23 वर्षीय कृति मेहता ने बी-टेक छोडक़र गुप्त रूप से ली जैनेश्वरी भागवती दीक्षा
उदयपुर की कृति बनीं चर्चा का केंद्र, गुप्त दीक्षा से दिया वैराग्य का संदेश
उदयपुर 24 अप्रैल 2026। शहर की 23 वर्षीया कृति मेहता ने सांसारिक वैभव, उच्च शिक्षा और उज्ज्वल करियर को त्याग कर जैन भागवती दीक्षा ग्रहण कर ली। बी-टेक कंप्यूटर साइंस की छात्रा कृति ने 4 अन्य मुमुक्षु बहनों के साथ बीकानेर जिले के नोखा कस्बे के जोरावरपुरा स्थित बाड़ी शिव मंदिर परिसर में संयम पथ अपनाया।
श्री साधुमार्गी जैन संघ, उदयपुर के अध्यक्ष सागर गोलछा ने बताया कि यह पावन दीक्षा भगवान महावीर की पाठ परंपरा के 82वें आचार्य एवं साधुमार्गी जैन संघ के पूज्य आचार्य रामेश महाराज व उपाध्याय प्रवर्तक राजेश मुनि महाराज आदि ठाना के सान्निध्य में सम्पन्न हुई।
समारोह में सबसे भावुक क्षण तब आया जब पूर्व में घोषित 4 मुमुक्षुओं के साथ उदयपुर की कृति मेहता ने भी गुप्त रूप से दीक्षा ग्रहण की। दीक्षा विधि शुरू होने तक किसी को इसकी भनक तक नहीं थी। आज के डिजिटल और प्रदर्शन प्रधान युग में, जहां हर छोटी-बड़ी बात सोशल मीडिया पर डाली जाती है, वहीं उदयपुर की कृति मेहता ने 5-7 साल से मन में पल रही वैराग्य भावना को पूर्णत: गुप्त रखकर गुरु चरणों में समर्पित किया। उन्होंने संयम मार्ग अपनाने से पूर्व भी किसी तरह के फोटो, वीडियो व आडम्बर से दूरी बनाए रखी। उनकी यह विनम्रता और सच्चा त्याग हजारों श्रद्धालुओं के लिए प्रेरणा बन गया।
उदयपुर की होनहार कृति मेहता का परिचय
कृति मेहता, पुत्री सुनील मेहता, मूलत: बड़ी सादड़ी से हैं तथा उदयपुर के हिरण मगरी सेक्टर-4 में निवासरत हैं। उनके पिता का सेक्टर-4 में ही स्टेशनरी व्यवसाय है। पूरा परिवार धार्मिक संस्कारों से ओत-प्रोत है। कृति बी-टेक कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई कर रही थीं और आधुनिक शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ रही थीं। ऐसे समय में जब युवा उच्च शिक्षा और करियर को प्राथमिकता देते हैं, उदयपुर की इस प्रतिभाशाली युवा ने मात्र 23 वर्ष की आयु में मोक्ष मार्ग चुनकर समाज के सामने अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया।कृति मेहता ने दिखावे से दूर रहकर पूर्ण समर्पण भाव से यह निर्णय लिया, जो आज के युग में अत्यंत दुर्लभ माना जाता है।
नवदीक्षित साध्वियों के नाम
दीक्षा उपरांत पूज्य आचार्य ने नामकरण किया जिसमें उदयपुर की कृति मेहता को साध्वी रामकर्णिका श्रीजी महाराज, विनुषी भंडारी को साध्वी रामवीणा श्रीजी महाराज, कविता बोथरा को साध्वी रामकाव्या श्रीजी महाराज, यशवी जैन को साध्वी रामयशा श्रीजी महाराज, एकता कातेला को साध्वी रामकली श्रीजी महाराज नाम की उपाधि दी गई। चांदक भवन में हुए अभिनंदन समारोह में हजारों श्रद्धालु उपस्थित रहे। आचार्य रामेश महाराज ने कहा, मोह-माया का त्याग ही सच्चे सुख का मार्ग है। संयम जीवन से ही आत्मा परमात्मा बनती है।
जैन दीक्षा : कठिन तप का मार्ग
दीक्षा उपरांत मोबाइल, वाहन, टीवी आदि सभी भौतिक संसाधनों का पूर्ण त्याग कर साध्वियां श्वेत खादी वस्त्र, धार्मिक ग्रंथों एवं भिक्षा पात्र के साथ गुरु आज्ञा में विचरण करती हैं। उदयपुर की बेटी कृति मेहता द्वारा अल्पायु में लिया गया यह निर्णय भौतिकता के युग में त्याग और वैराग्य की अनूठी मिसाल है। यह न केवल मेहता परिवार बल्कि पूरे उदयपुर के लिए गौरव का विषय है।
गुप्त दीक्षा बनी चर्चा का विषय
आज के डिजिटल और प्रदर्शन प्रधान युग में, जहां हर निर्णय सार्वजनिक किया जाता है, वहीं उदयपुर की कृति मेहता ने अपनी दीक्षा को पूर्णत: गुप्त रखकर सच्चे वैराग्य और समर्पण का परिचय दिया। उन्होंने अपने इस निर्णय को इतना गुप्त रखा कि संयम मार्ग के पूर्व भी किसी तरह के फोटो व आडम्बर से दूर रही उनकी यह विनम्रता और त्याग भावना पूरे समारोह में विशेष चर्चा का विषय रही और उपस्थित हजारों श्रद्धालुओं के लिए गहरी प्रेरणा बन गई।
#Udaipur #RajasthanNews #UdaipurNews #JainDiksha #SpiritualIndia #YouthInspiration #IndianCulture #SanatanValues #Bikaner #Nokha #JainCommunity #PositiveNews
To join us on Facebook Click Here and Subscribe to UdaipurTimes Broadcast channels on GoogleNews | Telegram | Signal
