पर्यटन बढ़ा, ट्रैफिक बना शहर की परेशानी
जाम, अवैध पार्किंग और बढ़ते हादसों के बीच प्रशासन ने तय की स्पीड लिमिट और नो-व्हीकल जोन
उदयपुर 15 फरवरी 2026। लेकसिटी कहे जाने वाला हमारा शहर उदयपुर जो की अपनी खूबसूरती, इतिहास और गौरव के लिए पुरे विश्व में जाना जाता है और यही कारण है की वह पर्यटकों की हमेशा पहली पसंद रहा है।
पर्यटन उदयपुर की धड़कन
चाहे शाही शादियां हों या फिर अपनी इमारतों की बनावट उदयपुर हमेशा ही बॉलीवुड और हॉलीवुड फिल्म निर्माताओं को भी लुभाता रहा है। और इसी के साथ जब शहर में पर्यटन में बढ़ोतरी होती है तो बेशक शहरवासियों को ख़ुशी और व्यापार मिलता है। यहां मौजूद सभी होटल के सभी कमरे पैक रहते है और शहरवासियों की रोज़ी रोटी चलती है और क्योंकी पर्यटन ही इस शहर की कमाई का मुख्य आधार है।

लेकिन जहां एक तरफ बढ़ते पर्यटन से शहर वासियों को रोजी रोटी मिलती है, देश के कोने कोने से पर्यटक यहां शहर की खूबसूरती को निहारने के लिए या तो अपनी गाड़ियों से या टैक्सियों से पहुंचते है तो शहर में पर्यटन में बूम आता है। सड़के यहाँ आने वाली गाड़ियों से खचाखच भर जाती है। लेकिन क्या आपने कभी ध्यान दिया है की जहाँ एक तरफ गाड़ियों की ये रेलम पेल शहर में व्यापार के लिहाज से लोगों के चेहरों पर खुशियां लाती है तो वहीं दूसरी ओर आम नागरिक सडकों पर घूम रही इन गाड़ियों की गहमा गहमी से काफी परेशानियों का सामना भी करता है। उदयपुर जैसे छोटे शहर में लोगों को एक जगह से दूसरी जगह पहुँचने में घंटो भी लग जाते है क्यों की सड़के बाहर से आने वाली इन गाड़ियों से पूरी तरह भर जाती है। हालाँकि प्रशासन इन लगातार लग रहे जामों से निपटने के लिए हर मुमकिन कोशिश और इंतजाम करता है।
आम सड़क या गाड़ियों की पार्किंग ?

शहर का प्रशासन और पुलिस विभाग जहां हर रोज ट्रैफिक की समस्या से निपटने के लिए कोई न कोई ड्राइव चला कर लोगों को जागरूक करने के प्रयास कर रहा है तो दूसरी ओर इन दिनों शहर में एक और तस्वीर सामने आ रही है। जिसमे शहर की सड़कें लोगों के पैदल चलने और गाड़ियों को चलाने के अलावा बड़ी बड़ी गाड़ियों की पार्किंग में तब्दील होती हुई दिख रही है। ख़ास कर कुछ ऐसे प्रतिष्ठान भी शहर में मौजूद है जिन्हे शायद पुलिस और प्रशासन द्वारा चलाई जा रही इन ड्राइव या फिर रूल्स एंड रेगुलेशन का कोई खौफ ही नहीं है शायद, क्युकी हर रोज शहर की इन कुछ प्रतिष्ठानो के बाहर रात दिन गाड़ियों की भीड़ लगी रहती है जो की सार्वजानिक सड़क को भी घेर लेती है और ट्रैफिक को भी काफी बाधित करती है। लेकिन आम शहरवाइयों की कोई सुनवाई नहीं होती।
लेकिन क्या इन परिस्थिति में शहर के नागरिकों की कोई भूमिका नहीं है। क्या आप खुद ही अपने शहर की सड़के गाड़ियों को बेतरतीब गाड़ियों को पार्क नहीं कर रहे। क्या हमें उदयपुर के नागरिक के रूप में हमारे प्यारे शहर की तरफ हमारी जिम्मेदारी को नहीं समझना चाहिए ? आपके घर के बाहर अगर दो मिनिट के लिए कोई गाड़ी खड़ी करके चला जाए तो आपको शायद गुस्सा आए जाए तो क्या यह शहर आपका नहीं?

