हारेगा कोरोना - जीतेगा देश


 हारेगा कोरोना - जीतेगा देश

 
हारेगा कोरोना - जीतेगा देश
उदयपुर के वल्लभनगर कस्बे के एक ही परिवार से कई सदस्य नर्सिंग स्टाफ है जो पूरी लगन और समर्पण से अपना कर्तव्य निभा रहे है। श्री लक्ष्मीलाल लोहार (नर्सिंग प्रभारी) स्वास्थ्य केंद्र वल्लभनगर के साथ ही उनकी बेटी अल्पना मालवीय स्टाफ नर्स भी इस स्वास्थ्य केंद्र पर कंधे से कंधा मिलाकर कोरोना की ड्यूटी में रात दिन लगी हुई हैं, उनकी दूसरी बेटी श्रीमती अनीता मालवीय स्टाफ नर्स भी इसी क्षेत्र के दरोली स्वास्थ्य केंद्र पर अपनी ड्यूटी मुस्तेदी से कर रही है। 

इस उद्देश्य के साथ आज कई कोरोना वॉरियर्स देशभर में जुटे हैं, इसी कड़ी में अन्य विभागों के साथ-साथ इस जंग में चिकित्सा विभाग से नर्सिंग स्टाफ भी प्रथम पंक्ति में खड़े हैं। कहीं-कहीं तो परिवार के कई सदस्य भी इस सेवा से मैं लगे हुए हैं । 

उदयपुर के वल्लभनगर कस्बे के एक ही परिवार से कई सदस्य नर्सिंग स्टाफ है जो पूरी लगन और समर्पण से अपना कर्तव्य निभा रहे है। श्री लक्ष्मीलाल लोहार (नर्सिंग प्रभारी) स्वास्थ्य केंद्र वल्लभनगर के साथ ही उनकी बेटी अल्पना मालवीय स्टाफ नर्स भी इस स्वास्थ्य केंद्र पर कंधे से कंधा मिलाकर कोरोना की ड्यूटी में रात दिन लगी हुई हैं, उनकी दूसरी बेटी श्रीमती अनीता मालवीय स्टाफ नर्स भी इसी क्षेत्र के दरोली स्वास्थ्य केंद्र पर अपनी ड्यूटी मुस्तेदी से कर रही है। 

दोनों बेटियों  के बच्चों को नानी के पास छोड़ा हुआ है जिनका पूरा दिन इन बच्चो को रखने और इन कोरोना वारियर्स की सेवा में ही पूरा हो जाता है। गत दिनों इस क्षेत्र में आये पॉजिटिव मरीज के बाद घर घर स्क्रीनिंग का कार्य बड़े जोरो पर है, कब रात दिन गुजर रहे है पता ही नही रहता। 

इस परिवार की सेवा का उल्लेख यहीं खत्म नहीं हो जाता लक्ष्मी लाल लोहार के दामाद व अल्पना के पति जितेंद्र लोहार भी नर्सिंग स्टाफ है जो की महाराणा भूपाल राजकीय चिकित्सालय के कोरोना विंग में अपनी 14 दिन ड्यूटी के बाद 14 दिन के क्वारनटाइन में कजरी होटल में रुके हुए है। जितेंद्र लोहार कई दिनों से परिवार से दूर हैं इसलिए उनके पैतृक गांव धारता में उनके माता-पिता हमेशा चिंतित रहते हैं और रोज फोन पर उनके स्वास्थ्य की जानकारी लेते हैं , क्योंकि 2 वर्ष पूर्व ही वह अपने एक बेटे को खो चुके हैं । जितेंद्र के एक भाई स्व.मुरलीधर लोहार, वायु सेना में कार्यरत थे जो 2 वर्ष पूर्व लेह लद्दाख में शहीद हो चुके हैं जिनकी मूर्ति उनके गांव धारता में स्थापित है। 

जितेंद्र ने बताया की उनकी बड़ी बेटी जो नानी के पास है को बताया कि वह 16 तारीख को घर आएंगे तो उनकी बेटी ने बड़ा ही मार्मिक पत्र अपने पिता को लिखा है की  " पापा आप क्या कर रहे है, प्लीज आपकी ये डॉक्टर की ड्यूटी जल्दी खत्म हो जाये, आप भी गॉड से विश करना ओके और हैंड डेली वाश करना और बार बार 1 गिलास पीना ओके और में मई की 16 तारीख को आ रही हु ओके, बाय आप भी मुझे लेटर लिखना । ओके बाय।"  

इस प्रकार हम देखते हैं कि कोरोना वायरस की यह जंग लड़ रहे हैं  वारियर्स को ना परिवार से दूरी का गम है ना ही कोई चिंता , उनका बस एक ही धैर्य है और एक ही संदेश है कि हमे हर हाल में कोरोना वायरस को हराना है, हम सभी अपने घरों में रहे और कवेरन्टीन नियमों का पालन करें, ताकि देश और दुनिया से कोरोना को मिटाया जा सके।

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