MLSU आर्ट्स कॉलेज में गिलहरी का आतंक
उदयपुर 2 मई 2026। मोहनलाल सुखाड़िया यूनिवर्सिटी के आर्ट्स कॉलेज में इन दिनों एक गिलहरी का आतंक बना हुआ है। पिछले एक महीने में गिलहरी 18 से ज्यादा लोगों पर हमला कर चुकी है। हैरानी की बात यह है कि कॉलेज में एनिमल रेस्क्यू टीम भी पहुंची, लेकिन गिलहरी को पकड़ नहीं पाई।
आर्ट्स कॉलेज में बाबू दिनेश चंद्र गुर्जर ने बताया कि गिलहरी कॉलेज में आने-जाने वाले लोगों पर हमला कर रही है और उन्हें काट रही है। उन्होंने बताया कि 22 अप्रैल को उनके विभाग की दो स्कॉलर्स को भी गिलहरी ने काट लिया था। अगले दिन जब वे सुबह ऑफिस पहुंचे तो गिलहरी पर्दे के पीछे छिपी हुई थी और अचानक उन पर कूद गई। हालांकि वे वहां से भाग गए, जिससे उन्हें चोट नहीं लगी।
दिनेश गुर्जर ने बताया कि गिलहरी के डर से लोग अब सामान्य गिलहरियों से भी डरने लगे हैं। जिन्हें काटा गया है, उन्हें डॉक्टर की सलाह पर लगातार रेबीज के इंजेक्शन लगाए जा रहे हैं।
सोशल साइंस एंड ह्यूमैनिटीज कॉलेज की एक स्कॉलर ने बताया कि साइकोलॉजी और वुमेन स्टडीज विभाग की गैलरी में मौजूद गिलहरी ने उनके हाथ पर काट लिया था। उन्होंने उसे झटका दिया तो वह बाहर चली गई, लेकिन बाद में उसने पास बैठी दूसरी स्कॉलर पर भी हमला कर दिया।
दर्शनशास्त्र विभाग में कार्यरत महिला कर्मचारी डाली मेघवाल ने बताया कि रेस्क्यू टीम गिलहरी को पकड़ने आई थी, लेकिन वह उनके हाथ नहीं लगी। यह गिलहरी लोगों के पीछे पड़ जाती है और मौका मिलते ही काट लेती है।
कॉलेज छात्रा कृतिका राव ने बताया कि यह गिलहरी फरवरी महीने से कॉलेज परिसर में घूम रही है। कॉलेज की फैकल्टी और स्टाफ जैसे ही बाहर निकलते हैं, वह उनके पीछे भागती है और कई बार कमरों के अंदर भी घुस जाती है।
आर्ट्स कॉलेज के डीन प्रोफेसर मदन सिंह राठौड़ ने बताया कि कुछ दिन पहले मामला संज्ञान में आया था। कॉलेज स्टाफ ने रेस्क्यू के लिए टीम को बुलाया भी था। टीम मौके पर आई, लेकिन गिलहरी का रेस्क्यू नहीं हो सका। छात्रों ने बताया है कि गिलहरी काफी आक्रामक है और किसी को देखते ही लपकती है। जल्द ही दोबारा टीम बुलाकर रेस्क्यू करवाया जाएगा।
पीपुल्स फॉर एनिमल्स उदयपुर के प्रेसिडेंट सत्यजीत रॉय ने बताया कि यह एक जंगली जीव है। ज्यादा गर्मी होने पर ब्रेन डिसऑर्डर की स्थिति बन सकती है, जिससे उसके काटने की आदत हो सकती है। भूख के कारण भी ऐसा व्यवहार संभव है। आमतौर पर गिलहरी काटती नहीं है, इसलिए उसके मानसिक संतुलन में गड़बड़ी भी एक कारण हो सकती है। पूरी जानकारी के बाद रेस्क्यू की कोशिश की जाएगी, हालांकि गिलहरी का रेस्क्यू करना आसान नहीं होता।
वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ. हिमांशु व्यास ने बताया कि अपने बच्चों की सुरक्षा के चलते भी गिलहरी ऐसा व्यवहार कर सकती है। इस तरह का मामला पहली बार सुनने को मिला है। एक महीने में कई लोगों को काटना हैरानी की बात है। उन्होंने कहा कि गिलहरी के साइकोलॉजिकल इशू या टेंपरामेंटल व्यवहार के कारण भी ऐसा हो सकता है। संभव है कि किसी ने पहले उसे पाला हो और बाद में छोड़ दिया हो, इसलिए उसमें इंसानों का डर खत्म हो गया हो। मामले की स्टडी के बाद ही स्पष्ट तौर पर कुछ कहा जा सकेगा।
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