क्या दिलचस्प होने जा रहा उदयपुर सीट पर इस बार यह चुनाव


क्या दिलचस्प होने जा रहा उदयपुर सीट पर इस बार यह चुनाव

बस चंद दिनों का इंतज़ार और बाकी है असली खेल शुरू होने में

 
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उदयपुर 29 अक्टूबर 2023। संभाग के सबसे बड़े ज़िले उदयपुर की आठ सीट (सलूंबर समेत) आगामी विधानसभा सीट के लिए कांग्रेस, भाजपा, बीएपी (BAP), बीटीपी (BTP) ने विभिन्न विधानसभा सीट से प्रत्याशियों की घोषण कर दी है। इन आठो सीटों पर वल्लभगनर को छोड़ दिया जाए तो मुख्य मुकाबला भाजपा कांग्रेस के बीच ही है। 

उदयपुर शहर विधानसभा सीट से भाजपा ने ताराचंद जैन को अधिकृत प्रत्याशी बनाया है। कांग्रेस ने अभी तक कोई प्रत्याशी घोषित नहीं किया है। वहीँ आम आदमी पार्टी ने मनोज लबाना को प्रत्याशी घोषित किया है। 

प्रदेश के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रह चुके मोहनलाल सुखाड़िया की इस सीट 2003 से इस सीट पर खूंटा गाड़ कर बैठे भाजपा के गुलाबचंद कटारिया की राजनितिक विदाई के बाद यह सीट चर्चा में है। भाजपा के प्रत्याशी ताराचंद जैन का उदयपुर नगर निगम के उप महापौर पारस सिंघवी द्वार खुलकर विरोध हो रहा है। पारस सिंघवी लगातार विरोध जताकर पार्टी पर प्रत्याशी बदलने की मांग कर रहे है। 

लगता नहीं की पार्टी टिकट में बदलाव करेगी। ऐसे में पारस सिंघवी द्वारा निर्दलीय ताल ठोकने के कयास लगाए जा रहे है। एक कयास यह भी लगाया जा रहा है कि पारस सिंघवी जनता सेना का दामन थाम ले। आपको बता दे जनता सेना ने अभी तक आपने प्रत्याशी घोषित नहीं किया है। या फिर पारस सिंघवी कांग्रेस का दामन थाम ले यह संभव तो नहीं लेकिन राजनीती में कुछ भी असंभव नहीं होता। 

इधर, कांग्रेस में टिकट वितरण से पहले ही बाहरी/स्थानीय के मुद्दे पर जंग छिड़ी हुई है। इसलिए कांग्रेस को इस सीट से प्रत्याशी घोषित करने में खासी मशक्कत करनी पड़ रही है। कांग्रेस की टिकट की दौड़ में गौरव वल्लभ पंत, दिनेश खोड़निया रेस में आगे चल रहे थे लेकिन दो दिन पूर्व कांग्रेस के स्थानीय नेताओ से प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दोनों का नाम लिए बगैर बाहरी के विरोध का राग अलापना शुर कर दिया है। 

अगर कांग्रेस कार्यकर्ताओ के विरोध को आलाकमान और प्रदेश नेतृत्व ने गंभीरता दिखाई तो स्थानीय नेताओ में गिरिजा व्यास, दिनेश श्रीमाली, पंकज शर्मा, राजीव सुहालका, अजय पोरवाल और युवा नेता अरमान जैन समेत कई नाम दावेदारों की फ़ौज है। 

कांग्रेस से टिकट का ज़ोर लगा रहे दिनेश खोड़निया जैन समुदाय से आते है और सीएम अशोक गहलोत के करीबी माने जाते है। डूँगरपुर ज़िले के सागवाड़ा निवासी दिनेश खोड़निया उदयपुर शहर विधानसभा सीट से दावा थोड़ा मज़बूत इसलिए है कि इस सीट पर जैन समुदाय के मतदाताओं का बाहुल्य है। 

