विजयादशमी पर डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने किया पूर्वजों के ऐतिहासिक अस्त्र-शस्त्रों का पूजन
उदयपुर सिटी पैलेस स्थित ऐतिहासिक शस्त्रागार ‘सलेहखाना’ में आयोजित यह पूजन
Udaipur Times News, Royals of Mewar , उदयपुर 20 अक्टूबर 2026- असत्य पर सत्य और अधर्म पर धर्म की विजय के प्रतीक विजयादशमी के पावन पर्व पर मेवाड़ के पूर्व राजपरिवार के सदस्य, 77वें श्री एकलिंग दीवान एवं महाराणा मेवाड़ चैरिटेबल फाउंडेशन के अध्यक्ष एवं प्रबंध न्यासी डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने अपने पुत्र महाराज कुमार हरितराज सिंह मेवाड़ के साथ पूर्वजों के ऐतिहासिक अस्त्र-शस्त्रों का प्राचीन परंपरानुसार विधि-विधान से पूजन किया। Shastra Pujan Mewar
उदयपुर सिटी पैलेस स्थित ऐतिहासिक शस्त्रागार ‘सलेहखाना’ में आयोजित इस पूजन में मेवाड़ के गौरवशाली इतिहास, शौर्य, पराक्रम और समृद्ध राजपरंपराओं के प्रतीक विभिन्न ऐतिहासिक अस्त्र-शस्त्रों को पूजनार्थ रखा गया। Udaipur News
महाराणा उदयसिंह द्वितीय (ई.स. 1537-1572) के शासनकाल में निर्मित इस सलेहखाने में मेवाड़ के प्रतापी महाराणा सांगा, वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप, महाराणा राज सिंह सहित अन्य महाराणाओं से संबंधित ऐतिहासिक अस्त्र-शस्त्रों का विशिष्ट संग्रह संरक्षित है।
पूजन के दौरान खांडा, तलवारें, भाला, कटार, धनुष, बाण, ढाल और बंदूकों सहित मेवाड़ में निर्मित पारंपरिक युद्ध सामग्री को विधिवत पूजन के लिए रखा गया। पंडितों के मंत्रोच्चारण के बीच समस्त अस्त्र-शस्त्रों का विधि-विधानपूर्वक पूजन संपन्न हुआ। Royals of Mewar
मेवाड़ के अस्त्र-शस्त्रों में अद्वितीय शिल्पकला और परंपरा की झलक मेवाड़ के महाराणा विभिन्न उत्सवों एवं राजकीय आयोजनों में सम्मिलित होने के अवसर पर विशेष रूप से तैयार की गई अपनी तलवार साथ रखते थे। इन अलंकृत तलवारों के निर्माण में मेवाड़ के कारीगरों की असाधारण दक्षता और कलात्मक कौशल दिखाई देता है।
तलवारों की मूठ पर स्वर्ण तार, स्वर्ण वर्क, कुंदन, मीनाकारी, रत्नजड़ित अलंकरण तथा कौरबंदी जैसी कलात्मक शैलियों का उत्कृष्ट प्रयोग देखने को मिलता है। Rituals of Mewar
मेवाड़ की ढालों पर की गई स्वर्णकारी अपने अद्भुत शिल्प और बारीक कारीगरी के लिए उल्लेखनीय है। इसी प्रकार यहां के भालों और कटारों पर उकेरा गया उच्चस्तरीय शिल्प कौशल मेवाड़ की समृद्ध अस्त्र-निर्माण परंपरा को दर्शाता है।
महाराणा प्रताप की सेना में मेवाड़ के आदिवासी योद्धाओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा। धनुष-बाण उनके प्रमुख पारंपरिक युद्ध उपकरणों में शामिल थे। इसी परंपरा के प्रतीक स्वरूप पूजन में धनुष एवं लोहे का बाण भी सम्मिलित किया गया।