MLSU विवाद-ABVP की रैली, 4 छात्र हिरासत में

शहर विधायक ताराचंद जैन ने भी जताई नाराज़गी 
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MLSU Controvercy

उदयपुर 19 सितंबर 2025 । मोहानलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय, उदयपुर में कुलपति प्रो. सुनीता मिश्रा के मुग़ल शासक औरंगज़ेब को 'कुशल प्रशासक' बताने  वाले अनर्गल बयान के विरोध में ABVP का प्रदर्शन पांचवें दिन भी जारी रहा। शुक्रवार को ABVP कार्यकर्ताओं और छात्रों ने महाराणा प्रताप के मुखौटे पहनकर परिसर में रैली निकाली। 

महाराणा प्रताप का आदर्श और मेवाड़ की गौरवशाली विरासत का संदेश देतें हुए सभी छात्र मार्च करते हुए प्रशासनिक भवन तक पहुंचे और वहां नारेबाजी की।
 
महानगर मंत्री पुष्पेन्द्र सिंह राठौड़ ने कहा कि ऐसे बयान मेवाड़ की संस्कृति और इतिहास का अपमान हैं, पिछले दो वर्षों में कुलगुरु ने औरंगजेब को अपना आदर्श मानते हुए क्रूर मुग़लिया रवैया अपनाते हुए विश्वविद्यालय में मनमानी व लूट खसौट की है, इसलिए कुलगुरु का बर्खास्त करना जरूरी है। रैली का उद्देश्य महाराणा प्रताप की सेना ने जिस प्रकार से मुगलों को भगाने का कार्य किया था उसी प्रकार से ABVP महाराणा प्रताप की सेना के रूप में कुलगुरु को यहां से भगाएगी।

इकाई अध्यक्ष प्रवीण टांक ने कहा  कि उनका आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण है और यह आंदोलन कुलगुरु की बर्खास्तगी तक चलता रहेगा। प्रदर्शन में गौतम बंधु, मिलिंद पालीवाल, त्रिभुवन सिंह, चिराग दायमा, युवराज सिंह, अंशुमान सिंह, चिराग दरवर, अतुल कलाल, हेमेंद्र सिंह, कुणाल सेन, पीयूष झाला, खुशी, माया, करिश्मा, गौरव मेनारिया आदी कार्यकर्ता मौजूद रहे।

आंदोलन के दौरान यूनिवर्सिटी पूरी तरह बंद रही। आर्ट्स, साइंस, कॉमर्स और लॉ कॉलेज सहित सभी विभागों में पढ़ाई ठप रही। इस दौरान आक्रोशित छात्र नेता कुलपति आवास पर पहुंच गए और गेट पर लगी नेम प्लेट पर काली स्याही पोतने की कोशिश की। मौके पर तैनात पुलिस ने उन्हें खदेड़ दिया। पुलिस ने छात्र नेता देवेंद्र सिंह, समीर मेघवाल, नारायण सिंह और मयंक सिंह को हिरासत में लिया। छात्र नेताओं की गिरफ्तारी से अन्य छात्र और अधिक आक्रोशित हो गए।

इधर, उदयपुर शहर विधायक ताराचंद जैन ने संभागीय आयुक्त प्रज्ञा केवलरमानी से मुलाकात की और कुलपति प्रो. सुनीता मिश्रा पर लग रहे आरोपों की जांच कर रिपोर्ट राजभवन और सरकार को भेजने की मांग की। जैन ने कहा कि कुलपति पर कई गंभीर शिकायतें हैं, जिनमें कर्मचारियों के साथ अशोभनीय भाषा का इस्तेमाल प्रमुख है। इस कारण कर्मचारियों में भी नाराजगी पाई जा रही है।