राज्यवर्धन: राजसमंद से पेरिस तक
पिता के गम के बीच मिलान फैशन वीक में राजस्थान का नाम रोशन
नीट की तैयारी छोड़ मॉडलिंग को चुना, 19 की उम्र में बने मगरा क्षेत्र के ग्लोबल आइकन, संघर्ष से सफलता तक की ऐसी दास्तां, जिसने तंग गलियों से सात समंदर पार रचा इतिहास।
राजसमंद, 8 फरवरी 2026 - राजस्थान की रेतीली पगडंडियों से निकलकर पेरिस और मिलान के लग्जरी रैंप तक का सफर किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं लगता। यह कहानी है राज्यवर्धन सिंह चौहान की, जिन्होंने न केवल सात समंदर पार भारत का मान बढ़ाया, बल्कि यह भी साबित कर दिया कि अगर हौसले बुलंद हों, तो गांव की तंग गलियां भी अंतरराष्ट्रीय रास्तों में बदल सकती हैं। थोरिया की गलियों से शुरू हुआ सपनों का सफर राजसमंद जिले के भीम उपखंड का एक छोटा सा कस्बा है-थोरिया (पीपली नगर)। इसी गांव की साधारण गलियों में पला-बढ़ा 19 साल का एक किशोर आज ग्लोबल फैशन जगत का उभरता सितारा है। राज्यवर्धन की परवरिश एक सैन्य परिवेश में हुई।
उनके पिता, स्वर्गीय एक्स फौजी ओंकार सिंह रावत, ने उन्हें अनुशासन और कभी न हार मानने का जज्बा विरासत में दिया था।. जब NEET की राह मुड़ गई मॉडलिंग की ओर ज्यादातर युवाओं की तरह राज्यवर्धन भी मेडिकल की प्रवेश परीक्षा (NEET) की तैयारी कर रहे थे। लेकिन कुदरत ने उनके लिए एक अलग ही मंच तैयार किया था। उनकी कद-काठी और व्यक्तित्व को देखकर एक मित्र ने उन्हें मॉडलिंग में हाथ आजमाने की सलाह दी। मुंबई का बुलावा: NEET की परीक्षा के बाद उन्होंने एक मॉडलिंग एजेंसी में आवेदन किया और जल्द ही उन्हें 'एनॉन मॉडल्स' के जरिए सपनों की नगरी मुंबई बुलाया गया। वैश्विक प्रस्ताव: उनकी प्रतिभा का जादू ऐसा चला कि कुछ ही महीनों में फ्रांस, इटली, स्पेन और लंदन जैसी फैशन राजधानियों से उनके पास बड़े प्रस्ताव आने लगे. सफलता के बीच 'पिता' का साया उठना: एक गहरा आघात कहते हैं हर बड़ी सफलता बड़ी परीक्षा लेकर आती है। जब राज्यवर्धन के करियर की उड़ान शुरू होने ही वाली थी, तभी 22 नवंबर 2025 को उनके पिता ओंकार सिंह रावत का निधन हो गया। पिता, जो उनके सबसे बड़े मार्गदर्शक और ढाल थे, उनके चले जाने से राज्यवर्धन टूट गए। लेकिन पिता का वह सपना, जिसमें उन्होंने अपने बेटे को हमेशा ऊंचाइयों पर देखने की चाह रखी थी, राज्यवर्धन के लिए आगे बढ़ने की ताकत बना।

पेरिस और मिलान: आँसुओं और तालियों के बीच ऐतिहासिक डेब्यू पिता के निधन के गम को सीने में दबाए, अपनी जिम्मेदारी और सपनों को कंधे पर उठाकर राज्यवर्धन 4 जनवरी को पेरिस पहुंचे। वहां जो हुआ, उसने इतिहास रच दिया:पेरिस (20 जनवरी): मात्र 19 साल की उम्र में उन्होंने भारतीय ब्रांड 'कार्तिक रिसर्च' के लिए अपना इंटरनेशनल डेब्यू किया।मिलान की चमक: इसके बाद उन्होंने इटली के मशहूर ब्रांड 'रोवेन रोज़' के लिए रैंप वॉक किया। भावुक क्षण: "मिलान में रैंप पर चलते समय मेरी आँखों में आँसू थे। वह सिर्फ मेरा करियर नहीं था, बल्कि मेरे स्वर्गीय पिता का वह अटूट भरोसा था जो सच हो रहा था।
"राज्यवर्धन सिंह चौहान मगरा क्षेत्र का गौरव और युवाओं के लिए मिसाल राज्यवर्धन की यह सफलता उन सभी युवाओं के लिए एक करारा जवाब है जो संसाधनों की कमी का रोना रोते हैं। उन्होंने साबित कर दिया कि यदि इरादे फौलादी हों और माता-पिता का आशीर्वाद साथ हो, तो राजस्थान के एक छोटे से गाँव से निकलकर दुनिया का कोई भी मंच छोटा पड़ जाता है। आज राज्यवर्धन सिंह चौहान सिर्फ एक मॉडल नहीं, बल्कि मगरा क्षेत्र के गौरव हैं। उनकी यह यात्रा संघर्ष, साहस और एक पिता के बलिदान की अमर दास्तां है।
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