ग्रामीण कचरा प्रबंधन पर सेमिनार का आयोजन

पांच पंचायतों को इलेक्ट्रिक ऑटो ट्रिपर और हाथगाड़ियां उपलब्ध कराई गई 
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उदयपुर 14 मार्च 2026।  गांवों में बढ़ते उपभोग और बदलती जीवनशैली के कारण कचरे की मात्रा तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में door-to-door collection, segregation और कचरे के सुरक्षित निपटान की व्यवस्था गांवों में मजबूत करना जरूरी हो गया है।

इसी दिशा में सेवा मंदिर ने HDB फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड के सहयोग से पिछले डेढ़ वर्ष से राजसमंद जिले के खमनोर और देलवाड़ा ब्लॉक के 30 गांवों में लगभग 30,000 लोगों के साथ ग्रामीण कचरा प्रबंधन पर काम शुरू किया है। इस पहल के तहत गांवों में कचरे का अलग-अलग संग्रहण, recycling और समुदाय की भागीदारी को बढ़ावा दिया जा रहा है।

कार्यक्रम के तहत पांच पंचायतों को इलेक्ट्रिक ऑटो ट्रिपर और हाथगाड़ियां उपलब्ध कराई गई हैं, जिनकी मदद से गीले और सूखे कचरे का अलग-अलग संग्रहण किया जा रहा है। कचरा संग्रहण में लगे आरोग्य मित्रों को मास्क, ग्लव्स और सुरक्षा किट भी दी गई हैं।

सेवा मंदिर ने पंचायत प्रतिनिधियों, समुदाय और अन्य हितधारकों को जोड़कर साझा विकास समितियां बनाई हैं, जो नियमित बैठकों के माध्यम से कचरा प्रबंधन से जुड़े मुद्दों पर काम कर रही हैं। गांवों में जागरूकता बढ़ाने के लिए नुक्कड़ नाटक, दीवार पेंटिंग, “कबाड़ से जुगाड़” कार्यशालाएं और श्रमदान जैसी गतिविधियां भी आयोजित की गई हैं। इन प्रयासों से कई गांवों में स्वच्छता को लेकर सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है।

इन्हीं अनुभवों को साझा करने और ग्रामीण कचरा प्रबंधन के समाधान पर चर्चा के लिए सेवा मंदिर ने 13 मार्च 2026 को “स्वच्छ गांवों की ओर: सामुदायिक-केन्द्रित कचरा प्रबंधन मॉडल” विषय पर एक दिवसीय सेमिनार आयोजित किया।

सेमिनार में सरकारी प्रतिनिधि, ग्राम पंचायत सदस्य, क्रियान्वयन करने वाले संगठन और recycling क्षेत्र से जुड़े उद्यमों ने भाग लिया। प्रतिभागियों ने ग्रामीण क्षेत्रों में material recovery, recycling और non-recyclable कचरे को कम करने के उपायों पर चर्चा की तथा स्थानीय सरकारों, सामाजिक संस्थाओं और उद्यमों के बीच सहयोग को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

सेवा मंदिर के मुख्य संचालक रोनक शाह ने कहा कि कचरा प्रबंधन में समुदाय की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है और इसमें आरोग्य मित्र प्रमुख हितधारक के रूप में उभरते हैं। उन्होंने बताया कि भारत में सफाई कर्मियों का एक लंबा सामाजिक इतिहास रहा है, इसलिए इस क्षेत्र में समावेशिता को बढ़ावा देना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि उनकी भूमिका स्वच्छता व्यवस्था को प्रभावी बनाने में बेहद महत्वपूर्ण है।

यूनीसेफ के ऋषभ हेमानी ने कहा कि कचरा प्रबंधन को एक सशक्त निवेश अवसर के रूप में प्रस्तुत करने की आवश्यकता है, जिसमें बड़े पैमाने पर विस्तार की संभावना मौजूद है। उन्होंने बताया कि स्वच्छ भारत मिशन 3.0 इस दिशा में एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है। इस अवसर का लाभ उठाने के लिए तेज़ी, व्यापकता और स्थिरता के साथ काम करने की जरूरत है, जिसमें यूनीसेफ उत्प्रेरक (कैटेलिस्ट) की भूमिका निभा सकता है।

स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण, राजस्थान के संयुक्त निदेशक मुरारी लाल शर्मा ने मुख्य अतिथि के रूप में अपने विचार रखते हुए कहा कि लोगों में स्वच्छता के प्रति जागरूकता पहले से बढ़ी है, लेकिन इसे व्यवहार में लाने में संस्थाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने इस दिशा में निदेशालय की ओर से हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया।

सहयोगी संस्था HDB फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड के प्रतिनिधियों ने भी कचरा प्रबंधन में समुदाय की सक्रिय भूमिका की सराहना की। संस्था के रिसोर्स मैनेजर (एचआर) राम चौहान ने कहा कि इस कार्यक्रम के माध्यम से स्वच्छता और कचरा प्रबंधन के प्रति समुदाय में जागरूकता और समझ बढ़ी है।
यह सेमिनार प्रतिभागियों के लिए आपसी अनुभवों से सीखने और भविष्य में सहयोग के अवसर तलाशने का एक महत्वपूर्ण मंच रहा।

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