उदयपुर में पट्टा विवाद गहराया
उदयपुर 16 दिसंबर 2025। पट्टों की मांग को लेकर उदयपुर में पट्टा संघर्ष समिति और सर्व समाज के लोगों ने जिला प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2013 में और बाद में 4 जनवरी 2022 को स्पष्ट आदेश जारी किए गए थे कि आबादी भूमि, बिलानाम और चारागाह भूमि पर वर्षों से बसे लोगों को पट्टे दिए जाएं। बावजूद इसके, इन आदेशों की अब तक पालना नहीं की गई। धरना दे रहे लोगों का आरोप है कि पैराफेरी क्षेत्र के 205 गांवों सहित हाल ही में जोड़े गए 260 गांवों में से 60 गांवों में हालात और भी खराब हैं। प्रशासनिक एजेंसियों द्वारा बिना पूर्व सूचना के मकानों को तोड़ा जा रहा है। मजदूरी, ठेला चलाकर और वर्षों की बचत से बनाए गए घरों पर बुलडोजर चलने से गरीब परिवार बेघर हो रहे हैं।
प्रदर्शनकारियों ने सवाल उठाया कि जब बड़े भू-माफियाओं और प्रभावशाली लोगों को कम दरों पर बीघों में जमीन आवंटित की जाती है, तो फिर आम नागरिकों को अपने छोटे से मकान के लिए पट्टा क्यों नहीं दिया जा रहा।
उनका कहना है कि नगर निगम, पंचायत या यूआईटी आने से पहले ही लोग दशकों से यहां बसे हुए हैं। संघर्ष समिति ने प्रशासन को 10 से 15 दिन का समय देते हुए साफ चेतावनी दी है कि यदि आदेशों की पालना नहीं हुई तो पूरे उदयपुर में चक्का जाम, बड़े आंदोलन और यहां तक कि चुनाव बहिष्कार जैसे कदम उठाए जाएंगे। प्रदर्शनकारियों ने जिला प्रशासन से नियमों में संशोधन कर सभी पात्र लोगों को जल्द पट्टे देने की मांग की है।
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