शहरी विस्तार और वन भूमि की सुरक्षा का मुद्दा विधानसभा में उठा

नाथद्वारा विधायक विश्वराज सिंह मेवाड़ ने उदाहरण स्वरूप नाथद्वारा एवं उदयपुर क्षेत्र का उल्लेख किया 
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नाथद्वारा/जयपुर 19 फरवरी 2026। नाथद्वारा विधायक विश्वराज सिंह मेवाड़ ने राजस्थान विधानसभा में विशेष उल्लेख प्रस्ताव (संख्या 295) के माध्यम से “शहरों के विस्तार और वन विभाग की जमीनों की सुरक्षा” का महत्वपूर्ण विषय उठाया।

विधानसभा में अपने वक्तव्य के दौरान मेवाड़ ने सदन में बात रखी कि प्रदेश के कई शहरों में वन विभाग, ग्रीन बेल्ट, स्क्रब्लैंड तथा वेटलैंड घोषित भूमि पर अनियोजित विस्तार और अतिक्रमण की घटनाएं सामने आ रही हैं। कुछ स्थानों पर दशकों से लोग निवास कर रहे हैं या व्यवसाय संचालित कर रहे हैं, जिससे प्रशासनिक लापरवाही, नीति अस्पष्टता अथवा मिलीभगत की आशंका भी उत्पन्न होती है।

उन्होंने उदाहरण स्वरूप नाथद्वारा एवं उदयपुर क्षेत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि वन एवं वेटलैंड घोषित क्षेत्रों के आसपास निर्माण और विस्तार की गतिविधियां गंभीर चिंता का विषय हैं।  मास्टर प्लान से परे जाकर शहरों का विस्तार किया जा रहा है, जिससे वन क्षेत्र और आम नागरिकों दोनों के हित प्रभावित हो रहे हैं।

विधायक मेवाड़ ने सरकार से मांग की कि

• शहरों में वन विभाग की भूमि की समग्र समीक्षा की जाए।
• वन क्षेत्र से सटे खाली सरकारी भूभाग को वन विभाग को सौंपकर हरित क्षेत्र को संरक्षित किया जाए।
• प्रशासनिक गलती से पीड़ित और त्रुटियों एवं मिलीभगत से लाभ उठाने वाले तत्वों को अलग अलग नजरिए से देखना चाहिए ।
• आवश्यक होने पर राज्य सरकार केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजकर वन एवं शहरी विकास के बीच संतुलित नीति तैयार करे।

मेवाड़ ने कहा कि विकास और पर्यावरण संरक्षण परस्पर विरोधी नहीं हैं, बल्कि संतुलित दृष्टिकोण से दोनों का समन्वय संभव है। पारदर्शिता, स्पष्ट नीति और जवाबदेही से ही भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा तथा शहरों और वन क्षेत्रों का संतुलित विस्तार सुनिश्चित किया जा सकेगा।

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