Udaipur News: उदयपुर में स्मार्ट मीटर लगाने वाले कर्मचारियों को बिना वेतन दिये कम्पनी पर फरार होने का आरोप
स्मार्ट मीटर लगाने वाले कर्मचारियों का दावा—करीब 30 लाख रुपये के बकाया के साथ कंपनी कार्यालय बंद कर फरार हुई
उदयपुर 2 जून 2026। शहर में स्मार्ट मीटर लगाने वाले करीब 85 कर्मचारियों ने वेतन नहीं मिलने का आरोप लगाते हुए जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई की मांग की है। कर्मचारियों का आरोप है कि स्मार्ट मीटर लगाने का कार्य करवा रही कंपनी के नाम पर उनसे मीटर लगवाने वाले वेंडर फरार हो गए ।
मंगलवाड़ के रहने वाले पीड़ित कर्मचारी भरत शर्मा ने बताया कि उदयपुर में स्मार्ट मीटर लगाने का ठेका जीनस कंपनी को मिला था, जिसे बाद में दीप इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड को सौंप दिया गया। कंपनी ने नवंबर 2025 में करीब 85 युवाओं को नियुक्त कर शहर में स्मार्ट मीटर लगाने का कार्य शुरू कराया। कर्मचारियों का आरोप है कि अप्रैल 2026 से 10 मई 2026 तक का वेतन दिए बिना कंपनी का माछला मगरा स्थित कार्यालय बंद कर दिया गया और कंपनी के जिम्मेदार लोग 10 मई को ही फरार हो गए। Udaipur News
भरत शर्मा के अनुसार भर्ती के दौरान कंपनी प्रबंधन ने न्यूनतम 22,500 रुपये मासिक वेतन, समय पर भुगतान और भविष्य निधि (पीएफ) की सुविधा देने का आश्वासन दिया था। इसके आधार पर कई बेरोजगार युवाओं ने नवंबर 2025 में नौकरी जॉइन की और उन्हें जीनस कंपनी के आईडी कार्ड भी जारी किए गए।
कर्मचारियों का कहना है कि नवंबर 2025 से जनवरी 2026 तक वेतन का भुगतान समय पर हुआ, लेकिन फरवरी 2026 से वेतन भुगतान में देरी शुरू हो गई। कई बार संपर्क करने के बावजूद कंपनी प्रबंधन और संबंधित अधिकारियों ने केवल आश्वासन दिए। इसके बावजूद कर्मचारियों ने 10 मई 2026 तक लगातार कार्य किया और उदयपुर शहर में करीब 16 हजार स्मार्ट मीटर लगाए।

कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि उनके वेतन से प्रतिमाह पीएफ राशि की कटौती की गई, लेकिन न तो पीएफ खाता उपलब्ध कराया गया और न ही जमा राशि की कोई जानकारी दी गई। उनका दावा है कि कंपनी के नाम पर उनसे मीटर लगवाने वाले वेंडर बकाया वेतन और अन्य देयकों सहित करीब 30 लाख रुपये का भुगतान किए बिना फरार हो गए । Udaipur News
माकपा जिला सचिव एवं पूर्व पार्षद राजेश सिंघवी के नेतृत्व में कर्मचारियों ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर बकाया वेतन दिलाने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। इस दौरान जिला कलेक्टर ने मामले की जांच कर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया।
राजेश सिंघवी ने कहा कि विभिन्न सरकारी विभागों में ठेका व्यवस्था के तहत काम करने वाले कर्मचारियों के हितों की पर्याप्त सुरक्षा नहीं हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई ठेका कंपनियां श्रम कानूनों की अनदेखी कर कर्मचारियों का शोषण करती हैं और भुगतान किए बिना कार्यस्थल छोड़ देती हैं, जिससे कर्मचारियों को आर्थिक और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ता है।
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