मावली हत्याकांड में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, आरोपी को दुष्कर्म और पॉक्सो के आरोपों से बरी किया; उम्रकैद बरकरार
राजस्थान हाईकोर्ट ने वैज्ञानिक और चिकित्सकीय साक्ष्यों को अपर्याप्त मानते हुए दुष्कर्म व पॉक्सो की दोषसिद्धि निरस्त की, हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा कायम रखी
Udaipur Times News, LegalNews ,MurderCase ,POCSO , उदयपुर 3 अगस्त 2026 - मावली क्षेत्र में वर्ष 2023 में आठ वर्षीय बालिका की हत्या और दुष्कर्म के बहुचर्चित मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले में बड़ा बदलाव किया है।
हाईकोर्ट ने मुख्य आरोपी कमलेश सिंह की दुष्कर्म और पॉक्सो अधिनियम के तहत हुई दोषसिद्धि को निरस्त करते हुए इन आरोपों से बरी कर दिया है। हालांकि हत्या के अपराध में आरोपी को सुनाई गई आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा गया है। UdaipurNews
हाईकोर्ट ने आरोपी के माता-पिता किशन कंवर और रामसिंह को भी साक्ष्य मिटाने और सूचना छिपाने के आरोपों से दोषमुक्त कर दिया है। मामले में विशिष्ट न्यायालय पॉक्सो एक्ट क्रम-2 ने 4 नवंबर 2024 को कमलेश सिंह को दुष्कर्म, पॉक्सो और हत्या सहित विभिन्न धाराओं में दोषी मानते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई थी। वहीं उसके माता-पिता को साक्ष्य मिटाने के आरोप में चार-चार वर्ष के कारावास की सजा सुनाई गई थी। CourtVerdict
बलात्कार के आरोप साबित नहीं कर पाया अभियोजन
चीफ डिफेन्स काउंसिल एडवोकेट गोविंद वैष्णव ने बताया की राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ ने आरोपी की अपील और मृत्युदंड की पुष्टि के लिए पेश रेफरेंस याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष बालिका के साथ दुष्कर्म होने का आरोप ठोस रूप से साबित नहीं कर पाया। CrimeNews
वैष्णव ने बताया की अदालत ने पाया कि दुष्कर्म के संबंध में पर्याप्त वैज्ञानिक, चिकित्सकीय या मौखिक साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं। मृतका के कपड़ों से मिले वीर्य के नमूनों का डीएनए भी आरोपी से मेल नहीं खाया। मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट में भी दुष्कर्म के संबंध में कोई स्पष्ट राय सामने नहीं आई।
जांच में कई गंभीर कमियां सामने आईं
हाईकोर्ट ने अपने विस्तृत फैसले में जांच प्रक्रिया में कई कमियों का भी उल्लेख किया। प्रारंभिक जांच अधिकारी अजय सिंह ने जिरह के दौरान स्वीकार किया कि किसी भी आरोपी की निशानदेही पर शव या कोई आपत्तिजनक वस्तु बरामद नहीं हुई। अदालत ने यह भी पाया कि शव की पैकिंग, सीलिंग और सुरक्षित अभिरक्षा से जुड़े आवश्यक दस्तावेज मौके पर तैयार नहीं किए गए।
घटनास्थल से फिंगरप्रिंट और फुटप्रिंट भी नहीं लिए गए तथा कथित हथियारों पर उंगलियों के निशान तलाशने का प्रयास नहीं किया गया। MurderCase
डॉग स्क्वायड भी किसी आरोपी तक नहीं पहुंचा और पहले दिन की जांच से संबंधित अलग रिपोर्ट तैयार नहीं की गई। जब्त वस्तुओं की चेन ऑफ कस्टडी और तलाशी की प्रक्रिया में भी कई प्रक्रियात्मक कमियां सामने आईं।
जांच पूरी करने वाली अधिकारी ने भी स्वीकार किया कि आरोपी के खिलाफ कोई प्रत्यक्षदर्शी नहीं था। माता-पिता की निशानदेही पर कोई बरामदगी नहीं हुई और उनके खिलाफ कोई वैज्ञानिक या चिकित्सकीय साक्ष्य भी उपलब्ध नहीं था।
परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर हत्या साबित
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि केवल जांच में कमी होने से अभियोजन का मामला स्वतः समाप्त नहीं हो जाता, लेकिन जब पूरा मामला परिस्थितिजन्य और वैज्ञानिक साक्ष्यों पर आधारित हो तो जांच का निष्पक्ष, पारदर्शी और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार होना बेहद आवश्यक है।
अदालत ने उपलब्ध परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर हत्या का अपराध साबित माना और भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत आरोपी को सुनाई गई आजीवन कारावास की सजा बरकरार रखी। वहीं धारा 376-एबी और पॉक्सो अधिनियम की धारा 5(एम) एवं 6 के तहत दोषसिद्धि को निरस्त करते हुए आरोपी को इन आरोपों से बरी कर दिया।
स्कूल से घर लौटने के बाद लापता हुई थी बालिका
मामला मार्च 2023 का है। मावली क्षेत्र में आठ वर्षीय बालिका स्कूल से घर लौटने के बाद लापता हो गई थी। बाद में उसका शव टुकड़ों में आरोपी के घर के पास स्थित एक खंडहर में बोरे से बरामद हुआ था। पुलिस के अनुसार आरोपी ने बच्ची को चॉकलेट का लालच देकर बुलाया, उसकी हत्या की और शव के टुकड़े कर उन्हें ठिकाने लगाया।
आरोपियों को मिली निशुल्क विधिक सहायता
चीफ लीगल एड डिफेंस काउंसिल गोविंद वैष्णव ने बताया कि आरोपी कमलेश सिंह और उसके माता-पिता की ओर से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, उदयपुर के माध्यम से हाईकोर्ट में अपील दायर की गई थी। इससे पहले निचली अदालत में भी आरोपियों को निशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराई गई थी।
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