UGC के नए नियमों के खिलाफ उदयपुर में विप्र समाज का विरोध प्रदर्शन

PM के खिलाफ नारेबाजी को लेकर आपस में ही उलझा संगठन 

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उदयपुर 29 जनवरी 2026। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों को लेकर उदयपुर में विप्र समाज और विभिन्न संगठनों में रोष देखने को मिला। विप्र फाउंडेशन के बैनर तले समाज के लोगों ने ज़िला कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया और राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपकर नए कानून को तत्काल प्रभाव से वापस लेने की मांग की।

प्रदर्शनकारियों का कहना था कि UGC द्वारा लाया गया नया कानून संविधान के मूल ढांचे और समानता के अधिकार के खिलाफ है। संगठनों के प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 21 प्रत्येक नागरिक को समानता और सुरक्षा का अधिकार देते हैं, लेकिन नया नियम इन प्रावधानों के अनुरूप नहीं है। उनका कहना है कि इस बदलाव से सामान्य वर्ग के अधिकारों और उनके संवैधानिक संरक्षण की अनदेखी की जा रही है, जिससे समाज के एक बड़े वर्ग में असुरक्षा और असंतोष की भावना बढ़ रही है।

प्रदर्शन के दौरान प्रदेश अध्यक्ष नरेंद्र पालीवाल, राकेश जोशी, मगन जोशी, केशव व्यास और सुरेश शर्मा सहित कई प्रमुख पदाधिकारी मौजूद रहे। हालांकि, शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान उस समय तनाव की स्थिति बन गई जब संगठन के कुछ कार्यकर्ता आपस में ही उलझ गए। 

विवाद की शुरुआत जनता सेना से जुड़े पंकज सुखवाल द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ नारेबाजी से हुई। मौके पर मौजूद भाजपा नेता अर्चना शर्मा ने इन नारों पर कड़ी आपत्ति जताई और इसे गरिमा के विरुद्ध बताया। उनका कहना था कि विरोध नीतिगत मुद्दों और नियमों पर होना चाहिए, न कि देश के प्रधानमंत्री के खिलाफ व्यक्तिगत टिप्पणियों के रूप में। इसी बात को लेकर दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई और माहौल गर्मा गया।

स्थिति बिगड़ती देख विप्र संगठन के पदाधिकारी दो गुटों में बंटते नजर आए और मौके पर अफरा-तफरी मच गई। विवाद बढ़ने पर वहां मौजूद वरिष्ठ पदाधिकारियों और समाज के प्रबुद्धजनों ने हस्तक्षेप किया। काफी देर तक चली समझाइश और बीच-बचाव के बाद दोनों पक्षों को शांत किया गया, जिसके बाद मामला ठंडा पड़ा और ज्ञापन सौंपने की प्रक्रिया पूरी की गई।

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