पर्यटन बनाम सुरक्षा-उदयपुर के पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था का अभाव


पर्यटन बनाम सुरक्षा-उदयपुर के पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था का अभाव

झीलों और पहाड़ो के नाम पर पर्यटन तो फलफूल रहा है लेकिन इन स्थानों पर सुरक्षा की व्यवस्था शून्य के बराबर है 

 
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झीलों की नगरी के नाम से विख्यात उदयपुर की झीले, झरने, जल प्रपात मानसून के समय बेहद दर्शनीय हो जाते है जहाँ निहारने के लिए सिर्फ स्थानीय ही नहीं बल्कि बड़ी संख्या में पर्यटक भी पहुँचते है।  ऐसे में इन स्थानों पर सुरक्षा संबंधित खतरा भी बढ़ जाता है। लोगो को झरने के पानी का वेग और गहराई का अंदाज़ा नहीं होता है। और इसके चलते कई लोगो को अपनी जान गंवानी पड़ती है। फिर जहाँ पानी के अंदर घास आदि की मौजूदगी के कारण तैरना जानने वाला व्यक्ति भी शिकार हो जाता है। 

आज ही शुक्रवार 28 जून 2024 के दिन अलग अलग स्थानों पर डूबकर दो लोगो की मौत हो गई। एक घटना फतहसागर पर घटी जबकि दूसरी घटना आयड़ स्थित गंगू कुंड पर घटित हुई। कुछ दिन पूर्व भी गंगू कुंड में दो लोगो की डूबकर मौत हुई थी। आये दिन फतहसागर, पिछोला, उदयसागर, सुखानाका, जयसमंद जैसी झीलों में लोगो के डूबकर मरने की खबर मीडिया में आती रहती है।  वही कुछ दिन पहले गोगुन्दा रोड पर स्थित शिवालिक डैम पर परिवार के साथ पिकनिक मनाने पहुंचा किशोरवय के युवक की मौत हुई थी।  इसी शिवालिक डैम पर पिछले मानसून में भी एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। 

ऐसे में सवाल उठता है की झीलों की नगरी कही जाने वाली पर्यटन नगरी में झीलों में डूबकर होने वाली मौतों का ज़िम्मेदार कौन है ? यकीनन इसका पहला जवाब लोगो की लापरवाही कहा जाना चाहिए। लेकिन प्रशासन के पास इसके अलावा कोई और जवाब है क्या ? नागरिक सुरक्षा टीम मौजुद है लेकिन अब तक नागरिक सुरक्षा टीम झीलों में से शवों को बाहर निकालने का ही कार्य कर रही है। 

क्या नागरिक सुरक्षा टीम के सदस्यों को झीलों और ऐसे जोखिम वाले क्षेत्र जहाँ पानी में डूबने की सम्भावना बानी रहती है वहां तैनात नहीं किया जाना चाहिए जैसा की मुंबई, गोवा या अन्य तटीय क्षेत्रो में समुद्री बीच पर रेस्क्यू टीम मौजूद रहती है। क्यों नहीं रेस्क्यू टीम का कार्यालय या चौकी झील के किनारे मौजूद होना चाहिए अजहा सके पास स्पीड बोट समेत किसी को डूबने से बचाने के उपकरण मौजूद हो। 

एक तरफ पर्यटन के बढ़ावे पर ज़ोर दिया जाता है।  जबकि उदयपुर का पर्यटन का मुख्य आकर्षण यहाँ की झीले है।  इन ख़ूबसूरत झीलों को निहारने के लिए दूर दूर से पर्यटक आते है तो झीलों में सुरक्षा के सारे उपाय भी उपलब्ध होना ज़रूरी है। 

इस संबंध में Udaipur Times की टीम को उदयपुर ग्रामीण विधायक फूल सिंह मीणा ने आज की दोनों घटनाओ के मद्देनज़र दुःख ज़ाहिर करते हुए कहा कि मानसून के समय झीलों, नदी नालो और विशेषकर पर्यटन स्थलों पर ज़िले कलेक्टर और सरकार से बात कर सुरक्षा के आवश्यक कदम उठाएंगे।  उन्होंने कहा की हर जगह तो सुरक्षा टीम को तैनात नहीं किया जा सकता लेकिन पर्यटन स्थलों पर कलेक्टर और सरकार से सुरक्षा संबंधी चर्चा करेंगे।    

