश का दूसरा सबसे मोटा सफेदा वृक्ष पाया गया है। इसकी खोज और रिकॉर्ड संबंधी पड़ताल उदयपुर के वन विशेषज्ञ एवं पूर्व वन अधिकारी डॉ. सतीश कुमार शर्मा ने की है।

माउंट आबू वन्यजीव अभयारण्य के उप वन संरक्षक अनिल गुप्ता की सूचना के बाद डॉ. शर्मा ने मौके पर पहुंचकर वृक्ष का अध्ययन किया और इसके माप-आंकड़ों का राष्ट्रीय रिकॉर्ड से मिलान किया। डॉ. शर्मा के शोध के अनुसार आबू पर्वत का यह विशाल सफेदा वृक्ष लगभग 150 वर्ष पुराना, करीब 20 मीटर ऊंचा है।

इसकी वक्ष ऊंचाई (छाती की ऊंचाई) पर परिधि 4.55 मीटर दर्ज की गई है। यही आंकड़ा इसे देश के विशाल सफेदा वृक्षों में दूसरे स्थान पर पहुंचाता है। खास बात यह है कि राष्ट्रीय रिकॉर्ड में दर्ज देश के सबसे मोटे सफेदा वृक्ष से आबू का यह वृक्ष महज 15 सेंटीमीटर पीछे है। Second Tickest Tree of India 

1859 में लगाया गया था देश का सबसे मोटा सफेदा

राष्ट्रीय रिकॉर्ड के अनुसार आंध्र प्रदेश के अनामैया जिले की मदनपल्ली रेंज स्थित हॉर्सली हिल पर देश का सबसे मोटा सफेदा वृक्ष दर्ज है।

हिल स्टेशन के नाम पर इसका नाम हॉर्सली हिल रखा गया। वर्ष 1859 में तत्कालीन चित्तूर जिले के कलेक्टर डब्ल्यू. एच. हॉर्सले ने वहां यूकेलिप्टस ग्रैंडिस प्रजाति का पौधा लगाया था। वर्ष 1995 में भारत सरकार ने इस वृक्ष को देश का सबसे बड़ा सफेदा वृक्ष घोषित करते हुए महावृक्ष पुरस्कार प्रदान किया था। Udaipur News

उस समय वृक्ष की आयु करीब 136 वर्ष, ऊंचाई 36 मीटर और वक्ष ऊंचाई पर परिधि 4.38 मीटर दर्ज की गई थी। वर्तमान में इसकी आयु करीब 167 वर्ष, ऊंचाई लगभग 40 मीटर और परिधि 4.70 मीटर बताई गई है।

सिर्फ 15 सेंटीमीटर का अंतर

आबू के सफेदा वृक्ष की खासियत उसकी मोटाई के साथ-साथ उसकी संरचना भी है।

डॉ. सतीश कुमार शर्मा के अनुसार वृक्ष के तने पर करीब तीन मीटर तक कोई शाखा नहीं है। इसके बाद तना कई शाखाओं में विभाजित हो जाता है। इतनी उम्र के बावजूद वृक्ष का खड़ा होना और उसका विशाल आकार आबू पर्वत की अनूठी जलवायु और यहां मौजूद पुराने वृक्षों की विरासत को सामने लाता है।

डॉ. शर्मा ने राष्ट्रीय स्तर पर उपलब्ध महावृक्ष रिकॉर्ड से इसके आंकड़ों का मिलान कर इस वृक्ष की अहमियत सामने रखी है। उनके अध्ययन से यह स्पष्ट हुआ कि आबू का यह पेड़ केवल राजस्थान का विशालतम सफेदा ही नहीं, बल्कि मोटाई के लिहाज से देश की महत्वपूर्ण वृक्ष विरासतों में शामिल है।

अब संरक्षण और पहचान की तैयारी

इस महत्वपूर्ण खोज के बाद वन विभाग द्वारा वृक्ष के संरक्षण की दिशा में कदम उठाए जाने की तैयारी है। वृक्ष के समीप सूचना पट्ट (साइन बोर्ड) लगाने की योजना है, ताकि यहां आने वाले पर्यटकों और प्रकृति प्रेमियों को राजस्थान की इस दुर्लभ वृक्ष विरासत के बारे में जानकारी मिल सके। Mount Abu News

डॉ. शर्मा का कहना है कि ऐसे पुराने और विशाल वृक्ष केवल पेड़ नहीं, बल्कि किसी क्षेत्र के प्राकृतिक इतिहास के जीवंत दस्तावेज होते हैं। इनका वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण और संरक्षण आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहद जरूरी है।

माउंट आबू में मिला यह सफेदा इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि देश के सबसे मोटे सफेदा वृक्ष और इसके बीच अब अंतर महज 15 सेंटीमीटर रह गया है। ऐसे में डॉ. सतीश कुमार शर्मा का यह शोध राजस्थान के लिए एक महत्वपूर्ण वन-विरासत उपलब्धि के रूप में देखा जा सकता है।

Follow UdaipurTimes on Facebook , Instagram , and Google News