गृहस्थ रहकर भी संतों जैसा आचरण, 25 साल से बिना अन्न के जी रही है कृष्णा सोनी


गृहस्थ रहकर भी संतों जैसा आचरण, 25 साल से बिना अन्न के जी रही है कृष्णा सोनी

64 वर्षीय महिला का वजन 36 किलो

 
kRISHNA SONI

उदयपुर। जीवन में कभी कभार ऐसी घटनाएं सामने आती है जिन पर यकीन करना मुश्किल होता है। लेकिन कई बार ऐसी घटनाएं हमारे सामने आ आती है। ऐसे में उन पर यकीन करने के अलावा कोई चारा भी नहीं रहता। ऐसा ही मामला उदयपुर हाल निवासी मुंबई कृष्णा सोनी का है। जो 25 साल से चाय और पानी पीकर जीवन यापन कर रही है। उनके घर आने वाला कोई भी मेहमान भूखा नहीं लौटता। इसके साथ ही माह में एक व्यक्ति के खाने लायक राशन गरीबों को जरूरतमंदों को वितरित कर देती हैं।

अभी वह अपने जेठानी उमा देवी सोनी के यहां ठहरी हुई है। उनके आने की सूचना पर कई लोग उनसे मिलने भी पहुंच रहे हैं। कृष्णा सोनी ने बताया कि उन्हें अल्सर की बीमारी होने पर 1984 में उनका ऑपरेशन किया गया था। इसी दौरान पति से अनबन होने के चलते कुछ टांके भी टूट गए थे। इसके बाद खाना खाती थी, लेकिन उसमें अरूचि पैदा हो गई। इसके साथ ही सोचा की भारत में कई लोगों को दो वक्त की रोटी भी नसीब नहीं होती। वे भी तो अपना जीवन यापन करते हैं। करीब 25 साल से अन्न नहीं खा रही हूं। एक व्यक्ति के भोजन जितना प्रतिमाह गरीबों और जरूरतमंदों को दान देती हूं। 

KRISHNA SONI

नियमित रूप से माताजी की सेवा पूजा के साथ ही अन्य सभी काम करती हूं। पोते-पोती, दोहिते-दोहितियों की जिद पर साल में एकाध बाद आइसक्रिम, कुल्फी या ज्यूस पीती हूं। इसके अलावा प्रतिदिन सुबह-शाम चाय और पानी ही पीती हूं। शरीर में किसी प्रकार की बीमारी नहीं है। कभी कभार हल्के चक्कर आते हैं। वे आम आदमियों को भी आते हैं। एक साल पहले चिकित्सालय में वजन किया था। उस समय 36 किलो वजन था। 

उनकी भतीजी डॉ. सुरेखा सोनी ने बताया कि चाची चार घंटे सोती है। उनकी दिनचर्या में सुबह से लेकर रात तक व्यस्तता रहती है। कभी भी थकान और आलस नहीं दिखाई देता। करीब पांच दिन से मैं 24 घंटे उनके साथ हूं। यह सब देखकर मुझे काफी आश्चर्य हो रहा है। यह वास्तव में भगवान के चमत्कार से कम नहीं है। उनके देवर गजेंद्र सोनी ने बताया कि भाभी अपने सारे काम खुद करती है। इसके साथ ही परिवार का खाना भी स्वयं बनाती है। केवल पानी और चाय से इतनी एनर्जी कैसे मिलती है यह आश्चर्य की बात है। उन्होंने बताया कि भाभी का पीहर जड़ियों की ओल में था।

योगिक क्रियाओं से ऐसा संभव

जनरल एवं लेप्रोस्कोपिक सर्जन असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. राजवीर सिंह ने बताया कि लंबे समय तक कम कैलोरी लेने से शरीर का मैटाबॉलिज्म स्लो हो जाता है। कैलोरी की आवश्यकता भी कम पड़ती है। व्यक्ति की दिनचर्या के लिए जरूरी कैलोरीज की आवश्यकता लिक्विड फ्लो में लिए हुए भोज्य पदार्थों से होने पर इस तरह से जीवन यापन संभव है। कई साधु-संत योगिक क्रियाओं से श्वसन दर काे कम कर लेते हैं। ऐसे में शरीर का मैटाबॉलिज्म स्लो हो जाता है। ऐसे में शरीर कम कैलोरी में भी काम चला लेता है।

सांसारिक व्यवहारों के साथ तपस्या बड़ी उपलब्धि

नाइयों की तलाई स्थित तेरापंथ भवन में विराजित मुनि संबोध कुमार ने कहा कि शास्त्रों और आगमों में तपस्या श्रावक और संत दोनों कर सकते हैं। कार्मिक एकाउंट की निर्जरा 12 तरह से होती है। इनमें से एक मार्ग तपस्या भी है। सांसारिक जीवन के सारे व्यवहारों को निभाते हुए तपस्या करना काफी बड़ी उपलब्धि है। यह परिवार के साथ के बिना संभव नहीं है।

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