उदयपुर में एग्रीकल्चर एंड लाइवस्टॉक एंटरप्रेन्योरशिप पर नेशनल कांफ्रेन्स का शुभारंभ

महिलाओं को आत्मनिर्भर और सक्षम बनाकर ही साकार होगा विकसित भारत का संकल्प - केबिनेट मंत्री डॉ किरोड़ीलाल मीणा
 | 
Dr. Kirori Lal Meena inaugurating National Agriculture & Livestock Entrepreneurship Conference in Udaipur

कृषि एवं पशुधन उद्यमिता से ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बदलाव पर हो रहा मंथन

उदयपुर, 11 नवम्बर 2025 । राजीविका (राजस्थान ग्रामीण आजीविका विकास परिषद), ग्रामीण विकास विभाग, राजस्थान एवं ग्रामीण विकास मंत्रालय भारत सरकार के संयुक्त तत्वावधान में एग्रीकल्चर एंड लाइवस्टॉक एंटरप्रेन्योरशिप पर तीन दिवसीय नेशनल कांफ्रेन्स का शुभारंभ मंगलवार को होटल ताज अरावली में कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री डॉ किरोड़ीलाल मीणा के मुख्य आतिथ्य में हुआ।

कार्यशाला में देश भर से विशेषज्ञ, नीति निर्माता, उद्यमी तथा स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं शामिल हो रही हैं। कार्यशाला में कृषि एवं पशुधन उद्यमिता से ग्रामीण आजीविका के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित करने को लेकर मंथन किया जा रहा है। 

कार्यशाला के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि केबिनेट मंत्री डॉ किरोड़ीलाल मीणा ने  कार्यशाला में देश के समस्त राज्यों से आए हुए अतिथियों, अधिकारियों, विशेषज्ञों एवं प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि महिला सशक्तिकरण के लिए केंद्र व राज्य सरकारें निरंतर प्रयासरत हैं। मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने ग्रामीण विकास एवं राजीविका विभाग की पूरी बागडोर महिला अधिकारियों को सौंप कर सकारात्मक संदेश दिया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लखपति दीदी कार्यक्रम के माध्यम से देश भर में महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में ठोस पहल की है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की संकल्पना महिला सशक्तिकरण से ही सार्थक होगी।  

उन्होंने कहा कि राजीविका का उद्देश्य महिलाओं की सामाजिक व आर्थिक उन्नति के लिए स्वयं सहायता समूहों का गठन करना है।

राज्य में 50.69 लाख ग्रामीण परिवारों को 4.25 लाख स्वयं सहायता समूहों, 31 हजार ग्राम संगठन एवं 1074 सीएलएफ (क्लस्टर लेवल फेडरेशन) से जोडकर उन्हें वित्तीय सहायता एवं प्रशिक्षणों के माध्यम से उनकी आजीविका बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रही हैं।

आजीविका संवर्धन के अन्तर्गत लगभग 39.38 लाख परिवार कृषि एवं पशुपालन आधारित गतिविधियों से जुड़कर काम कर रहे हैं।

राजीविका के माध्यम से स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को रू. 2099.95 करोड़ की राशि आजीविका संवर्धन हेतु एवं रू.10342.96 करोड़ का बैंक ऋण उपलब्ध कराया गया।

महिलाओं द्वारा निर्मित उत्पादों की ऑनलाइन बिक्री बढ़ाने के लिए जैम एवं अमेजॉन ऑनलाइन प्लेटफार्म का उपयोग किया जा रहा हैं एवं फ्लिपकार्ट, ई-सरस पर प्रोडक्ट्स की ऑनलाइन मार्केटिंग की जा रही हैं।

डॉ मीणा ने कहा कि 7037 महिला बिजनेस कॉरेस्पोडेंस द्वारा गाँवो में डोर स्टेप बैंकिग सर्विस पहुंचायी जा रही हैं, जिसमें खाते खोलना, रकम निकासी एवं जमा करना इत्यादि गतिविधियां हैं।

विभिन्न जिला एवं ब्लॉक मुख्यालयों पर 254 कैंटीन प्रारम्भ की गई हैं जिसका संचालन राजीविका की महिलाओं द्वारा किया जा रहा हैं। उद्यम प्रोत्साहन के अन्तर्गत 54 हजार से अधिक महिला उद्यमों को स्थापित (सिलाई, ब्यूटी पार्लर, मसाला उधोग, हस्तशिल्प, किराना एवं लेडिज स्टोर इत्यादि) किया गया एवं प्रोत्साहन दिया गया है जिससें महिलाओं की आजीविका में वृद्धि हुई।

18,346 कृषकों को लाभान्वित करने के उद्देश्य से सोयाबीन व धनिया वैल्यूचौन विकसित करने हेतु रूपये 17.39 करोड़ की लागत से हाड़ौती महिला किसान प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड का गठन करके बारां एवं कोटा जिले के 18345 परिवारों को लाभान्वित किया गया हैं।

कृषि एवं पशुपालन एवं गैर-कृषि गतिविधियों को बढावा देने हेतु 3366 उत्पादक समूहों का गठन किया गया जिसके माध्यम से 1.89 लाख परिवारों को कृषि एवं पशुपालन गतिविधियों में जोड़ा गया हैं।

स्वयं सहायता समूहों की बिक्री को बढाने हेतु जयपुर, चुरू, श्रीगंगानगर, उदयपुर, अजमेर, अलवर, डुगरपुर, राजसमन्द, जोधपुर एवं कोटा जिलों में रिटेल स्टोर प्रारम्भ किए गए हैं।

केबिनेट मंत्री ने कहा कि लखपति दीदी योजना के अंतर्गत भारत सरकार के दिशा निर्देशानुसार अभी तक 796 मास्टर ट्रेनर प्रशिक्षित किया जा चुके हैं, इन लखपति मास्टर ट्रेनर द्वारा 19.45  लखपति सीआरपी को भी प्रशिक्षित किया जा चुका है। वर्तमान में 11.02 लाख महिलाओं को लखपति दीदी का प्रशिक्षण दिया जा चुका हैं।

राजस्थान महिला निधि के माध्यम से 39118 स्वयं सहायता समूहों की 125786 महिलाओं को राशि 555.77 करोड का ऋण उपलब्ध कराया गया। राजीविका अन्तर्गत ग्राम स्तर पर परियोजना क्रियान्वयन के सभी कार्य समूह की महिलाओं द्वारा ही किये जाते हैं, इन महिलाओं को कम्युनिटी कैडर कहा जाता है।

उन्होंने मिशन पंच रत्न, वनधन विकास योजनाओं और इनसे लाभान्वितों के संबंध में विस्तृत जानकारी दी।

जनजाति क्षेत्र में एसएचजी आत्मनिर्भरता की राह में सहायक  केबिनेट मंत्री श्री मीणा ने कहा कि आदिवासी बहुल क्षेत्रों खास कर उदयपुर संभाग में लोगों के पास खेती योग्य भूमि की कमी है।

पशुपालन भी इतना नहीं है। ऐेसे में लोगों को रोजगार के लिए पलायन करना पड़ता है। स्वयं सहायता समूह की अवधारणा इस क्षेत्र के लिए वरदान है। उन्होंने सभी राजस्थान सहित देश भर आए अधिकारियों का आह्वान करते हुए कहा कि जनजाति बहुल क्षेत्रों में अधिक से अधिक स्वयं सहायता समूहों का गठन कर महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया जाना चाहिए। 

Follow UdaipurTimes on Facebook , Instagram , and Google News