उदयपुर में विजयादशमी महोत्सव की तैयारियां परवान पर
गांधी ग्राउंड पहुँचे रावण, मेघनाथ और कुंभकरण के पुतले
उदयपुर 29 सितंबर 2025। धर्म और आस्था का पर्व विजयादशमी महोत्सव इस वर्ष भी पूरे भव्य स्वरूप और उत्साह के साथ मनाया जाएगा। पूज्य श्री बिलोचिस्तान पंचायत एवं श्री सनातन धर्म सेवा समिति के संयुक्त तत्वावधान में यह आयोजन गुरुवार 2 अक्टूबर को गांधी ग्राउंड (महाराणा भूपाल स्टेडियम, चेतक) में होगा।
पुतलों की रवानगी बनी आकर्षण
तैयारियों के बीच 28 सितम्बर को शक्ति नगर स्थित बिलोचिस्तान भवन से रावण, मेघनाथ और कुंभकरण के विशाल पुतले विधिवत पूजा-अर्चना के बाद रवानगी देकर गांधी ग्राउंड पहुँचाए गए। पुतलों के सड़क पर निकलते ही जगह-जगह लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी और वातावरण “जय श्रीराम” के नारों से गूंज उठा।
बारिश ने ली परीक्षा, कार्यकर्ताओं ने दिखाया जज़्बा
पंचायत के उपाध्यक्ष मनोज कटारिया ने बताया कि रवानगी के दौरान अचानक तेज़ बारिश ने माहौल को चुनौतीपूर्ण बना दिया। भीगे माहौल में कार्यकर्ताओं को तुरंत तिरपाल और मजबूत रस्सियों से पुतलों को ढककर सुरक्षित पहुँचाना पड़ा। हालाँकि कठिनाईयों के बावजूद कार्यकर्ताओं का उत्साह देखने लायक था। यह नजारा आयोजन की तैयारी में समर्पण और सामूहिक शक्ति का सजीव उदाहरण बन गया।
आगे की तैयारियाँ
सेवा समिति के महासचिव विजय आहूजा ने बताया कि आने वाले दिनों में पुतलों को अंतिम रूप दिया जाएगा और 100 फीट लंबी सोने की लंका भी सजाई जाएगी। उन्होंने कहा “हर वर्ष रावण की ऊँचाई बढ़ती है और इस बार का दहन पहले से कहीं अधिक भव्य होगा।”
पंचायत अध्यक्ष नानकराम कस्तूरी ने बताया कि पुतलों की सुरक्षित स्थापना के बाद अब ध्यान मंच, झाँकी, सुरक्षा और आतिशबाजी की व्यवस्थाओं पर केंद्रित किया जा रहा है। 30 सितंबर व 1 -2 अक्टूबर को मंच व्यवस्था, पुतले खडे करना और लंका की सजावट पूरी होगी।
महोत्सव को लेकर उत्सुकता
सेवा समिति के सचिव नरेंद्र क्थूरिया ने कहा कि शहरवासियों में महोत्सव को लेकर गहरी उत्सुकता है। हर साल की तरह इस बार भी गांधी ग्राउंड देशभक्ति और धार्मिक जयकारों से गूंज उठेगा।
आतिशबाजी, सांस्कृतिक झाँकियों और हजारों की भीड़ के बीच जब 70 फीट ऊँचा रावण, 65 फीट के मेघनाथ और कुंभकरण धराशायी होंगे, तब एक बार फिर दुनिया को यह संदेश जाएगा कि “सत्य की सदा असत्य पर विजय होती है।”
शक्तिनगर बिलोचिस्तान भवन से रावण, कुंभकरण और मेघनाथ के पुतले पहुंचाने में हेमंत गखरेजा, जितेंद्र तलरेजा, प्रकाश बुधराज, रमेश तलदार, प्रकाश तलरेजा, होलाराम छोड़ा, स्वरूप तुलसीजा, दीपक कालरा, मनोज बुलानी, मनीष डेम्बला, हरीश भाटिया, अमित खथूरिया व नेवन्दराम गखरेजा आदि कार्यकर्ता इस कार्य में बारिश के बाद भी जुटे रहे।
