चंबल का पानी बदलेगा राजसमंद के भीम-देवगढ़ की तस्वीर

 | 
Rajsamand Bhim Deogarh

 

Udaipur Times, Rajsamand News: राजस्थान जैसे मरुस्थलीय और जलाभाव से प्रभावित प्रदेश में प्रत्येक घर तक स्वच्छ एवं पर्याप्त पेयजल पहुंचाना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। पानी केवल जीवन की बुनियादी आवश्यकता ही नहीं, बल्कि सामाजिक विकास, आर्थिक समृद्धि और बेहतर जीवन स्तर का आधार भी है। राजसमंद जिले के भीम-देवगढ़ क्षेत्र के लिए संचालित चंबल पेयजल परियोजना एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बनने जा रही है।

करीब 1,046 करोड़ रुपये की लागत वाली यह महत्वाकांक्षी परियोजना क्षेत्र में वर्षों से चली आ रही पेयजल समस्या के स्थायी समाधान की उम्मीद जगा रही है। परियोजना पूरी होने पर भीम और देवगढ़ क्षेत्र के 275 मुख्य गांवों तथा 827 ढाणियों के हजारों परिवारों को स्वच्छ एवं पर्याप्त पेयजल उपलब्ध हो सकेगा। लगभग 33 हजार परिवारों को घरेलू नल कनेक्शन से लाभान्वित करने का लक्ष्य इस परियोजना को ग्रामीण जीवन में बदलाव लाने वाली महत्वपूर्ण पहल बनाता है। दिसंबर 2027 तक परियोजना को पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। Chambal Water Project

चंबल के पानी से दूर होगी वर्षों पुरानी प्यास

भीम-देवगढ़ क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों और सीमित जल संसाधनों के कारण यहां के ग्रामीणों को लंबे समय से पेयजल की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता रहा है। विशेषकर गर्मियों के मौसम में पानी की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती बन जाती है। कई परिवारों को घरेलू आवश्यकताओं के लिए दूरस्थ जल स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ता है। ऐसे में चंबल का पानी इस क्षेत्र के लिए नई उम्मीद और राहत का संदेश लेकर आ रहा है।

परियोजना के अंतर्गत भीम क्षेत्र के 95 मुख्य गांवों और 499 ढाणियों तथा देवगढ़ क्षेत्र के 102 मुख्य गांवों और 169 ढाणियों में आंतरिक वितरण प्रणाली विकसित करते हुए कुल 275 गांवों और 827 ढाणियों तक चंबल का पानी पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यह व्यापक नेटवर्क दूरस्थ ग्रामीण बस्तियों तक पेयजल सुविधा पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

1,046 करोड़ रुपये का निवेश, मजबूत होगा पेयजल आधारभूत ढांचा

किसी भी क्षेत्र का विकास वहां उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं पर निर्भर करता है। पेयजल व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए राज्य सरकार द्वारा किया जा रहा 1,046 करोड़ रुपये का निवेश ग्रामीण विकास के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह परियोजना केवल पानी की आपूर्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से जल संग्रहण, शुद्धिकरण, पंपिंग और वितरण का आधुनिक ढांचा विकसित किया जा रहा है।

परियोजना के अंतर्गत लगभग 50 प्रतिशत पाइपलाइन बिछाने का कार्य पूरा हो चुका है। इसके अतिरिक्त 54 उच्च जलाशयों, 16 पंपिंग स्टेशनों और 16 क्लियर वाटर रिजर्वायर का निर्माण एवं विकास परियोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ये संरचनाएं चंबल के पानी को विभिन्न क्षेत्रों और ऊंचाई वाले गांवों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाएंगी।

भीम-देवगढ़ का पहाड़ी भूभाग और दुर्गम रास्ते निर्माण कार्यों को चुनौतीपूर्ण बनाते हैं। इसके बावजूद परियोजना के कार्यों का आगे बढ़ना इस बात का संकेत है कि क्षेत्र में पेयजल सुविधाओं के विस्तार के लिए योजनाबद्ध प्रयास किए जा रहे हैं। आधुनिक पाइपलाइन और जल वितरण तंत्र तैयार होने से आने वाले वर्षों में क्षेत्र की पेयजल आवश्यकताओं को बेहतर ढंग से पूरा करने का आधार तैयार होगा।

