आज़ादी की कोशिश में टूट गए लेपर्ड के दांत

आखिर गलती किसकी है? जंगल में घुसते इंसान की या अपने स्वभाव के अनुसार जी रहे वन्यजीव की?
 
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उदयपुर 13 मई 2026। ज़िले के बड़ी ग्राम क्षेत्र के उपली गांव में वन विभाग द्वारा लगाए गए पिंजरे में एक बार फिर करीब 3 साल की मादा पैंथर कैद हो गई। 

बताया जा रहा है कि कैद होते ही लेपर्ड ने बाहर निकलने के लिए पिंजरे की लोहे की जालियों को दांतों से काटने और दीवारों से टकराने तक की कोशिश की। इसी संघर्ष में उसके शिकार करने वाले अहम दांत टूट गए। अब सवाल यह उठ रहा है कि जंगल की यह शिकारी बिना दांतों के आने वाले करीब 15 साल कैसे जिएगी?

कुछ दिन पहले इसी गांव में भूरी बाई पर हुए हमले के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश था। वन विभाग ने लेपर्ड पकड़ने के लिए पिंजरे लगाए थे, लेकिन अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि भूरी बाई की मौत जिस लेपर्ड के हमले से हुई, वह यही मादा पैंथर है, पहले पकड़ा गया लेपर्ड था या फिर कोई तीसरा वन्यजीव।

सबसे बड़ा सवाल इंसान और जंगल के टकराव का है। लगातार जंगल सिकुड़ रहे हैं और इंसान वन्यजीवों के क्षेत्र में बसते जा रहे हैं। ऐसे में शिकार करना पैंथर का स्वभाव और जीवन चक्र का हिस्सा है, लेकिन अब आज़ादी के संघर्ष में उसके दांत टूट गए और वह शिकार करने तक के लिए मोहताज हो गई। आखिर गलती किसकी है? जंगल में घुसते इंसान की या अपने स्वभाव के अनुसार जी रहे वन्यजीव की?

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