MLSU कुलगुरु सुनीता मिश्रा के औरंगजेब बयान पर विवाद

ABVP ने जताई कड़ी आपत्ति 
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उदयपुर 13 सितंबर 2025। मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय की कुलगुरु प्रो. सुनीता मिश्रा एक बयान को लेकर विवादों में घिर गई हैं। प्रो. सुनीता मिश्रा ने कहा कि ऐतिहासिक दृष्टिकोण से हम महाराणा प्रताप, पृथ्वीराज चौहान, अकबर सहित कई राजा-महाराजाओं के बारे में सुनते हैं। उन्होंने आगे कहा, "हम कई अच्छे राजाओं को याद रखते हैं, और कुछ औरंगजेब जैसे थे, जो एक कुशल प्रशासक (एडमिनिस्ट्रेटर) थे।"

इस बयान पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) उदयपुर ने कड़ी आपत्ति जताई। ABVP उदयपुर महानगर मंत्री पुष्पेन्द्र सिंह राठौड़ ने कहा, "औरंगजेब को कुशल प्रशासक बताना स्वीकार्य नहीं है। विद्यार्थी परिषद इस प्रकार के बयानों की कड़ी निंदा करती है, जो हमारी इतिहास की गलत व्याख्या कर युवाओं को गुमराह करते हैं।"

प्रो. सुनीता मिश्रा ने यह बयान "भारतीय ज्ञान प्रणाली: विकसित भारत 2047 के लिए रोडमैप" विषयक सेमिनार में मुख्य अतिथि के रूप में देते हुए दिया था। सेमिनार का आयोजन गुरु नानक कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय और एसोसिएशन ऑफ कॉमर्स एंड मैनेजमेंट के संयुक्त तत्वावधान में विश्वविद्यालय के बप्पा रावल सभागार में किया गया था।

अपने भाषण में प्रो. सुनीता मिश्रा ने जीवंत परंपराओं के महत्व पर जोर देते हुए कहा, "हमारी जीवंत परंपराएं हमें बेहतर ढंग से जीना सिखाती हैं। हमारा प्राचीन ज्ञान परंपरा हमें अमेरिका जैसी वैश्विक चुनौतियों का सामना करना सिखा चुकी है। आज कोई भी देश भारत की प्राचीन सांस्कृतिक परंपराओं का मुकाबला नहीं कर सकता।"

आत्मनिर्भर भारत और नई शिक्षा प्रणाली पर उन्होंने कहा, "आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा से भारत ने वैश्विक बाजार में गहरी पैठ बनाई है। हमारी नई शिक्षा प्रणाली ने युवाओं को एक नई दिशा दी है। युवाओं में कौशल विकास के कारण भारत ने तकनीकी और प्रौद्योगिकी क्षेत्र में अपना परचम लहराया है।"

मेरे क्तव्य को ग़लत तरीक़े से तोड़ मरोड़कर पेश किया गया

कल आयोजित अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ़्रेन्स में मेरे द्वारा दिए गए वक्तव्य को ग़लत तरीक़े से तोड़ मरोड़कर पेश किया गया है। अगर मेरे पूरे वक्तव्य को सुनेंगे तो आप को कहीं ये नहीं मिलेगा की मैंने औरंगज़ेब की प्रशंसा में कुछ कहा है।मैंने तमाम ऐतिहासिक संदर्भों को पेश किया था। मैं मूलतः अहिन्दी भाषी हूँ इस कारण सुनने में भाषा संबंधी असमंजस हो जाता है। मेरा मंतव्य किसी की भावनाओं को आहत करने का नहीं था। अगर मेरे वक्तव्य से किसी को ठेस पहुँची हो तो मैं क्षमा चाहती हूँ।  - प्रो सुनीता मिश्रा कुलगुरु मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय उदयपुर

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