उदयपुर नगर निगम की नई होटल लाइसेंस व्यवस्था पर आपत्ति

होटल लाइसेंस गूगल रेटिंग से नहीं तय हो सकते
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उदयपुर 27 जनवरी 2026। होटलों के लाइसेंस एवं श्रेणी निर्धारण के लिए नगरनिगम द्वारा ऑनलाइन रेटिंग (विशेषकर गूगल रिव्यू) को आधार बनाना न केवल अव्यवहारिक है, बल्कि यह सरकारी नियमों और स्थापित प्रक्रियाओं के भी विरुद्ध है।

नगर निगम के स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा हाल ही में दिया गया बयान होटल व्यवसायियों में अनावश्यक असंतोष और भ्रम उत्पन्न करने वाला है। होटल लाइसेंस एवं श्रेणी निर्धारण के लिए गूगल रेटिंग को आधार बनाने की कोई व्यवस्था न तो राज्य में और न ही देश के किसी अन्य हिस्से में लागू है। इस प्रकार की प्रक्रिया केवल उदयपुर में अपनाया जाना नियमों के विपरीत और असंगत प्रतीत होता है।

यह भी उल्लेखनीय है कि दस वर्षों के लिए होटल लाइसेंस नवीनीकरण की प्रक्रिया पूर्व में ही निर्धारित और लागू की जा चुकी थी, इसके बावजूद व्यापारियों को स्पष्ट जानकारी न देकर प्रक्रिया को अनावश्यक रूप से टाल दिया गया। इस देरी के कारण एक ओर जहाँ होटल व्यवसायी मानसिक असमंजस और असंतोष में रहे, वहीं दूसरी ओर राज्य सरकार को संभावित राजस्व हानि भी उठानी पड़ी।

स्पष्ट दिशा-निर्देशों के अभाव और स्थापित सरकारी मानकों से हटकर अपनाए गए इस दृष्टिकोण ने होटल उद्योग में अनिश्चितता का माहौल पैदा किया है, जिसे शीघ्र ही दूर किया जाना आवश्यक है।

यह स्पष्ट किया जाना आवश्यक है कि होटलों की स्टार कैटेगरी तय करने की एक सुव्यवस्थित और विधिसम्मत प्रणाली सरकार द्वारा पहले से ही लागू है, जिसे केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय द्वारा निर्धारित मानकों के आधार पर किया जाता है। इन मानकों में होटल की इन्फ्रास्ट्रक्चर, कमरे, अग्नि सुरक्षा, स्वच्छता, पार्किंग, सुविधाएँ, स्टाफ व्यवस्था और तकनीकी मानक शामिल होते हैं।

इसके विपरीत, गूगल रेटिंग या किसी भी तृतीय पक्ष की ऑनलाइन रेटिंग केवल ग्राहकों के व्यक्तिगत अनुभव, सेवा, व्यवहार या अस्थायी असंतोष पर आधारित होती है। गूगल रेटिंग न तो इन्फ्रास्ट्रक्चर का आकलन करती है, न ही वह किसी भौतिक निरीक्षण (फिजिकल सर्वे) पर आधारित होती है। ऐसे में ऑनलाइन रेटिंग के आधार पर होटल को किसी श्रेणी में रखना कानूनी रूप से भी तर्कसंगत नहीं है।

यह प्रश्न भी महत्वपूर्ण है कि जब सरकार स्वयं स्टार कैटेगरी तय करती है, तो फिर नगर निगम द्वारा गूगल रेटिंग को आधार बनाकर नई श्रेणी व्यवस्था लागू करने की आवश्यकता क्यों? इससे न केवल भ्रम की स्थिति पैदा होती है, बल्कि होटल उद्योग पर अनावश्यक आर्थिक और प्रशासनिक दबाव भी आ जाता है।

होटलों का वर्गीकरण कभी भी किसी थर्ड पार्टी प्लेटफॉर्म के आधार पर नहीं किया गया है और न ही भविष्य में ऐसा किया जाना चाहिए। लाइसेंस, शुल्क और वैधानिक निर्णय केवल और केवल सरकारी नियमों व मानकों के अनुसार ही होने चाहिए।

अतः यह आवश्यक है कि
        •       नगर निगम के स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा अपनाए गए वर्तमान आधार और मूल्यांकन प्रणाली की तत्काल समीक्षा और संशोधन किया जाए,
        •       गूगल या अन्य ऑनलाइन रेटिंग को कानूनी वर्गीकरण का आधार न बनाया जाए,
        •       और होटल लाइसेंस एवं शुल्क निर्धारण में केवल सरकारी स्टार कैटेगरी और भौतिक निरीक्षण (फिजिकल सर्वे) को ही मान्य किया जाए।

यह सुधार न केवल न्यायसंगत और पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित करेगा, बल्कि पर्यटन उद्योग में विश्वास और स्थिरता भी बनाए रखेगा।

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