वड़ोदरा-नागदा रेलखंड पर कवच प्रणाली से लैस पहली स्पेशल ट्रेन का संचालन

मुंबई-नई दिल्ली मुख्य मार्ग का अधिकतम रुट अब कवच प्रणाली से परिपूर्ण
 
 | 
Vadodara nagda

31 मार्च 2026। भारतीय रेलवे द्वारा रेल परिचालन में संरक्षा को और मजबूत करने के क्रम में 30 मार्च, 2026 को वडोदरा - नागदा सेक्शन पर कवच 4.0 सिस्टम को सफलतापूर्वक कमीशन किया गया। इस अवसर पर वडोदरा स्टेशन से कवच प्रणाली से लैस स्पेशल ट्रेन को हरी झंडी दिखाई गयी। इस प्रकार मिशन रफ़्तार के अंतर्गत मुंबई - नई दिल्ली मुख्य मार्ग के पश्चिम रेलवे के निर्धारित 693 रुट किलोमीटर में से 559.5 रुट किलोमीटर पर यानी अधिकतम रुट पर इस प्रणाली को स्थापित किया जा चुका है।  

वडोदरा - नागदा सेक्शन के अंतर्गत वडोदरा से मंगल महुडी सेक्शन (122.5 Rkm) और पंचपिपलिया - नागदा (102.01 Rkm) सेक्शन के बीच में यानी कुल 224.51 रुट किलोमीटर पर कवच प्रणाली को आज सफलतापूर्वक लांच किया गया है। मंगल महुडी से पंचपिपलिया के बीच इस प्रणाली को स्थापित करने का कार्य प्रगति पर है और जल्द ही इसे आटोमेटिक सिगनलिंग के साथ पूरा कर लिया जायेगा। वडोदरा मंडल द्वारा इससे पहले जनवरी 2026 में वडोदरा  - विरार सेक्शन पर कवच सिस्टम चालू किया गया था और आज वडोदरा से गोधरा होते हुए नागदा तक इसे कमीशन किया गया है। 

कवच एक ट्रेन सुरक्षा प्रणाली है और यह मानवीय गलतियों के जोखिम को कम करने के लिए ट्रेन सुरक्षा की एक अतिरिक्त परत है। जो कि मानवीय त्रुटि के कारण 'सिग्नल पासिंग एट डेंजर' (SPAD) से होने वाले परिणामों को रोकती है। 

वडोदरा–नागदा सेक्शन पर इस जटिल कार्य के निष्पादन हेतु प्रत्येक स्टेशन तथा प्रत्येक एब्सोल्यूट/ऑटोमैटिक सिग्नलिंग सेक्शन के लिए पृथक योजना तैयार की गई, पटरियों पर 6000 से अधिक स्थानों पर RFID टैग का प्रोग्रामिंग एवं स्थापना कार्य किया गया, 26 स्टेशनों, 13 मध्य-खंडों तथा लोकोमोटिव के बीच सतत रेडियो संचार की व्यवस्था सुनिश्चित की गई, प्रत्येक स्टेशन पर कुल 39 रेडियो संचार टावर एवं आवश्यक उपकरण स्थापित किए गए, पूरे मार्ग पर UP एवं DN दोनों दिशाओं में लगभग 600 किमी लंबाई की OFC केबल बिछाई गई, साथ ही प्रत्येक स्टेशन, मध्य-खंड एवं LC गेट पर आधुनिक ‘कवच’ उपकरण स्थापित कर उन्हें मौजूदा सिग्नलिंग प्रणाली से एकीकृत किया गया, लोकोमोटिव में भी ‘कवच’ उपकरण लगाए गए तथा अंततः संपूर्ण प्रणाली का सफलतापूर्वक ट्रायल एवं परीक्षण किया गया।

'कवच' प्रणाली अपने यूरोपीय समकक्षों (ETCS) की तुलना में बहुत सस्ती है। अभी तक WAP-7, WAG9, WAP5 लोकोमोटिव में कवच प्रणाली लगाई गयी  है। जल्द ही, इसे दूसरे लोकोमोटिव पर भी शुरू किया जाएगा।

भारतीय रेलवे आधुनिक एवं स्वदेशी तकनीकों को अपनाकर सुरक्षित, दक्ष एवं भविष्य उन्मुख रेल नेटवर्क के निर्माण हेतु निरंतर प्रतिबद्ध है।

Follow UdaipurTimes on Facebook , Instagram , and Google News