उदयपुर पर्यटन की राह में बड़ी बाधा-कमज़ोर रेल नेटवर्क और अधूरी एयर कनेक्टिविटी
उदयपुर 26 अक्टूबर 2025। खूबसूरत झीलों और महलो की नगरी उदयपुर में पर्यटन सीज़न शुरू हो चूका है हालाँकि वैसे तो यह नगरी वर्ष भर पर्यटकों से गुलज़ार रहती है। लेकिन सीज़न विशेषकर मानसून और सर्दियों में यहाँ पर्यटन उरूज़ पर होता है। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए राज्य और केंद्र सरकार योजनाए भी बनाती है लेकिन पर्यटन की राह में कई बाधाऐं है विशेषकर कमज़ोर रेल नेटवर्क और आधी अधूरी एयर कनेक्टिविटी सबसे बड़ा रोड़ा साबित हो रही है।
कमज़ोर रेल नेटवर्क
उत्तर पश्चिम रेलवे के अजमेर मंडल से जुड़ा उदयपुर सिटी स्टेशन से वर्तमान में उदयपुर से जयपुर, अजमेर, दिल्ली, अहमदाबाद के लिए रेलसेवा फिर भी पर्याप्त उपलब्ध है लेकिन सबसे बड़ी परेशानी उदयपुर से मुंबई रेल कनेक्टिविटी बिल्कुल भी पर्याप्त नहीं कही जा सकती है। उदयपुर से मुंबई के सप्ताह में केवल चार दिन रेल सेवा उपलब्ध है।
उदयपुर में अधिकांश देशीय पर्यटक गुजरात से आते है लेकिन अहमदाबाद को छोड़कर गुजरात के अन्य बड़े शहरों सूरत, वडोदरा, राजकोट जैसे शहरों के लिए रेल नेटवर्क मौजूद नहीं या मौजूद भी है तो पर्याप्त नहीं। मुंबई जाने वाली ट्रेन से ही वडोदरा, भरुच और सूरत की कनेक्टिविटी मुंबई की तरह सप्ताह में चार दिन के लिए ही मौजूद है। ऐसे में उदयपुर-मुंबई (वाया अहमदबाद) नेटवर्क को जोड़ने के लिए प्रयास नहीं हुए तो पर्यटन को सुधारा नहीं जा सकता है।
इसी प्रकार उदयपुर से नार्थ ईस्ट और बंगाल के लिए तो साप्ताहिक रेलसेवा उदयपुर कोलकाता (अनन्या एक्सप्रेस, शालीमार एक्सप्रेस, उदयपुर-न्यू जलपाईगुड़ी, उदयपुर कामाख्या एक्सप्रेस) संचालित होती है जिससे मार्ग में पड़ने वाले उत्तर प्रदेश के आगरा, कानपूर, लखनऊ, अयोध्या, प्रयागराज, वाराणसी, बिहार के पटना, किशनगंज, मध्य प्रदेश के इंदौर, रतलाम, कटनी, छत्तीसगढ़ के बिलासपुर, ओडिशा के राउरकेला, पश्चिम बंगाल के खड़गपुर, जैसे शहर जुड़े जाते है लेकिन यह साप्ताहिक रेलसेवा है।
वहीँ नार्थ इंडिया जैसे पंजाब, कश्मीर, हिमाचल, उत्तराखंड के लिए भी रेलसेवा पर्याप्त नहीं है उदयपुर से योगनगरी ऋषिकेश के लिए सप्ताह में तीन दिन और चंडीगढ़ के लिए सप्ताह में दो दिन के लिए ही रेलसेवा मौजूद है।
दक्षिण भारत के लिए बहुत ही कमज़ोर रेल नेटवर्क
