उदयपुर के तनय अग्रवाल का AI से अमेरिकी कंपनियों में बढ़ता कदम
क्विवली के को-फाउंडर तनय विकसित कर रहे ऐसी तकनीक, जो ग्राहक प्रबंधन और बैठकों की तैयारी को बनाएगी आसान
Udaipur Times, Success Story: उदयपुर में जन्मे तनय अग्रवाल आज अमेरिकी सॉफ्टवेयर कंपनियों के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित तकनीक विकसित कर रहे हैं। तनय ने चंद्रिका माहेश्वरी के साथ मिलकर क्विवली की शुरुआत की है। चंद्रिका कंपनी की को-फाउंडर एवं CEO हैं, जबकि तनय को-फाउंडर एवं चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर (CTO) हैं।
क्विवली का उद्देश्य ऐसी AI तकनीक विकसित करना है, जो सॉफ्टवेयर कंपनियों की ग्राहक प्रबंधन टीमों के लिए ग्राहक से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी जुटाने, उसे समझने और अगली बैठक की तैयारी को आसान बनाए। इससे कर्मचारियों को अलग-अलग डैशबोर्ड, स्प्रेडशीट और पुराने रिकॉर्ड खंगालने में लगने वाला समय कम हो सकता है।
काम के अनुभव से आया क्विवली का विचार
तनय के अनुसार, बिलिंग और राजस्व से जुड़े सिस्टम पर काम करने के दौरान उन्होंने महसूस किया कि किसी ग्राहक के साथ बैठक से पहले टीम को काफी तैयारी करनी पड़ती है। अलग-अलग जगहों से जानकारी जुटाने के बावजूद कई बार ग्राहक से जुड़ी पूरी तस्वीर एक जगह उपलब्ध नहीं होती थी।
यही अनुभव आगे चलकर क्विवली के विचार का आधार बना। तनय की तकनीकी भूमिका ग्राहक से जुड़ी विभिन्न जानकारियों को एक साथ जोड़कर AI के माध्यम से टीम के लिए उपयोगी बनाने पर केंद्रित है।
ग्राहक के कारोबार में होने वाले बदलाव भी महत्वपूर्ण
क्विवली में केवल कंपनी के पुराने रिकॉर्ड ही नहीं, बल्कि ग्राहक के कारोबार में होने वाले महत्वपूर्ण बदलावों को भी ध्यान में रखा जा सकता है। उदाहरण के लिए, ग्राहक कंपनी में किसी प्रमुख अधिकारी का बदलना अकाउंट संभाल रही टीम के लिए महत्वपूर्ण जानकारी हो सकती है। इसे पिछली बातचीत और सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल से जुड़ी जानकारी के साथ जोड़कर अगली बैठक की बेहतर तैयारी की जा सकती है।
ग्राहक से संबंध मजबूत करने पर जोर
सॉफ्टवेयर बेचने के बाद ग्राहक को उसका इस्तेमाल शुरू कराने, तकनीकी सहायता देने, उसकी जरूरतों को समझने और अनुबंध के नवीनीकरण की तैयारी जैसे काम लगातार जारी रहते हैं। ऐसे में AI के जरिए नियमित और समय लेने वाले कामों को आसान बनाकर टीम को ग्राहकों के साथ बेहतर संवाद के लिए अधिक समय मिल सकता है।
तनय अग्रवाल की यह पहल तकनीकी क्षेत्र में शहर से निकलकर वैश्विक स्तर पर काम करने वाली नई पीढ़ी की संभावनाओं को भी सामने रखती है।