CNG या Electric में से कौन-सी कार खरीदना रहेगा फायदेमंद ? जाने दोनों के अलग-अलग फीचर्स ?
Udaipur Times, Automobile News, EV vs CNG car : पेट्रोल और डीजल की लगातार ऊंची कीमतों के बीच अब बड़ी संख्या में लोग नई कार खरीदते समय इलेक्ट्रिक वाहन (EV) और CNG कारों के बीच तुलना कर रहे हैं। दोनों ही विकल्प पारंपरिक पेट्रोल-डीजल वाहनों की तुलना में कम खर्चीले माने जाते हैं, लेकिन खरीद कीमत, मेंटेनेंस, सुविधा और लंबे समय के खर्च के मामले में दोनों में बड़ा अंतर है।
अगर आप नई कार खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो यह जानना जरूरी है कि आखिर किस विकल्प में ज्यादा बचत है और किसे खरीदना ज्यादा समझदारी भरा फैसला हो सकता है।
रनिंग कॉस्ट में EV सबसे आगे
इलेक्ट्रिक कारों का सबसे बड़ा फायदा उनकी कम रनिंग कॉस्ट है। यदि कोई व्यक्ति हर साल करीब 15,000 किलोमीटर कार चलाता है, तो 15 सालों में कुल दूरी लगभग 2.25 लाख किलोमीटर होगी। EV को घर पर चार्ज करने का खर्च आमतौर पर 1.5 से 2 रुपये प्रति किलोमीटर पड़ता है। ऐसे में 15 साल में बिजली पर कुल खर्च लगभग 3.3 लाख से 4.5 लाख रुपये तक हो सकता है।
वहीं दूसरी ओर CNG कार की रनिंग कॉस्ट लगभग 3.5 से 4.5 रुपये प्रति किलोमीटर आती है। 15 सालों में ईंधन पर करीब 8 लाख से 10 लाख रुपये तक खर्च हो सकते हैं। यानी ज्यादा ड्राइव करने वाले लोगों के लिए इलेक्ट्रिक कार लंबी अवधि में लाखों रुपये की बचत करा सकती है।
शुरुआती कीमत में CNG का पलड़ा भारी
हालांकि, EV खरीदने के लिए शुरुआत में ज्यादा पैसा खर्च करना पड़ता है। आमतौर पर इलेक्ट्रिक कारें समान श्रेणी की CNG कारों की तुलना में 2 लाख से 4 लाख रुपये तक महंगी होती हैं। हालांकि सरकारी सब्सिडी और कंपनियों के ऑफर इस अंतर को कुछ हद तक कम कर देते हैं। कम बजट वाले खरीदारों के लिए CNG कार आज भी ज्यादा किफायती विकल्प बनी हुई है।
मेंटेनेंस में इलेक्ट्रिक कारों की बढ़त
इलेक्ट्रिक कारों में इंजन, क्लच, गियरबॉक्स और कई अन्य यांत्रिक हिस्से नहीं होते, इसलिए इनके रखरखाव का खर्च कम आता है।
EV में इंजन ऑयल बदलने की जरूरत नहीं पड़ती। स्पार्क प्लग और क्लच बदलने का खर्च नहीं होता। सर्विसिंग अपेक्षाकृत सस्ती होती है।
वहीं CNG कारों में इंजन ऑयल बदलना पड़ता है। फिल्टर और स्पार्क प्लग की नियमित जांच करनी होती है। CNG सिस्टम का भी समय-समय पर निरीक्षण जरूरी होता है। इस वजह से लंबे समय में EV की मेंटेनेंस लागत कम पड़ती है।
बैटरी बदलने का खर्च EV की सबसे बड़ी चिंता
इलेक्ट्रिक कारों की सबसे बड़ी चिंता उनकी बैटरी है। अधिकांश कंपनियां लगभग 8 साल या 1.6 लाख किलोमीटर तक की बैटरी वारंटी देती हैं। यदि इसके बाद बैटरी बदलने की जरूरत पड़ती है, तो मॉडल के आधार पर इसकी कीमत 2 लाख से 5 लाख रुपये तक हो सकती है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर बैटरी की कीमतें तेजी से घट रही हैं और आने वाले वर्षों में बैटरी रिप्लेसमेंट काफी सस्ता हो सकता है।
रीसेल वैल्यू में अभी भी CNG आगे
सेकेंड हैंड कार बाजार में फिलहाल CNG कारों की मांग ज्यादा है। इसकी वजह यह है कि खरीदार इस तकनीक से पहले से परिचित हैं। रखरखाव और भरोसे को लेकर ज्यादा विश्वास है।
वहीं पुरानी EV की कीमत काफी हद तक बैटरी की स्थिति,वारंटी की अवधि और बैटरी की बची हुई क्षमता पर निर्भर करती है। हालांकि जैसे-जैसे भारत में EV इकोसिस्टम मजबूत होगा, इलेक्ट्रिक कारों की रीसेल वैल्यू भी बेहतर होने की संभावना है।
तो किसे खरीदना है ज्यादा फायदेमंद?
EV चुनें अगर आप हर महीने ज्यादा ड्राइव करते हैं, घर पर चार्जिंग की सुविधा उपलब्ध है, लंबी अवधि में ज्यादा बचत चाहते हैं और कम मेंटेनेंस खर्च चाहते हैं।
CNG चुनें अगर आपका बजट सीमित है, आप ज्यादा शुरुआती निवेश नहीं करना चाहते, बेहतर रीसेल वैल्यू चाहते हैं और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की चिंता से बचना चाहते हैं।
अगर आप लंबी अवधि के लिए कार खरीद रहे हैं और आपकी सालाना ड्राइविंग ज्यादा है, तो इलेक्ट्रिक कार आर्थिक रूप से ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकती है। लेकिन यदि आपका बजट सीमित है और आप कम शुरुआती कीमत तथा बेहतर रीसेल वैल्यू चाहते हैं, तो CNG कार अब भी एक मजबूत विकल्प है।