महिलाओं के जीवन में आएगा सकारात्मक बदलाव

ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता का सबसे सीधा और सकारात्मक प्रभाव महिलाओं के जीवन पर पड़ता है। आज भी अनेक ग्रामीण परिवारों में महिलाओं को घरेलू जरूरतों के लिए पानी जुटाने में काफी समय और श्रम लगाना पड़ता है। कई बार बच्चों को भी पानी लाने में सहयोग करना पड़ता है, जिससे उनकी पढ़ाई और अन्य गतिविधियां प्रभावित होती हैं।

चंबल परियोजना पूरी होने पर घरों तक नल से पानी पहुंचने की सुविधा इन परिस्थितियों में बड़ा बदलाव ला सकती है। महिलाओं का समय और श्रम बचेगा तथा वे शिक्षा, परिवार की देखभाल, आजीविका और अन्य रचनात्मक गतिविधियों में अधिक भागीदारी निभा सकेंगी। बच्चों को भी पढ़ाई और खेलकूद के लिए अधिक समय मिल सकेगा।

इस तरह परियोजना का लाभ केवल पेयजल उपलब्धता तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह ग्रामीण महिलाओं के सशक्तीकरण और परिवारों के जीवन स्तर में सुधार का माध्यम भी बनेगी।

स्वच्छ पेयजल से बेहतर स्वास्थ्य और मजबूत ग्रामीण अर्थव्यवस्था

स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता का सीधा संबंध आमजन के स्वास्थ्य से है। नियमित और सुरक्षित पेयजल आपूर्ति से दूषित जल के कारण होने वाली बीमारियों की आशंका कम करने में मदद मिल सकती है। इससे ग्रामीण परिवारों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की दिशा में सकारात्मक आधार मिलेगा। इसके साथ ही पशुपालन और ग्रामीण आजीविका से जुड़ी गतिविधियों को भी अप्रत्यक्ष लाभ मिलने की संभावना है। पानी की बेहतर उपलब्धता\

ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने और स्थानीय जीवन को अधिक सुगम बनाने में सहायक होगी। पेयजल संकट से राहत मिलने पर ग्रामीण परिवार अपनी ऊर्जा और संसाधनों का उपयोग विकास के अन्य कार्यों में कर सकेंगे।

समयबद्ध पूर्णता और गुणवत्ता पर विशेष जोर

इतने बड़े भौगोलिक क्षेत्र में पेयजल पहुंचाने वाली परियोजना का सफल क्रियान्वयन निरंतर निगरानी, तकनीकी दक्षता और विभागीय समन्वय पर निर्भर करता है। परियोजना को दिसंबर 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। ऐसे में शेष निर्माण कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में गुणवत्ता के साथ पूरा करना महत्वपूर्ण है।

विकसित राजस्थान के संकल्प को मिलेगी नई मजबूती

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं के विस्तार और जल सुरक्षा को मजबूत बनाने की दिशा में कार्य कर रही है। भीम-देवगढ़ चंबल पेयजल परियोजना इसी सोच का महत्वपूर्ण उदाहरण है। यह परियोजना प्रदेश के जलाभाव वाले क्षेत्रों में बेहतर पेयजल व्यवस्था विकसित करने और ग्रामीण परिवारों को राहत पहुंचाने की दिशा में दूरगामी महत्व रखती है।

राजसमंद के भीम-देवगढ़ क्षेत्र में चंबल का पानी पहुंचना केवल एक बड़ी पेयजल परियोजना का पूरा होना नहीं होगा, बल्कि यह हजारों परिवारों की वर्षों पुरानी परेशानी के समाधान की दिशा में ऐतिहासिक कदम साबित हो सकता है। 275 गांवों और 827 ढाणियों तक पहुंचने वाला यह जल नेटवर्क ग्रामीण जीवन में नई खुशहाली, बेहतर स्वास्थ्य, महिलाओं के सशक्तीकरण और आर्थिक गतिविधियों के विस्तार की संभावनाएं लेकर आएगा।

Follow UdaipurTimes on Facebook , Instagram , and Google News