जनगणना में आदिवासी समुदाय के लिए पृथक कोड निर्धारित करने की मांग

सरकार से अपील

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उदयपुर 17 अप्रैल 2026। प्रस्तावित जनगणना 2027 को लेकर आदिवासी समाज ने अपनी अलग पहचान और अधिकारों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण मांग उठाई है। समाज के प्रतिनिधियों ने सरकार से जनगणना में आदिवासी समुदाय के लिए पृथक कोड निर्धारित करने की मांग की है, ताकि उनकी स्वतंत्र पहचान स्पष्ट रूप से दर्ज हो सके।

प्रतिनिधियों का कहना है कि वर्ष 1871 से 1951 तक आदिवासी समुदाय की गणना अलग श्रेणी में की जाती थी और उनका पृथक कोड भी मौजूद था, जिसे बाद में समाप्त कर दिया गया। इससे उनकी जनसंख्या और पहचान को लेकर स्पष्टता प्रभावित हुई है।

समाज के लोगों ने सवाल उठाया कि जब अन्य छोटे समुदायों को अलग कोड दिया जा सकता है, तो 12 से 15 करोड़ की आबादी वाले आदिवासी समाज को यह सुविधा क्यों नहीं मिल रही है।

प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि यह मांग किसी अन्य समुदाय के विरोध में नहीं है, बल्कि अपनी सांस्कृतिक पहचान, परंपराओं और वास्तविक जनसंख्या आंकड़ों की सुरक्षा के लिए है। उनका कहना है कि अलग कोड मिलने से सरकारी योजनाओं में हिस्सेदारी और प्रतिनिधित्व भी अधिक स्पष्ट हो सकेगा।

आदिवासी समाज ने सरकार से अपील की है कि जनगणना 2026 में उन्हें पृथक कोड प्रदान कर उनकी पहचान और अधिकारों को सुरक्षित किया जाए।

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