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सपना नाईट टूरिज्म का, हकीकत रात में पर्यटकों के लिए कहीं खाना भी नसीब नहीं

शहर में रात 10 बजे बाद फ़ूड मार्किट बंद हो जाते है
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उदयपुर 1 जून 2025। झीलों की नगरी देसी विदेशी पर्यटकों के बीच खासी मशहूर है। यहाँ न सिर्फ सर्दी और मानसून बल्कि साल भर सप्ताहांत में यह आकर्षक नगरी पर्यटकों से गुलज़ार रहती है। इस पर्यटन नगरी में अब नाइट टूरिज्म को बढ़ावा देने की चर्चा कई समय समय से चल रही है।  प्रदेश सरकार ने भी उदयपुर समेत 6 शहरों में नाइट टूरिज्म डेवलप करने की घोषणा की थी। 

जहाँ एक तरफ नाइट टूरिज्म विकसित करने की बात कही जा रही है वहीँ हकीकत यह है की इस पर्यटन नगरी में रात के दस साढ़े दस बजे बाद शहर में पर्यटकों को कहीं खाना नसीब नहीं होता। शहर में रात 10 बजे बाद फ़ूड मार्किट बंद हो जाते है। जबकि 14 ट्रेने रात के 10 बजे बाद उदयपुर आती है।  इन ट्रेनों से उतरने वाले पर्यटकों को शहर तो दूर रेलवे स्टेशन पर कई बार खाना या नाश्ता नहीं मिलता। 

एक नज़र 10 बजे बाद उदयपुर सिटी आने वली ट्रेनों पर 

  1. जयपुर उदयपुर वंदे  भारत रात 10:08 (22:08) मिनट पर। 
  2. असारवा-आगरा स्पेशल ट्रेन रात 10:40 (22:40) मिनट पर। 
  3. रतलाम उदयपुर एक्सप्रेस रात 11:30 (23:30) मिनट पर। 
  4. आगरा उदयपुर वंदे भारत रात 11:45 (23:45) मिनट पर। 
  5. कानपूर असारवा स्पेशल ट्रेन रात 11:40 (23:40) मिनट पर। 
  6. कोटा असारवा एक्सप्रेस रात 11:40 (23:40) मिनट पर। 
  7. असारवा-जयपुर एक्सप्रेस रात 12:15 (00:15) मिनट पर। 
  8. कामाख्या उदयपुर (कविगुरु एक्सप्रेस) रात 12:25 (00:25) मिनट पर। 
  9. कोलकाता उदयपुर (अनन्या एक्सप्रेस) रात 12:25 (00:25) मिनट पर। 
  10. फारबिसगंज उदयपुर स्पेशल ट्रेन रात 1:05 मिनट पर। 
  11. जयपुर असारवा एक्सप्रेस मध्यरात्रि 3:25 मिनट पर। 
  12. न्यू जलपाईगुड़ी उदयपुर एक्सप्रेस मध्यरात्रि 4:00 मिनट पर। 
  13. राजस्थान हमसफर (दिल्ली उदयपुर) मध्यरात्रि 4:00 मिनट पर। 
  14. इंदौर उदयपुर (वीरभूमि एक्सप्रेस) मध्यरात्रि 4:20 मिनट पर। 

फ़िलहाल तो यह 14 ट्रेन रात के 10 बजे बाद उदयपुर पहुँच रही है।  निकट भविष्य में उदयपुर से मुंबई और दक्षिण भारत वाया अहमदाबाद के रास्ते पर ट्रेनों का संचालन बढ़ेगा तो निश्चित तौर यह संख्या बढ़ेगी।  इसके अतिरिक्त सड़क परिवहन से भी रोडवेज और निजी ट्रेवल बसों से यात्री 10 बजे बाद शहर में प्रवेश करते है।  वहीँ कुछ पर्यटक और यात्री निजी साधनो से शहर में रात 10 बजे प्रवेश करते है। 

हालाँकि शहर के आसपास हाइवे पर ढाबे ज़रूर देर रात तक खुले रहते है।  उन ढाबो में बस और निजी साधनो से आने वाले पर्यटक और यात्रियों को तो शहर से दूर हाइवे पर खाना मिला जाता है हालाँकि यह असुविधजनक है। लेकिन ट्रेन से आने वाले यात्रियों को खासी परेशांनी का सामना करना पड़ता है।  

ऐसे में नाइट टूरिज्म को विकसित करने से पूर्व ज़रूरी है एक बार रात को यात्रियों को खाना या नाश्ता तो मिले। दूसरी आवश्यक प्राथमिकता रात में आने पर्यटकों को सुरक्षित महसूस करवाने की है। जिसके लिए पुलिस प्रशासन को विशेष प्रयास करने होंगे। आप ही सोचिये क्या रात में खाने की सुविधा के बगैर नाइट टूरिज्म की कल्पना कर सकते है ?     

        

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