AI इस्तेमाल करें, लेकिन पारदर्शिता के साथ
उदयपुर 17 फ़रवरी 2026 । हाल ही में केंद्र सरकार ने AI कंटेंट और डिजिटल मीडिया के दुरूपयोग से जुड़े नियमों में बदलाव किया। यह संशोधन Ministry of Electronics and Information Technology द्वारा जारी किए गए और इनमें पहली बार AI से बने कंटेंट को कानूनी रूप से परिभाषित किया गया है।
अब AI से बनाये गए असली जैसे दिखने वाले वीडियो, फोटो या ऑडियो को “Synthetically Generated Information” कहा जाएगा। यह नियम खास तौर पर युवाओ, इंस्टाग्राम रील बनाने वालों, यूट्यूबर्स, शॉर्ट्स कंटेंट क्रिएटर्स, मीम पेज चलाने वालों और छोटे कंटेंट बनाने वाले स्टूडियो पर खासा असर डालेंगे।
आइये जानते है कौन सा कंटेंट AI-जनरेटेड माना जाएगा?
- किसी असली व्यक्ति का AI वीडियो
- आवाज़ की क्लोनिंग
- डीपफेक वीडियो
- नकली इंटरव्यू या न्यूज़ जैसी क्लिप
- AI से बनाई गई असली जैसी फोटो
कौन सा कंटेंट AI नहीं माना जाएगा?
सामान्य एवं सुरक्षित एडिटिंग जैसे
- कलर करेक्शन
- सबटाइटल जोड़ना
- फाइल साइज कम करना
- एक्सेसिबिलिटी एडिट
- स्कूल या प्रेज़ेंटेशन फॉर्मेटिंग
बस ध्यान रहे कि इन एडिटिंग से वीडियो या फोटो का मतलब या संदर्भ गलत न निकलता हो
क्या करे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म?
- यूज़र से पूछना होगा कि कंटेंट AI से बना है या नहीं।
- उस जानकारी को तकनीकी तरीके से जांचना होगा।
- AI कंटेंट पर साफ-साफ लेबल लगाना होगा।
- कंटेंट में स्थायी डिजिटल पहचान (Metadata) जोड़नी होगी।
- गैर-कानूनी कंटेंट पर तेजी से कार्रवाई करनी होगी।
कुछ मामलों में कंटेंट हटाने की समय सीमा अब सिर्फ 3 घंटे तक कर दी गई है।
युवाओं और नए क्रिएटर्स के लिए क्या बदल जाएगा?
AI कंटेंट को लेबल करना जरूरी होगा - अगर आपका वीडियो या ऑडियो AI से बना है और असली जैसा लगता है, तो उसे लेबल करना पड़ेगा। उदाहरण के तौर पर किसी सेलिब्रिटी की AI आवाज, नकली इंटरव्यू या फेस-स्वैप वीडियो।
अब ऑटोमैटिक टूल्स से पकड़ी जाएंगी ये चीज़े
- डीपफेक
- नकली दस्तावेज
- गैर-सहमति वाला कंटेंट
- खतरनाक या गैर-कानूनी सामग्री
अगर ऐसा कंटेंट मिला, तो उसे जल्दी हटाया जा सकता है।
पूरी तरह प्रतिबंधित कुछ कंटेंट - इन मामलों में सख्त कार्रवाई होगी:
- नाबालिगों से जुड़ा कंटेंट
- गैर-सहमति वाला निजी कंटेंट
- नकली आईडी या सर्टिफिकेट
- हथियार या विस्फोटक बनाने की जानकारी
- किसी असली व्यक्ति की धोखेबाज़ नकल
ऐसे मामलों में कार्रवाई Bharatiya Nyaya Sanhita या Protection of Children from Sexual Offences Act (POCSO) जैसे कानूनों के तहत भी हो सकती है।
लोकल क्रिएटर्स पर असर
- क्रिएटर्स को अब AI लेबल वाले टूल्स इस्तेमाल करने होंगे
- कंटेंट बनाने का रिकॉर्ड रखना होगा
- किसी की आवाज या चेहरा इस्तेमाल करने से पहले अनुमति लेनी होगी
ब्रांड और कमाई पर असर
जो क्रिएटर्स नियमों का पालन करेंगे उन्हें ज्यादा ब्रांड डील मिल सकती हैं। उनके विज्ञापन की दरें बेहतर होने के साथ साथ प्लेटफॉर्म पर भरोसा भी बढ़ेगा
पोस्ट करने से पहले 3 सवाल पूछें
- अगर आप AI कंटेंट बना रहे हैं, तो खुद से पूछें: क्या यह असली जैसा दिखता है? क्या इसमें किसी असली व्यक्ति की आवाज या चेहरा है? क्या लोग इसे सच समझ सकते हैं?
- अगर जवाब “हाँ” है, तो: AI लेबल जरूर लगाएं, अनुमति का रिकॉर्ड रखें, संवेदनशील विषयों से बचें।
हालाँकि भारत में AI कंटेंट पर रोक नहीं लगी है। लेकिन यह ईमानदार, लेबल्ड और ट्रेस करने योग्य होना चाहिए।
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