संस्कृत में छिपा है अथाह ज्ञान का भण्डार - शिक्षा मंत्री दिलावर
समारोह को संबोधित करते हुए शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने कहा कि संस्कृत का गहन अध्ययन करें, संस्कृत में ज्ञान का अथाह भंडार छिपा हुआ है
समारोह को संबोधित करते हुए शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने कहा कि संस्कृत का गहन अध्ययन करें, संस्कृत में ज्ञान का अथाह भंडार छिपा हुआ है। महाभारत में संजय आंखों देखा हाल बताते थे यह संस्कृत के माध्यम से मंत्रों की तकनीक से संभव था।
शिक्षा मंत्री ने स्वदेशी अपनाने पर जोर देते हुए कहा कि दैनिक जीवन में उपयोग में आने वाली वस्तुएं प्रायः विदेशी ब्रांड की होती है, हमें इस आदत को छोड़कर स्वदेशी को अपनाना होगा। स्वदेशी अपनाने से ही देश मजबूत होगा। दिलावर ने कहा कि आज भारत में हर वस्तु का निर्माण हो रहा है।
ऑपरेशन सिंदूर में हमारे देश के हथियारों ने दुनिया के बड़े से बड़े हथियार मार गिराए। अमेरिका ने जब सुपर कंप्यूटर देना बंद कर दिया था तो हमने स्वयं का सुपर कंप्यूटर बना दिया।
इसीलिए हमारी क्षमताओं को कम नहीं आंके, विदेशी कंपनियों का सामान खरीदकर हम जाने अनजाने दुश्मन देश को समृद्ध करते हैं, यदि हमें मातृभूमि के प्रति प्रेम है तो संकल्प लें कि विदेशी वस्तुओं का उपयोग नहीं करेंगे। दिलावर ने कहा कि शिक्षा विभाग ने हरियालो राजस्थान अभियान के तहत अब तक 5 करोड़ पौधे लगाए हैं।
इस अवसर पर उन्होंने पॉलिथीन का उपयोग न करने का भी आह्वान किया।
संस्कृत से आता जीवन में अनुशासन - संत गुलाबदास महाराज
समारोह में माकड़ादेव आश्रम झाड़ोल के संत गुलाबदास महाराज का भी सान्निध्य मिला। उन्होंने अपने आशीर्वचन में कहा कि भारत की गौरवशाली संस्कृति को समझाना है तो संस्कृत सहायक हो सकती है। वेद-पुराणों, उपनिषदों में न केवल जीवन का मर्म अपितु प्रकृति के गूढ़ रहस्य तक समाहित हैं।
उन्होंने कहा कि संस्कृत से जीवन में अनुशासन आता है, संस्कृत को दैनिक जीवन में अपना कर स्वयं, समाज और देश के उत्थान का मार्ग प्रशस्त करें। शिक्षक समाज के सहयोग से ही परिवर्तन संभव - वाय एस रमेश समारोह के सारस्वत अतिथि केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय जयपुर के निदेशक वाय एस रमेश ने कहा कि नई शिक्षा नीति से परिवर्तन का शुभारंभ हुआ है।
शिक्षक समाज के सहयोग के बिना इसमें सफलता संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि नई नीति के तहत संस्कृत शिक्षा में पैटर्न लागू करने वाला राजस्थान पहला राज्य है। संस्कृत शिक्षा में बाल वाटिका की पुस्तिकाएं तैयार करने वाला भी राजस्थान पहला राज्य है। उन्होंने सभी शिक्षकों का आह्वान करते हुए कहा कि आप संस्कृत सम्भाषण को अपनाएं, ताकि युवाओं को भी प्रेरणा मिलें।
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