देवस्थान और इंटेक के बीच की खींचातानी से अब भी जगदीश मंदिर के गुम्बद पर पीपल उगने, पानी रिसाव की समस्या अधरझूल में

इस समस्या को हल न तो अब तक देवस्थान कर सका है न ही इंटेक, अब मामला पुरातत्व विभाग को सौंपने की तैयारी
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उदयपुर के घंटाघर से सिटी पैलेस रोड के बीच स्थित उदयपुर और मेवाड़ के धरोहर की पहचान जगदीश मंदिर की हालात से आप वाकिफ ही होंगे। जगदीश मंदिर के गुम्बद पर पीपल उगने और पानी रिसाव से होती परेशानी से देवस्थान विभाग भी वाकिफ हैं। लेकिन यह समस्या वैसी की वैसी ही बनी हुई हैं। इस समस्या को अब तक न तो देवस्थान हल कर सका है न ही इंटेक। उदयपुर टाइम्स कई दफा इस मुद्दे को उठाता आया हैं। 

देवस्थान विभाग की ओर से कयास लगाए गए थे कि इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज (INTACH) इस काम को ज़िम्मेदारी से कर दिखाएगा लेकिन अब इंटेक भी इस काम से मुंह मोड़ता नज़र आ रहा हैं। 

इंटेक ने पहले इस कार्य को सम्पन्न करवाने के लिए देवस्थान विभाग को 5 लाख के खर्चे का एस्टीमेट दिया था और मार्च के अंत तक कार्य पूरा करने का आश्वासन दिया था एवं इस कार्य में अधिक पैसे लगने पर जनसहयोग की भी बात की थी। हालाँकि इंटेक को इस हेतु करीब साढ़े तीन लाख का जनसहयोग भी मिला था। लेकिन बाद में इंटेक की दिल्ली की टीम ने सर्वे के बाद इस कार्य को सम्पन्न करने के लिए अनुमानतः 75 लाख रूपये का खर्चा बता दिया। जिससे देवस्थान को कदम पीछे खींचने पड़े। अब देवस्थान विभाग इस कार्य को पुरातत्व विभाग के मार्फत उक्त कार्य सम्पन्न करवाने की योजना बना रहा है।

देवस्थान विभाग की सहायक आयुक्त दीपिका  मेघवाल का कहना है कि इस काम को सही तरीके से करने के लिए विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं हैं। देवस्थान विभाग ने इंटेक को इस बात की ज़िम्मेदारी दी थी। लेकिन इंटेक की ओर से इस काम को करने के लिए ज्यादा समय और अधिक धन लिया जा रहा था। समय ज्यादा लेने के बाद भी इंटेक की ओर से कोई काम नहीं किया जा रहा था। इंटेक द्वारा पहले 5 लाख रुपए के खर्चे का आकलन बताया गया था लेकिन अब आकलन बढ़कर अनुमानतः 75 लाख हो गया। ऐसे में देवस्थान विभाग ने निर्णय लिया है कि पुरातत्व विभाग से पुरे खर्चे का आंकलन किया जाएगा फिर आगे इस काम को पूर्ण करने के लिए कार्रवाई की जाएगी।  

उदयपुर टाइम्स ने INTACH के संयोजक ललित पांडेय से सम्पर्क किया तो उन्होंने बताया कि इस कार्य में तकनीकी समस्या है इसलिए उन्हें कार्य शुरु करने में वक्त लगेगा। अब इस कार्य के लिए यदि पुरातत्व विभाग आगे आता है तो वह जनसहयोग की साढ़े तीन लाख की राशि हस्तांतरित कर दी जाएगी। 

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