सागरमल हत्याकांड: मकान मालिक के पक्ष में आया समाज, कलेक्ट्री पर मौन प्रदर्शन कर सौंपा ज्ञापन
मेवाड़ राव सिरदार समाज ने यूडीए की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच और आगे की कार्रवाई रोकने की मांग की
Udaipur Times,Protest, Murder, उदयपुर 31 जुलाई 2026 -ओस्तवाल नगर में मकान के सेटबैक को लेकर हुए विवाद के बाद वृद्ध सागरमल मेहता की मौत और इसके बाद मकान को यूडीए द्वारा ध्वस्त किए जाने के मामले में अब मेवाड़ राव सिरदार समाज मकान मालिक कैलाश कुंवर के पक्ष में सामने आया है।
समाज के लोगों ने कलेक्ट्री पर मौन प्रदर्शन कर कलेक्टर और यूडीए आयुक्त को ज्ञापन सौंपा। वहीं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शहर को ज्ञापन देकर मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की गई।
समाज के प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि यूडीए ने दूसरे पक्ष को सुने बिना दबाव में आकर मकान के खिलाफ कार्रवाई की। उनका कहना है कि मकान को ध्वस्त करने से पहले कैलाश कुंवर को न तो उचित सूचना दी गई और न ही अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया।
जानकारी के अनुसार ओस्तवाल नगर में मकान के सेटबैक को लेकर मकान मालिक कैलाश कुंवर और पड़ोसी मकान मालिक सागरमल मेहता के बीच विवाद चल रहा था। मामला न्यायालय तक पहुंचा, जहां कोर्ट ने मामले में कोर्ट कमिश्नर नियुक्त कर रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए थे।
बताया गया कि कोर्ट कमिश्नर के रिपोर्ट तैयार कर लौटने के बाद सागरमल मेहता, उनके बेटे राहुल व प्रवीण सिंह, अनुराग राव और एक अन्य व्यक्ति के बीच मारपीट हो गई।
मारपीट में घायल सागरमल मेहता को एमबी चिकित्सालय ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। SagarmalMehta Murder
घटना के बाद जैन समाज में आक्रोश फैल गया और आरोपियों के मकान को ध्वस्त करने की मांग उठी। बताया गया कि जैन समाज की ओर से शव नहीं उठाने की बात सामने आने के बाद यूडीए ने कार्रवाई करते हुए मकान के अवैध निर्माण को ध्वस्त कर दिया। SilentProtest
इधर, मेवाड़ राव सिरदार समाज ने यूडीए की कार्रवाई का विरोध किया है। समाज की ओर से दिए गए ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि मकान निर्माण के समय से ही पड़ोसी सागरमल जैन और उनका परिवार कैलाश कुंवर को परेशान कर रहा था।
समाज का दावा है कि यूडीए में शिकायतों के बाद कैलाश कुंवर ने न्यायालय में परिवाद पेश कर स्टे प्राप्त किया था और मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है। CrimeNews
समाज ने आरोप लगाया कि सागरमल जैन की मौत के बाद बने दबाव के चलते यूडीए ने मकान को ध्वस्त करने की कार्रवाई की, जबकि जिस मुकदमे के आधार पर कार्रवाई की गई, उसमें नामजद आरोपियों का मकान से कोई कानूनी संबंध नहीं है। समाज ने कार्रवाई को गलत बताते हुए कहा कि न्यायालय में मामला लंबित होने के बावजूद मकान तोड़ना उचित नहीं है।
समाज के लोगों ने कलेक्टर और यूडीए आयुक्त को ज्ञापन सौंपकर आगे की कार्रवाई रोकने की मांग की। साथ ही चेतावनी दी कि मांग पर कार्रवाई नहीं हुई तो समाज की ओर से उग्र आंदोलन किया जाएगा। इसके अलावा समाज के प्रतिनिधियों ने अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शहर उमेश ओझा को भी ज्ञापन सौंपा और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।
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