कुल के छींटों के साथ तीन दिवसीय 135वें उर्स का समापन
उर्स का समापन बुधवार को बाद नमाज अस्र रंग, सलातो-सलाम, दुआ व कुल के छींटों के साथ हुआ।
उदयपुर, 27 अगस्त, 2025। शहर के ब्रह्मपोल बाहर स्थित दरगाह हजरत इमरत रसूल शाह बाबा के चल रहे तीन दिवसीय 135वें उर्स का समापन बुधवार को बाद नमाज अस्र रंग, सलातो-सलाम, दुआ व कुल के छींटों के साथ हुआ।
दरगाह कमेटी के सदर सरवर खान पठान व सेक्रेट्री शादाब खान ने बताया कि हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी हजरत इमरत रसूल शाह बाबा के तीन दिवसीय उर्स के चलते विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए।
उर्स के तीसरे दिन बुधवार को दोपहर बाद नमाज जौहर महफिल समां का आयोजन किया गया जिसमें कव्वाल पार्टियों ने नातिया कलाम व सूफियाना कलाम पेश किए।
दरगाह कमेटी के मीडिया प्रभारी मोहसिन हैदर ने बताया कि दरगाह कमेटी सदर हाजी सरवर खान पठान, पूर्व सदर मुहम्मद यूसुफ, सेक्रेट्री शादाब खान, मुबारिक हुसैन, हाजी इक़बाल हुसैन, एडवोकेट तनवीर इकबाल, शब्बीर हुसैन, इमरान खान, मुबीन खान, तौकीर खान, अमजद खान सहित कमेटी के सदस्यों व जायरिनों ने चादर पेश की। साथ ही अंजुमन तालीमुल इस्लाम व मुस्लिम महासंघ की ओर से भी चादर पेश की गई।

जायरिनों में लंगर व तबर्रूक का वितरण किया गया।
महफिले समां का आयोजन
महफिले समां में कव्वाल मोहम्मद असलम साबरी उदयपुरी ने हम्द, नात व मन-कबत शरीफ पेश की।
जिसमें तू बड़ा गरीब नवाज़ हैं..., तेरा दरबार या ख्वाजा गरीबों का सहारा है..., दिखाकर झलक अब ना कर मुझ से पर्दा..., वो अर्स के सब मंजर आंखों में उतर आए हैं, इमरत रसूल बाबा के चेहरे में सरकार नजर आए है... जैसे कलाम पढ़कर समा बांध दिया।
कव्वाल नईम साबरी कपासनवालों ने तुमको पाया है जमाने से किनारा कर करके, तुम बदल देते हो किस्मत को इशारा करके..., तेरे टुकडे पे पलते है ख्वाजा पिया..., मेरी बात बन गई है तेरी बात करते-करते..., तू बड़ा गरीब नवाज है..., मेरे सर पर सजा तेरा हाथ है मेरे इमरत रसूल बाबा तू हमेशा मेरे साथ है... पढ़ा।
कव्वाल मस्ताना अखलाक सुल्तानी ने माई बाप अन्नदाता ख्वाजा मोइनुद्दीन ..., मेरी बिगड़ी बनाना तेरा काम है... पढ़कर मसफिले समां अपना रंग जमा दिया। कव्वाल नजीर न्याजी उदयपुरी ने भी बेहतरीन कलाम पढ़कर सामाईन की खूब दाद लूटी। उर्स के आखिर में सभी कव्वाल पार्टियों ने मिलकर हजरत अमीर खुसरों का लिखा हुआ मशहूर व मारुफ कलाम रंग - आज रंग है ऐ मां रंग है री, मेरे इमरत रसूल के घर रंग है... पढ़ा।
उर्स में आयोजित होने वाले विभिन्न कार्यक्रमों की आखिरी कड़ी कुल की रस्म में कलामे पाक की तिलावत व फातिहा ख्वानी इमाम हाफिज मेहमूदुज्जमा ने पेश की।
जायरिनों की सलामती के साथ-साथ मुल्क में अमन, शांति व भाईचारे के लिए दुआएं की गई।
उसके बाद उर्स में मौजूद लोगों ने कुल के छींटे लिए और सभी ने एक दूसरे के गले मिलकर उर्स की मुबारकबादियां दी व मौजूद अकीदतमंदों में न्याज का तबर्रुक वितरित किया गया।
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