Udaipur Times, Udaipur News: उदयपुर शहर के पास उमरड़ा खेड़ा गांव में पांच लोगों पर हमला करने वाला लेपर्ड आखिरकार शनिवार सुबह वन विभाग के लगाए पिंजरे में कैद हो गया। बुधवार से लगातार लेपर्ड की तलाश में जुटी वन विभाग की टीमों को आखिरकार सफलता मिली। लेपर्ड के पकड़े जाने के बाद ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है।
कैमरा ट्रैप और ड्रोन से नहीं मिल रही थी लोकेशन
वन विभाग की टीमें पिछले कई दिनों से उमरड़ा खेड़ा गांव और आसपास के घने जंगल तथा पहाड़ी इलाकों में लेपर्ड की तलाश कर रही थीं। इसके लिए चार अलग-अलग स्थानों पर पिंजरे लगाए गए थे, लेकिन लेपर्ड इनमें नहीं आया।
शुरुआत में कैमरा ट्रैप से भी उसकी मौजूदगी का पता नहीं चल रहा था। वन विभाग ने ड्रोन की मदद से भी जंगल और पहाड़ी इलाकों में निगरानी की, लेकिन लेपर्ड नजर नहीं आया।
इंप्रेशन पैड से ट्रेस की लोकेशन
इसके बाद वन विभाग ने लेपर्ड की गतिविधियों का पता लगाने के लिए इंप्रेशन पैड की मदद ली। जिन स्थानों पर लेपर्ड के पैरों के निशान मिले, वहां से उसकी आवाजाही और संभावित मूवमेंट का अनुमान लगाया गया।
शुक्रवार को कैमरा ट्रैप में भी लेपर्ड की मौजूदगी सामने आई। इसके बाद वन विभाग ने पैरों के निशान और कैमरा ट्रैप से मिले इनपुट के आधार पर अपनी रणनीति बदली।
रात में बदली गई पिंजरों की लोकेशन
डीएफओ डीके तिवारी ने बताया कि लेपर्ड की संभावित आवाजाही वाले स्थानों की पहचान करने के बाद पिंजरों की लोकेशन बदली गई। रात में कई बार पिंजरों को अलग-अलग संभावित स्थानों पर शिफ्ट किया गया।
इसी रणनीति के तहत शनिवार सुबह लेपर्ड एक पिंजरे में फंस गया। लेपर्ड के पकड़े जाने के बाद वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर उसे सुरक्षित कब्जे में लिया।
तीन दिन में पांच लोगों पर किया था हमला
उमरड़ा खेड़ा गांव में लेपर्ड ने मंगलवार शाम से बुधवार दोपहर के बीच पांच लोगों पर हमला किया था। मंगलवार शाम लेपर्ड ने 45 वर्षीय लोगर लाल मीणा पर हमला किया था। गंभीर रूप से घायल लोगर लाल की इलाज के दौरान मौत हो गई थी।
इसके बाद बुधवार सुबह लेपर्ड ने 60 वर्षीय जग्गा पुत्र कालू मीणा, 20 वर्षीय हितेश पुत्र गंगाराम और 40 वर्षीय कालू पर हमला किया। इसके बाद दोपहर में 45 वर्षीय महिला लोगरी बाई पर भी लेपर्ड ने हमला कर दिया था।
लगातार हमलों के बाद गांव में दहशत का माहौल था और प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्र के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया था। अब लेपर्ड के पिंजरे में कैद होने के बाद ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है।