RNT Medical College में मुद्रा विज्ञान पर व्याख्यान आयोजित

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस से पूर्व योगाचार्य श्रीवर्द्धन ने चिकित्सा विद्यार्थियों और स्वास्थ्यकर्मियों को बताए योग मुद्राओं के वैज्ञानिक लाभ

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Doctors, nursing officers and medical students attending a special lecture on Mudra Science and Holistic Yoga at RNT Medical College, Udaipur, ahead of International Yoga Day 2026.

 Udaipur Times News, Education News - उदयपुर, 15 जून 2026 । रवींद्रनाथ टैगोर मेडिकल कॉलेज के न्यू लेक्चर थियेटर सभागार में सोमवार को वरिष्ठ चिकित्सकों, नर्सिंग व पैरामेडिकल अधिकारियों और मेडिकल व पैरामेडिकल के छात्र-छात्राओं के लिए ‘मुद्रा विज्ञान’ एवं होलिस्टिक योग पर एक विशेष व्याख्यान और व्यावहारिक सत्र का आयोजन किया गया।

आगामी 21 जून को आयोजित होने वाले विश्व अंतरराष्ट्रीय योग दिवस से पहले इस आयोजन को और भव्य बनाने तथा आमजन व चिकित्सा क्षेत्र में योग के प्रति जागरूकता बढ़ाने के क्रम में इस विशेष कार्यक्रम का संयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के मुख्य वक्ता देश-विदेश में योग मुद्राओं के वैज्ञानिक प्रभाव और समग्र योग के लिए प्रसिद्ध योगाचार्य श्रीवर्द्धन थे। कार्यक्रम के दौरान पूरा सभागार जिज्ञासु श्रोताओं और भावी डॉक्टरों उपस्थिति रही।

योगाचार्य श्रीवर्धन ने अपने व्याख्यान में बताया कि हमारी उंगलियों के अग्रभाग से लगातार इलेक्ट्रोमैग्नेटिक ऊर्जा उत्सर्जित होती है।

जब हम विशिष्ट उंगलियों के पोरों को एक-दूसरे से स्पर्श करते हैं, तो यह ऊर्जा मस्तिष्क की ओर पुनर्जाग्रत होती है, जो शरीर के पांच तत्वों को संतुलित कर विभिन्न अंगों को नया जीवन देती है। उन्होंने बिना किसी दवा के केवल उंगलियों और अंगूठे के सही संयोजन से असाध्य रोगों को ठीक करने की वैज्ञानिक पद्धतियों पर प्रकाश डाला। Udaipur News

उन्होंने अपनी प्रसिद्ध 36 पृष्ठों की पुस्तक ‘मुद्रा साइंस’ का संदर्भ देते हुए कई महत्वपूर्ण मुद्राओं के अभ्यास सिखाए। ज्ञान मुद्रा -अंगूठे और तर्जनी के अग्रभाग को छूने से एकाग्रता और याददाश्त बढ़ती है तथा मानसिक शांति मिलती है। प्राण मुद्रा - अंगूठे, अनामिका और कनिष्ठिका के पोरों को मिलाने से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, थकान दूर होती है और ऊर्जा का संचार होता है।

अस्थमा और श्वसन मुद्राएं- उन्होंने बताया कि इन विशिष्ट मुद्राओं को जब प्राणायाम और सूक्ष्म योग के साथ जोड़ा जाता है, तो यह फेफड़ों की क्षमता बढ़ाने और फेफड़ों के अवरोध को दूर करने में अचूक साबित होती हैं। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रोफेसर ढाका की गरिमामयी उपस्थिति रही, जिन्होंने इस प्राचीन विज्ञान को आधुनिक चिकित्सा शिक्षा के बीच लाने के प्रयास की सराहना की। Education News 

रवींद्रनाथ टैगोर मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य एवं नियंत्रक डॉ. राहुल जैन ने इस अनूठी विधा को चिकित्सा जगत के लिए अत्यंत उपयोगी बताते हुए कहा कि एक शीर्ष चिकित्सा शिक्षण संस्थान होने के नाते हमारा यह दायित्व है कि हम इलाज के पारंपरिक और वैज्ञानिक तौर-तरीकों का समन्वय करें। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की पूर्व तैयारियों के रूप में आयोजित यह सत्र हमारे इसी संकल्प को दर्शाता है। रवींद्रनाथ टैगोर मेडिकल कॉलेज अब इस दिशा में आगे कदम बढ़ाएगा।

हम प्रयास करेंगे कि योग, सूक्ष्म योग और ज्ञान मुद्राओं का मानव जीवन व स्वास्थ्य पर पड़ने वाले सकारात्मक प्रभावों को प्रामाणिक आधार देने के लिए इस संस्थान में नए-नए शोध शुरू किए जाएं।

वृहद कार्यक्रम के सफल संयोजन में नर्सिंग ऑफिसर प्रफुल्ल गांधी तथा नर्सिंग ऑफिसर हेमंत आमेटा की मुख्य भूमिका रही।

सत्र को तकनीकी और व्यवस्थापकीय रूप से सफल बनाने में डॉ. भुवनेश चंपावत, डॉ. नरेंद्र जोशी सहित संस्थान के कई वरिष्ठ चिकित्सकों, नर्सिंग अधिकारियों, पैरामेडिकल स्टाफ और एमबीबीएस में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं का अत्यंत महत्वपूर्ण और सराहनीय सहयोग रहा। सत्र के अंत में सभी उपस्थित चिकित्सकों और भावी डॉक्टरों ने स्वयं भी स्वस्थ रहने और मरीजों के समग्र स्वास्थ्य सुधार के लिए योग और मुद्रा विज्ञान के सिद्धांतों को अपनाने का संकल्प लिया।

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