इलेक्टोरल बॉन्ड से चंदा लेने पर सुप्रीम कोर्ट की रोक


इलेक्टोरल बॉन्ड से चंदा लेने पर सुप्रीम कोर्ट की रोक 

पिछले 6 साल में इलेक्टोरल बांड से बीजेपी ने लिया सर्वाधिक 6337 करोड़ रूपये का चंदा 

 
Udaipur Times Supreme Court Bans Electoral Bonds Issuance by Banks

आगामी लोकसभा चुनाव से कुछ समय पूर्व ही सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को 6 साल पुरानी इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा कर राजनितिक पार्टियों को तगड़ा झटका दिया है। इतना ही नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने पिछले पांच सालों के चंदे का हिसाब-किताब भी मांग लिया है। अब निर्वाचन आयोग को बताना होगा कि पिछले पांच साल में किस पार्टी को किसने कितना चंदा दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वह स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) से पूरी जानकारी जुटाकर इसे अपनी वेबसाइट पर साझा करे। 

इस मामले की सुनवाई भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने किया। इसमें सीजेआई के साथ जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा शामिल हैं। संविधान पीठ ने 31 अक्टूबर से 2 नवंबर तक पक्ष और विपक्ष दोनों ही ओर से दी गई दलीलों को सुना था। तीन दिन की सुनवाई के बाद कोर्ट ने 2 नवंबर को अपना फैसला सुरक्षित रखा था।

सुप्रीम कोर्ट के अनुसार इलेक्टोरल बांड स्कीम असंवैधानिक है। बॉन्ड की गोपनीयता बनाए रखना भी असंवैधानिक है। यह स्कीम सूचना के अधिकार का उल्लंघन है।

चीफ जस्टिस ने कहा, 'पॉलिटिकल प्रोसेस में राजनीतिक दल अहम यूनिट होते हैं। वोटर्स को चुनावी फंडिंग के बारे में जानने का अधिकार है, जिससे मतदान के लिए सही चयन होता है।' आपको बता दे सुप्रीम कोर्ट के 5 जजों ने सर्वसम्मति से इस पर फैसला सुनाया। चार लोगों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका देकर चुनावी बॉन्ड स्कीम की वैधता को चुनौती दी थी। इन्हीं याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा फैसला दिया है जिसका आगामी लोकसभा चुनाव के मद्देनज़र दूरगामी असर हो सकता है। 

उल्लेखनीय है की 2018 से अब तक इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए सबसे ज्यादा चंदा भाजपा को मिला है। 6 साल में चुनावी बॉन्ड से भाजपा को 6337 करोड़ की चुनावी फंडिंग हुई। जबकि कांग्रेस को 1108 करोड़ चुनावी चंदा मिला।

क्या है चुनावी बॉन्ड?

कोई भी भारतीय इसे खरीद सकता है। बैंक को KYC डीटेल देकर 1 हजार से 1 करोड़ रुपए तक के बॉन्ड खरीदे जा सकते हैं। बॉन्ड खरीदने वाले की पहचान गुप्त रहती है। इसे खरीदने वाले व्यक्ति को टैक्स में रिबेट भी मिलती है। ये बॉन्ड जारी करने के बाद 15 दिन तक वैलिड रहते हैं।

To join us on Facebook Click Here and Subscribe to UdaipurTimes Broadcast channels on   GoogleNews |  Telegram |  Signal