छात्रसंघ चुनाव और राजस्थानी भाषा को संवैधानिक मान्यता देने की मांग को लेकर उदयपुर में छात्र नेताओं ने की22 किलोमीटर पेडल यात्रा
संघठन के वरिष्ठ नेताओं ने कहा सरकार को छात्रों के इस अधिकार को दबाने के बजाय तुरंत चुनाव कराने की तारीख घोषित करनी चाहिए।
Udaipur Times News, NSUI Protest Udiapur, उदयपुर 10 अगस्त 2026 - राजस्थान के विश्वविद्यालयों में छात्रसंघ चुनाव दोबारा कराने और राजस्थानी भाषा को संवैधानिक मान्यता देने की मांग को लेकर उदयपुर में छात्र नेताओं ने 22 की पेडल यात्रा कर अपना विरोध दर्ज करवाया । इस को लेकर सोमवार पर एनएसयूआई पदाधिकारियों और अन्य छात्र कार्यकर्ता मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय (MLSU) के मुख्य द्वार पर मिले जहां से उन्होंने श्री एकलिंगजी मंदिर तक 22 किलोमीटर लंबी पदयात्रा की ।
इस मौके पर छात्रनेताओं ने कहा की विद्यार्थियों की लंबित मांगों की ओर राज्य सरकार का ध्यान खींचना और भगवान एकलिंगनाथ के दरबार में अर्जी लगाकर सरकार को सद्बुद्धि देने की प्रार्थना के लिए उन्होंने ये पदयात्रा निकाली गई। Student Election Udaipur
इस मौके पर वरिष्ठ कांग्रेस और छात्र नेता एकजुट हुए। साथ ही इंटक के प्रदेश अध्यक्ष जगदीश राज श्रीमाली, पूर्व जिलाध्यक्ष यशवंत चौधरी और प्रदेश महासचिव महिपाल सिंह कुराबड़ ने यात्रा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
संघठन के वरिष्ठ नेताओं ने कहा की छात्रसंघ चुनाव विद्यार्थियों की लोकतांत्रिक आवाज का सबसे मजबूत जरिया है। सरकार को छात्रों के इस अधिकार को दबाने के बजाय तुरंत चुनाव कराने की तारीख घोषित करनी चाहिए। Udaipur News
यूनिवर्सिटी के गेट से शुरू होकर यह पदयात्रा भुवाणा, सुखेर और कैलाशपुरी होते हुए एकलिंगजी मंदिर पहुंची। यात्रा में एनएसयूआई प्रदेश महासचिव विक्रम भादू, युवा कांग्रेस के सूर्यपाल सिंह देवड़ा , हिदांशु जैन, और छात्रनेता कल्पेश सहित बड़ी संख्या में छात्र शामिल हुए।
22 किलोमीटर तक नारे लगाते रहे छात्र पूरे 22 किलोमीटर के सफर के दौरान छात्र हाथों में बैनर और तख्तियां थामे छात्रसंघ चुनाव बहाली और राजस्थानी भाषा के सम्मान में नारेबाजी करते नजर आए।
पूरे 22 किलोमीटर के सफर के दौरान छात्र हाथों में बैनर और तख्तियां थामे छात्रसंघ चुनाव बहाली और राजस्थानी भाषा के सम्मान में नारेबाजी करते नजर आए। Student Protest
छात्र नेताओं ने कहा- कॉलेजों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की समस्याओं को उठाने के लिए छात्रसंघ का होना बेहद जरूरी है। साथ ही राजस्थानी भाषा हमारी संस्कृति और पहचान से जुड़ी हुई है।
