Rajasthan Housing Board उदयपुर में पानेरियों की मादड़ी योजना में 142 फ्लैट्स उपलब्ध करवाएगा
जयपुर/उदयपुर 20 अगस्त 2025। प्रदेश के UDH मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने राजस्थान आवासन मंडल ( Rajasthan Housing Board ) की उदयपुर समेत पांच शहरों में आवासीय योजनाओं के 667 आवासों का शुभारंभ किया।
667 फ्लैट्स और स्वतंत्र आवास
राजस्थान आवासन मंडल ने अब बड़े शहरों के बजाय उनके आसपास मौजूद छोटे शहरों में आवासीय योजनाएं लॉन्च कर, वहां शहरीकरण की दिशा में एक और कदम बढ़ाया है। बुधवार को यूडीएच मंत्री ने पानेरियों की मादड़ी जिला उदयपुर, अटरू जिला बारां, नैनवा जिला बूंदी, लंगेरा योजना बाड़मेर और बाड़ी रोड धौलपुर में विभिन्न आय वर्गों के लिए नई आवासीय योजनाएं शुरू कीं।
आवासन आयुक्त डॉ. रश्मि शर्मा ने बताया कि इन योजनाओं के अंतर्गत 667 फ्लैट्स और स्वतंत्र आवास दोनों प्रकार के विकल्प उपलब्ध हैं। इससे EWS, LIG और मध्यम आय वर्ग के परिवारों को किफायती, सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण आवास उपलब्ध होगा।
उदयपुर जिले की पानेरियों की मादड़ी योजना में EWS, LIG (G+3) आय वर्ग के लिए 142 फ्लैट्स, लागत 11 लाख 68 हजार से शुरू होगी। आवेदन पत्र 20 अगस्त 2025 से शुरू होकर 20 सितंबर 2025 तक जमा होंगे।
अवाप्त भूमि का चिह्नीकरण
यूडीएच मंत्री ने कहा कि अब तक जहां-जहां आवासन मंडल की अवाप्त भूमि है, उनका चिह्नीकरण कराया जा रहा है, जहां भी अतिक्रमण है या न्यायालय में कोई वाद है, कोशिश है कि उनका जल्द से जल्द निपटारा कर लोगों को बेहतर आवासीय सुविधा उपलब्ध कराई जाए। फिलहाल बड़े शहरों के नजदीक छोटे शहरों में पांच आवासीय योजनाएं लाई गई हैं। जल्द ही जयपुर में भी नई आवासीय योजनाएं लॉन्च की जाएंगी। इसी वित्तीय वर्ष में एक के बाद एक प्रदेश में जहां आवास या भूखंडों की आवश्यकता है, उसके अनुरूप आवासीय योजनाएं और भूखंड की योजनाएं लाई जाएंगी।
बड़े शहरों के नजदीक कस्बों का विकास
उन्होंने बताया कि जिस तेजी से बड़े शहरों में आबादी बढ़ रही है, वहां आवास समस्या से निपटने के लिए जयपुर, जोधपुर, बीकानेर, उदयपुर, भरतपुर जैसे शहरों से 50-60 किलोमीटर के दायरे में मौजूद कस्बों को विकसित किया जाएगा। वहां शहरों से कनेक्ट करते हुए बेहतर यातायात की सुविधा देकर अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, ताकि वहां के लोग यदि व्यापार, नौकरी या मजदूरी के लिए आते हैं, तो सुबह निकलकर शाम या रात तक अपने घर वापस पहुंच जाएं। इससे मजदूरों को भी फुटपाथ पर रात नहीं बितानी पड़ेगी और जो पिछले कुछ वर्षों में झुग्गी-झोपड़ियों का चलन बढ़ा है, उससे भी छुटकारा मिल सकेगा। इस संबंध में एक बड़ी परियोजना भारत सरकार के समक्ष पेश की गई है। इसे आगे चलकर एशियन डेवलपमेंट बैंक के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा और लगभग 12500 करोड़ रुपये के माध्यम से बहुत से कस्बों का कायाकल्प करने की कार्य योजना बनाई जा रही है।
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