अभी दो दिन पहले ही UDA (उदयपुर विकास प्राधिकरण) ने फतहसागर झील के मध्य स्थित नेहरू गार्डन को थीम पार्क में विकसित करने का प्रावधान रखा है और काफी हद तक कार्य पूरा भी हो चूका है। फतहसागर झील के मध्य यह पार्क यकीनन बेहद ख़ूबसूरत है।  इससे न सिर्फ पर्यटक बल्कि स्थानीय लोगो की आवाजाही भी बढ़ेगी।  इस पार्क तक पहुंचने का ज़रिया नाव ही है। माना की नाव में लाइफ जैकेट्स भी पहनना अनिवार्य है।  लेकिन झील के मध्य बने इस गार्डन के किनारे पर किसी के गिरने पर बचाने की कोई व्यवस्था है ?

Udaipur Times टीम ने UDA के आयुक्त राहुल जैन से नेहरू गार्डन में सुरक्षा संबंधित सवाल किया तो उन्होंने बताया कि लोगो को लाने ले जाने वाली नाव के साथ रेस्क्यू बोट्स भी उपलब्ध रहेगी। लोगो को को नाव में बैठाने से पूर्व जिस प्रकार फ्लाइट्स में बैठते वक्त सुरक्षा उपायों को बताया जाता है उसी प्रकार बताया जाएगा।  इसके अतिरिक्त लाइफ जैकेट्स और अन्य उपकरण भी मौजूद रहेंगे।

हालाँकि ऐसा नहीं कि घटनाओ का ज़िम्मेदार सिर्फ प्रशासन ही है। लोगो को भी अपनी सुरक्षा का ख्याल रखना ज़रूरी है।  एक छोटी सी लापरवाही जान का खतरा बन सकती है। मानसून के दिनों में अक्सर झरने और एनीकट पर लोग पिकनिक मनाने पहुँचैत है जहाँ मौज मस्ती और उत्सुकता में पानी में नहाने के लिए उतर जाते है। वहीँ कुछ लोग नशे में पानी में लापरवाही करते हुए नज़र आते है तो कुछ युवा सेल्फी और रील बनाने के चक्कर में अपनी जान को जोखिम में डालते है। और उनको रोकने के लिए कोई मौजूद नहीं होता है। कई बार पुलिस का एकाध सिपाही वहां मौजूद रहता है लेकिन वह पर्याप्त नहीं है। हालाँकि पुलिस का काम किसी डूबते को बचाना नहीं है। लेकिन नागरिक सुरक्षा टीम को तो तैनात किया ही जा सकता है।  

इसी प्रकार उदयपुर में इको टूरिज्म भी बढ़ रहा है जहाँ लोग रायता हिल्स, पिपलिया, उबेश्वरजी, अलसीगढ़, झाड़ोल आदि क्षेत्रो की पहाड़ियों पर साइक्लिंग, बाइकिंग और पहाड़ो पर ट्रेकिंग जैसी गतिविधियां अंजाम देते है लेकिन वहां भी सुरक्षा को कोई इंतेज़ाम नहीं है। या तो ऐसी जगहों पर सुरक्षा एक पुख्ता इंतेज़ाम हो अथवा ऐसी जगहों पर आवाजाही पर प्रतिबंध हो।  हालाँकि प्रतिबंध कोई उपाय नहीं लेकिन सुरक्षा उपायों के बारे में तो सोचा ही जा सकता है। 

पर्यटन विभाग की उपनिदेशक शिखा सक्सेना ने आगामी मानसून सीज़न में  पर्यटकों की सुरक्षा के संदर्भ में उप वन संरक्षक को पत्र लिखकर आगाह किया है की मानसून सीज़न शुरू होने से सज्जनगढ़ दुर्ग पर्यटकों की आवाजाही अधिक होने की संभावना है। अतः सज्जनगढ़ दुर्ग के सड़क के दोनों ओर सड़को की तकनीकी दृष्टि से सुरक्षा और 'No Selffie point' को बोर्ड लगवाए जाये।

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