Udaipur Times, Rajasthan Road Conneticity: प्रदेश में गांवों से लेकर शहरों तक आमजन को सुगम आवागमन देने और आर्थिक गतिविधियों के लिए बेहतर कनेक्टिविटी के दृष्टिकोण के साथ मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा सरकार के कार्यकाल में सार्वजनिक निर्माण विभाग द्वारा 37 हजार 527 करोड़ रुपये से अधिक व्यय कर 51 हजार 790 किलोमीटर लम्बी सड़कों का विकास किया गया है, जो प्रदेश में सड़क सम्पर्क के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
इस दिशा में तेजी से कार्य करते हुए वर्तमान सरकार ने कुल 18 हजार 917 किलोमीटर लंबाई की नई सड़कों के निर्माण पर 9 हजार 704 करोड़ रुपये से अधिक व्यय किए हैं। वहीं, राष्ट्रीय राजमार्गों के विकास के लिए 603 किलोमीटर लंबाई के कार्यों पर 4 हजार 210 करोड़ रुपये, राज्य राजमार्गों एवं मुख्य जिला सड़कों के विकास के लिए 8 हजार 318 किलोमीटर लंबाई के कार्यों पर 11 हजार 302 करोड़ रुपये व्यय किए गए हैं।
मुख्यमंत्री द्वारा सितम्बर-अक्टूबर, 2026 के दौरान सभी 41 जिलों में सार्वजनिक निर्माण विभाग के 3 हजार 40 करोड़ रुपये की लागत वाले 1 हजार 763 कार्यों का शिलान्यास किया जा चुका है। वहीं, 371 करोड़ रुपये की लागत वाले 261 कार्यों का लोकार्पण भी किया गया है। इन विकास कार्यों से प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में सड़क एवं आधारभूत संरचना को मजबूती मिलेगी और आमजन को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
विकास की मुख्य धारा से जुड़ रहे अंतिम छोर के गांव
राज्य सरकार द्वारा सभी ग्रामीण क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने और आधारभूत सुविधाओं के विस्तार पर विशेष फोकस किया जा रहा है। सरकार द्वारा ग्रामीण सड़कों के विकास के लिए 23 हजार 952 किलोमीटर लंबाई के कार्यों पर 12 हजार 311 करोड़ रुपये से अधिक व्यय किए गए हैं। इसके तहत 1 हजार 760 गांवों एवं 21 बसावटों को डामर सड़कों से जोड़ा गया है। इससे ग्रामीण आबादी को सुगम आवागमन के साथ ही कृषि, व्यापार और अन्य आर्थिक गतिविधियों में भी सुविधा मिल रही है।
ग्रामीण क्षेत्रों में धूल, कीचड़ और जलभराव की समस्याओं से राहत दिलाने के लिए अटल प्रगति पथ योजना का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा रहा है। इसके तहत 5 हजार से अधिक आबादी वाले गांवों में 765 अटल प्रगति पथों के निर्माण के लिए 1 हजार 686 करोड़ रुपये की स्वीकृतियां जारी की जा चुकी हैं। इनमें से 335 अटल प्रगति पथों का निर्माण पूरा हो चुका है, जबकि, शेष कार्यों को 31 जनवरी, 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
नॉन-पेचेबल और मिसिंग लिंक सड़क निर्माण की बढ़ी गति
राज्य सरकार द्वारा नॉन-पेचेबल सड़कों के नवीनीकरण तथा नए मिसिंग लिंक सड़क निर्माण के लिए वर्ष 2026-27 में 3 हजार 453 कार्यों हेतु 2 हजार 226 करोड़ रुपये की स्वीकृतियां जारी की जा चुकी हैं। इनमें से 2 हजार 836 कार्यों के कार्यादेश जारी कर 6 हजार 815 किलोमीटर सड़कों का नवीनीकरण एवं नया निर्माण किया जा रहा है। वहीं, वर्षा के कारण क्षतिग्रस्त पुलियाओं की मरम्मत के लिए भी व्यापक कदम उठाए गए हैं। इसके तहत 21 जिलों के 73 विधानसभा क्षेत्रों में 58 करोड़ रुपये की लागत के 424 निर्माण कार्य जल्द शुरू किए जाएंगे।
आरओबी, आरयूबी और ऐलिवेटेड रोड से कम हुआ यातायात का दबाव
प्रदेश में सड़क नेटवर्क को अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक बनाने के लिए पुलों एवं रेलवे क्रॉसिंग पर आधारभूत संरचनाओं का विकास भी किया जा रहा है। राज्य में 13 रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) और 17 रेलवे अंडरब्रिज (आरयूबी) का निर्माण कार्य पूरा किया जा चुका है, जबकि 39 आरओबी और 12 आरयूबी के कार्य प्रगतिरत हैं। इसके अलावा 13 उच्च स्तरीय पुलों का निर्माण पूरा किया जा चुका है और 13 का निर्माण कार्य जारी है। इसी प्रकार भरतपुर शहर में हीरादास चौराहे से कुम्हेर गेट चौराहे तथा काली बगीची चौराहे से बिजलीघर चौराहे होते हुए आरबीएम अस्पताल तक और जयपुर के सांगानेर क्षेत्र में मुहाना मोड़ पर एलिवेटेड रोड का निर्माण कार्य भी जारी है।
राष्ट्रीय राजमार्गों का हो रहा चौड़ाईकरण एवं सुदृढ़ीकरण
राज्य में राष्ट्रीय राजमार्गों के चौड़ाईकरण एवं सुदृढ़ीकरण की दिशा में 1 हजार 900 करोड़ रुपये व्यय कर 610 किलोमीटर लंबाई के 26 कार्य पूरे किए जा चुके हैं। जबकि 3 हजार 220 करोड़ रुपये की लागत से 303 किलोमीटर लंबाई के 26 कार्य प्रगतिरत हैं। वार्षिक योजना 2026-27 के अनुसार 12 हजार 461 करोड़ रुपये की लागत से राष्ट्रीय राजमार्गों के 623 किलोमीटर के कार्य का अनुमोदन किया गया है। इसमें से 3 हजार 920 करोड़ रुपये की लागत से190 किलोमीटर लम्बाई के 4 कार्यों की स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है।
आधुनिक तकनीक से क्वालिटी की मॉनिटरिंग
राज्य सरकार पुख्ता मॉनिटरिंग के जरिए सड़क निर्माण की क्वालिटी पर भी पूर्ण ध्यान दे रही है। इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम के माध्यम से सीसीटीवी कैमरों, सेंसर और अन्य उपकरणों की मदद से यातायात की वास्तविक समय में निगरानी एवं प्रबंधन किया जा रहा है। इसी प्रकार ऑनलाइन निगरानी प्रणाली ‘सुगम पथ’ और प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग इन्फॉर्मेशन सिस्टम (पीएमआईएस) के माध्यम से परियोजनाओं की ऑनलाइन मॉनिटरिंग की जा रही है। वहीं, प्रदेश के 165 टोल प्लाजा पर फास्टैग सुविधा भी स्थापित की गई है, जिससे टोल भुगतान की प्रक्रिया अधिक सुगम हुई है।