कांग्रेस ने इससे पूर्व 1980 में इस समुदाय के शेषमल पगारिया को उम्मीदवार बनाया था हालाँकि वह गुलाबचंद कटारिया से हार गए थे। कटारिया के जैन समुदाय से ताल्लुक रखने और सजातीय मतों पर पकड़ के कारण जैन समुदाय यहाँ हर चुनाव में भाजपा को ही वोट करता आया है। कांग्रेस खोड़निया को मैदान में उतरकर इस वोट बैंक में सेंधमारी करने की फ़िराक में है। खोड़निया का जैन समुदाय में अच्छा प्रभाव भी है। जैन समुदाय के ही अजय पोरवाल और युवा नेता अरमान जैन भी टिकट की कतार में है  

कांग्रेस की टिकट से दूसरे दावेदार 46 वर्षीय प्रोफेसर गौरव वल्लभ पंत का जन्म जोधपुर के पीपाड़ गांव में हुआ था। पाली से उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद जमशेदपुर के XLRI कॉलेज में प्रोफेसर रह चुके गौरव वल्लभ पंत कांग्रेस के तेज़ तर्रार प्रवक्ता है। पिछले कुछ महीनो से उदयपुर में डेरा डाल कर बैठे है। यह ब्राह्मण समाज से आते है। कांग्रेस की ओर से ब्राह्मण समाज के मोहनलाल सुखाड़िया, गिरिजा व्यास और भाजपा के भानुकुमार शास्त्री और शिव किशोर सनाढ्य इस सीट में  विधायक रह चुके है। 

जैन समुदाय के बाद मुस्लिम और ब्राह्मण मतदाताओं की संख्या भी उदयपुर शहर विधानसभा सीट में खासी है। इसलिए गौरव वल्लभ पंत को तरज़ीह मिल सकती है हालाँकि ब्राह्मण समाज से ही पूर्व विधायक गिरिजा व्यास भी टिकट की दावेदार है हालाँकि गिरता स्वास्थ्य और बढ़ती उम्र इनके आड़े आ रही है। इसी समाज के कांग्रेस के स्थानीय कार्यकर्ता पंकज शर्मा और 2013 में कटारिया के सामने चुनाव लड़ चुके दिनेश श्रीमाली भी टिकट के दावेदार है। 

अब अगर ओबीसी समुदाय की बात की जाए तो कांग्रेस के राजीव सुहालका ने भी टिकट के लिए दावेदारी पेश की है। कल ही सर्व ओबीसी समाज ने कांग्रेस से राजीव सुहालका को टिकट देने की मांग की है। इससे पूर्व ओबीसी समुदाय से कांग्रेस के त्रिलोक पूर्बिया 1998 में विधायक चुने गए थे। वहीँ मुस्लिम समुदाय से पूर्व पार्षद और पल्टन मस्जिद के सचिव रियाज़ हुसैन ने भी टिकट की दावेदारी पेश की है। 

अब कांग्रेस की तरफ से किसको टिकट मिलता है यह आने वाले 3-4 दिनों में साफ़ हो जाएगा। क्या कांग्रेस के जादूगर गहलोत अपने पिटारे से कोई नया जादू का खेल रचने वाले है ? आने वाले सप्ताह में काफी बादल छंट जाएंगे जो की उदयपुर के राजनैतिक आसमान पर इस वक़्त छाए हुए है। आने वाले दिनों में यह तस्वीर भी साफ़ हो जाएगी की पारस सिंघवी अपने इरादे पर अटल रहते है या मान मनौवल से मान जाएंगे या फिर निर्दलीय ताल ठोकेंगे या फिर जनता सेना का दामन थामेंगे। क्या इस साल त्रिकोणीय या चतुष्कोणीय मुकाबला देखने को मिलेगा ? बस चंद दिनों का इंतज़ार और बाकी है असली खेल शुरू होने में। 

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