मंदिर मे तोडफोड मामला : मकानमालिक ने कलेक्टर को सोप ज्ञापन नोटिस पर उठाए सवाल
कहा आपराधी को जरूर मिले सजा लेकिन बेगुनाह के साथ नहीं हो ना नाइंसाफी
Udaipur Times News, Memorandum to DM , उदयपुर 23 सितंबर 2026 । शहर के दीवान शाह कॉलोनी गली न.7 , किशनपोल निवासी दो विधवा महिलाओं ने नगर निगम और प्रशासनिक अधिकारियों को पत्र देकर उन्हें जारी किए गए नोटिस को निरस्त करने की मांग की है। Udaipur Vandalisim Case
मकान मे रहने वाली महिला रुकसाना का कहना है कि उनका मकान करीब 40 से 45 वर्ष पुराना है और उन्हें केवल इसलिए नोटिस जारी किया गया है क्योंकि हाल ही में इंद्रा नगर बीड़ा में शिव मूर्ति खंडित करने के मामले में गिरफ्तार किए गए आरोपी फिरोज उनके मकान में किराए पर रहता था। महिलाओं की ओर से दिए गए पत्र के अनुसार, नगर निगम की ओर से 19 सितंबर 2026 को राजस्थान नगरपालिका अधिनियम, 2009 की धारा 194/245 के तहत नोटिस जारी किया गया। नोटिस में कथित रूप से बिना निर्माण स्वीकृति के भूतल और प्रथम मंजिल का निर्माण किए जाने तथा भूखंड के स्वामित्व से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराने का उल्लेख किया गया है।
नोटिस में 15 दिन के भीतर स्पष्टीकरण और स्वामित्व संबंधी दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा गया है। पत्र में बताया गया है कि मकान करीब 45-50 वर्ष पुराना है। Udaipur News
दोनों महिलाओं के अनुसार उनके ससुर वजीर अली और सास शरीफन बानो ने करीब 45 वर्ष पहले वन भूमि पर मकान बनाया था। इसके बाद से परिवार इसी मकान में रह रहा है। पत्र के मुताबिक मकान में नीचे के हिस्से में रुखसाना और प्रथम मंजिल पर मेम बानो रहती है। दोनों महिलाओं के पति का निधन हो चुका है। Memorandum to District Collector
महिलाओं का कहना है कि क्षेत्र के निवासी पिछले करीब 40 वर्षों से सरकार से मकानों के पट्टे देने की मांग कर रहे हैं। उनका दावा है कि मकान वन भूमि पर होने के कारण किसी भी काश्तकारी को पट्टा नहीं मिला है और पट्टा देने की प्रक्रिया वर्तमान में सरकार के पास विचाराधीन है।
पत्र में इंद्रा नगर बीड़ा में शिव मूर्ति खंडित किए जाने की घटना का भी उल्लेख किया गया है। महिलाओं के अनुसार इस मामले में गिरफ्तार आरोपी फिरोज उनके मकान के एक कमरे में करीब दो महीने से किराए पर रह रहा था। महिलाओं का कहना है कि फिरोज से उनका किराएदार के अलावा कोई संबंध नहीं था न ही उन्हे उसके आपराधिक रिकॉर्ड या प्रवती के बारे मे कोई जानकारी थी । घटना के बाद उन्होंने मकान भी खाली करवा लिया। महिलाओं ने पत्र में कहा कि फिरोज के उनके मकान में किराए पर रहने के आधार पर उनके खिलाफ नगर निगम की ओर से नोटिस जारी करना उचित नहीं है।
महिलाओं ने नगर निगम के अधिकार क्षेत्र पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि उनका मकान वन भूमि पर स्थित है और इस जमीन पर नगर निगम का अधिकार क्षेत्र नहीं है। उन्होंने खुद को गरीब विधवा महिलाएं बताते हुए कहा कि मकान के अलावा उनके पास रहने का कोई अन्य साधन नहीं है। मकान से बेदखली, सीज या ध्वस्तीकरण जैसी कार्रवाई होने पर उनके सामने सड़क पर आने की स्थिति पैदा हो जाएगी। दोनों महिलाओं ने नगर निगम के उपयुक्त से नोटिस को निरस्त कर उचित आदेश जारी करने और मामले में कानूनी एवं मानवीय पहलुओं को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेने की मांग की है।
वाही क्षेत्र के ही अडवोकेट मुस्तफा शेख का कहना है की दोनों महिलाएं विधवा है , वो इस घर से अर्जित होने वाली किराए की आए से ही पान गुजारा चलाती है , उन्हे फिरोज की गतिविधियों के बारे मे कोई जानकारी पहले से नहीं थी । उन्होंने कहा की वह किसी भी तरह से अपराधियों या अपराध का समर्थन नहीं करते है लेकिन इस तरह से जल्दबाजी मे कोई निर्णय लेना भी गरीब महिलाओं के साथ अन्याय है और निगम को इस आदेश को जल्द से जल्द निरस्त करना चाहिए ।
कम्युनिस्ट पार्टी के अडवोकेट राजेश सिंघवी ने इस आदेश को अनुचित और भीड़ को कुश करने वाला बताया , उन्होंने कहा की प्रसाशन को चाहिए की कानून की पालन करते हुए कार्यवाही करे। अपराधी के खिलाफ कार्यवाही जरूर हो लेकिन इस से बेगुनाह प्रभावित नया हो । उन्होंने कहा की जिला कलेक्टर ने उनके अशस्वस किया है की कोई भी कार्यवाही अनुचित रूप नहीं की जाएगी ।