Udaipur Local News: उदयपुर MPUAT के तीन वैज्ञानिक विश्व के शीर्ष 2% में शामिल
UdaipurTimes, October 9, 2026 | Udaipur Local News (People of Udaipur): महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (MPUAT), उदयपुर के लिए यह गौरवपूर्ण उपलब्धि है कि विश्वविद्यालय के तीन वैज्ञानिकों—डॉ. एन.एल. पंवार, डॉ. विनोद सहारण एवं डॉ. देवेंद्र जैन ने वर्ष 2026 की स्टैनफोर्ड–एल्सेवियर विश्व के शीर्ष 2 प्रतिशत वैज्ञानिकों की सूची में स्थान प्राप्त किया है। यह उपलब्धि विश्वविद्यालय में हो रहे गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान, वैज्ञानिक नवाचार तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शोध प्रभाव की बढ़ती पहचान को दर्शाती है।
- डॉ. देवेन्द्र जैन: जैव प्रौद्योगिकी, सूक्ष्मजीव जैव प्रौद्योगिकी, नैनोकणों तथा पादपों में उनके अनुप्रयोगों पर अनुसंधानरत हैं।
- डॉ. विनोद सहारण: सतत कृषि के लिए अगली पीढ़ी के नैनो-उर्वरकों के विकास तथा पोषक तत्वों के उपयोग की दक्षता बढ़ाने पर कार्यरत हैं।
- डॉ. एन. एल. पंवार: उन्नत चूल्हों, बायोमास गैसीफायर एवं सौर तापीय उपकरणों के विकास के माध्यम से स्वच्छ, ऊर्जा-कुशल एवं सतत ऊर्जा तकनीकों पर कार्यरत हैं।
विभिन्न नवाचारों एवं आविष्कारों के लिए पेटेंट
विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. प्रताप सिंह ने इस उपलब्धि की जानकारी देते हुए तीनों वैज्ञानिकों को हार्दिक बधाई दी, एवं बताया कि तीनों वैज्ञानिकों ने अपने-अपने शोध क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देते हुए अनेक शोध-पत्र प्रकाशित किए हैं, विभिन्न नवाचारों एवं आविष्कारों के लिए पेटेंट प्राप्त किए हैं तथा महत्वपूर्ण पुस्तकों एवं शोधपरक साहित्य का लेखन भी किया है। उन्होंने इसे विश्वविद्यालय के लिए गर्व का विषय बताते हुए वैज्ञानिकों को भविष्य में भी उच्च गुणवत्ता वाले शोध, नवाचार तथा समाजोपयोगी वैज्ञानिक तकनीकों के विकास के लिए निरंतर प्रयास करने हेतु प्रेरित किया। उन्होंने आशा व्यक्त की कि तीनों वैज्ञानिक अपनी अनुसंधान उपलब्धियों से विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा को और ऊंचाइयों तक पहुंचाएंगे तथा युवा वैज्ञानिकों एवं शोधार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत बनेंगे।
शोध प्रभाव के आधार पर अंतरराष्ट्रीय पहचान
स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित पद्धति तथा एल्सेवियर के सहयोग से प्रकाशित यह सूची वैज्ञानिकों के शोध-प्रभाव का आकलन करने वाली एक प्रतिष्ठित वैश्विक सूची है। इसमें उद्धरणों की संख्या, एच-इंडेक्स, सह-लेखक संख्या के समायोजन से संबंधित संकेतकों तथा अन्य संयुक्त उद्धरण-आधारित मानकों का उपयोग किया जाता है। वर्ष 2026 की सूची में एकल-वर्षीय शोध प्रभाव का आकलन वर्ष 2025 के दौरान प्राप्त उद्धरणों के आधार पर किया गया है, वर्ष 2026 की एकल-वर्षीय सूची में भारत से 6,954 शोधकर्ता शामिल हैं।