उदयपुर से दक्षिण भारत एक रेल कनेक्टिविटी नगण्य है केवल एक ट्रेन वो भी सप्ताह के एक बार राजस्थान हमसफ़र एक्सप्रेस मैसूरु के लिए संचालित होती है जिससे मार्ग में पुणे, हुबली और बेंगलुरु जैसे शहर कनेक्ट है। जबकि गोवा, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और केरल के लिए तो कोई ट्रेन मौजूद ही नहीं है। उदयपुर से मुम्बई और दक्षिण भारत (वाया अहमदाबाद) जुड़ने की बाते तो खूब होती है लेकिन नतीजा कुछ भी नहीं है।
आधी अधूरी एयर कनेक्टिविटी
आज ही उदयपुर के डबोक स्थित महाराणा प्रताप एयरपोर्ट का विंटर शेड्यूल लागू हुआ है जो की बेहद निराशाजनक कहा जा सकता है। उदयपुर से शहर जुड़ने की बजाय कम हो गए उदयपुर से पुणे को सीधी फ्लाइट मिलने वाली थी वह तो नहीं मिली उलटे अहमदाबाद और भोपाल के लिए समर शेड्यूल में फ्लाइट्स थी वह भी छीन ली गई।
उदयपुर से मुंबई, दिल्ली, जयपुर, बेंगलुरु, हैदराबाद और इंदौर के लिए ही एयर कनेक्टिविटी मौजूद है जबकि अहमदाबाद, पुणे, चेन्नई और कोलकाता जैसे महत्वपूर्ण शहर के लिए कोई सीधी हवाई सेवा मौजूद नहीं है ऐसे में देश विदेश के पर्यटकों को कैसे आकर्षित किया जा सकता है।
क्या है कमज़ोर रेल नेटवर्क और आधी अधूरी एयर कनेक्टिविटी के कारण?
सबसे बड़ी कमज़ोरी मेवाड़ वागड़ का कमज़ोर राजनैतिक नेतृत्व और नेताओ की उदासीनता कही जा सकती है। जबकि फिलहाल मेवाड़ वागड़ का राजनैतिक नेतृत्व राज्य और केंद्र दोनों में मौजूद है यानि डबल इंजन के होते हुए भी हालात सबके सामने है। यहाँ के नेताओ की उदासीनता के चलते न तो उदयपुर से मुंबई और दक्षिण भारत (वाया अहमदाबाद) जुड़ पा रहा है न एयर कनेक्टिविटी सुदृढ़ हो रही है। चुनावो के समय उदयपुर को इंटरनेशनल एयरपोर्ट का जुमला उछाला जाता है लेकिन हकीकत यह है की उदयपुर शहर अन्य डोमेस्टिक एयरपोर्ट से भी नहीं जुड़ा हुआ है। उदयपुर से अहमदाबाद जैसे शहर की एयर कनेक्टिविटी ख़त्म करने पर किसी भी नेता ने केंद्र को अभी तक एक पत्र तक नहीं लिखा।
रेल कनेक्टिविटी के लिए भी मेवाड़ वागड़ के नेता सिर्फ कागज़ी प्रस्ताव केंद्र को भेजते रहते है। वादे किये जाते है और भूल जाते है फिर अगले चुनाव में जुमले उछाले जाते है। यहाँ का अमूमन हर नेता माइक पर उदयपुर को मुंबई और दक्षिण भारत के लिए ट्रेन का वादा करता है। जनता को वंदे भारत दिलाने की बात करता है जबकि हकीकत यह है कि प्रस्तावित उदयपुर अहमदाबाद वंदे भारत भी ठंडे बस्ते में पड़ी हुई है। शायद चुनाव नज़दीक आने पर चल जाये तो गनीमत समझिये।
ऐसे में सवाल उठना लाज़मी है की एक तरफ जहाँ उदयपुर को पर्यटन नक़्शे पर लाने के लिए कमज़ोर रेल नेटवर्क और आधी अधूरी एयर कनेक्टिविटी की समस्या से कैसे निपटा जाए? वहीं दूसरी तरफ क्या जनप्रतिनिधि जांगेंगे?