जहां एक तरफ कानून का उलंघन करके सड़कों पर गाड़ियां पार्क करते हैं तो और आप के ही साथी नागरिकों को इस से परेशानी होती है तो क्या इसके लिए हमें खुदको पहल नहीं करनी चाहिए ?
क्या चालान से बचने के लिए कुछ लोग करते है कानून का उलंघन ?
अक्सर देखा जाता है की शहर के चौराहों पर पुलिस की मौजूदगी को देखकर कुछ लोग शॉर्टकट्स लेते हैं, और इस अफरा तफरी में अकसर हादसे भी हो जाते है। कहीं पुलिस को टालने के लिए लोग चौराहे की जगह दूसरी सड़को से गुजरते है तो कहीं गलियों का सहारा लेते हे।

क्या सड़कों में गड्ढों की वजह से उदयपुर बनता जा रहा हादसों का शहर ?
ट्रैफिक की समस्या के अलावा शहर की सडकों की बदहाली की वजह से दिन ब दिन सड़के हादसे और इन हादसों में लोगों के गंभीर घायल होने और मौत होने की घटनाए भी बढ़ती जा रही है। हाल ही में शहर के अलग अलग इलाकों में सड़क हादसों में करीब एक दर्जन लोगों से ज्यादा लोगों की जान चली गई जिसमे स्कूली छात्र भी शामिल है। एक हादसा जो शहर के नेला तालाब इलाके में हुआ उसमे दो कारों की टक्कर में 4 युवाओं की मोत हुई तो दूसरी घटना अम्बामाता और सुखेर इलाके में हुए जिसमे शराब पीकर तेज गति में कार चलाने की वजह से चाय के ठेले पर खड़े 2 लोगों की मोके पर जान चली गई तो सुखेर इलाके में कार की टक्कर से 3 महिलाए गंभीर रूप से घायल हो गई। और इन सब में सबसे परेशान करने वाली घटना अम्बामाता इलाके में एक सड़क में बने ऐसे गड्ढे की वजह से हुई जिसके बारे में क्षेत्रवासी पहले ही कई बारे क्षेत्र के पार्षद और अधिकारीयों के अवगत करवा चुके थे। बहरहाल अब सड़क एक वह गड्ढा दो लोगों की जान जाने कके बाद भर दिया गया है।
सड़कों पर तेज गति से चल रही गाड़ियां, बुजुर्ग परेशान :
चाहे रानी रोड हो या फतहपुरा, सडकों पर बड़ी बड़ी फोर व्हीलर तेज दौड़ती हुई दिखाई देती है, जिन्हे अमूमन युवा चलाते हुए दिखाई देते है मानो जैसे की उनका कोई काम बिगड़ गया हो या फिर उन्हें तुरंत कहीं पहुंचना हो ,लेकिन ऐसी परिस्थिति में सड़क पर गाड़ी लेकर गुजर रही महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों को परेशानी और दहशत का एहसास करना पड़ता है। और वह सभी चाहते है की प्रशासन सडकों पर घूम रही ऐसे वाहनों पर एक्शन लिया जाए, शहर के अलग अलग इलाकों में ट्रैफिक मूवमेंट को ध्यान में रखते हुए स्पीड लिमिट तय की जाए। गाड़ियां जब्त की जाए।

ठेले वालों और ऑटोरिक्शा चालकों की भी है भागीदारी :
लेकिन इस पूरी कश्मकश में काफी कुछ हिस्से दारी सड़क किनारे खड़े सब्जी विक्रेताओ और ऑटोचालकों की भी है जो सड़कों पर कही भी खड़े हो जाते है और सड़क पर चल रहे ट्रैफिक को बाधित करते है। इन्हे भी कई बार पुलिस द्वारा व्यवस्थित किया जाता है लेकिन धीरे धीरे ये फिर से अपनी पुरानी जगह पर आ ही जाते है।
इस सभी समस्याओं के बीच आम नागरिक के दिल में ये सवाल उठते है। क्या प्रशासन द्वारा इतनी लागत से बनाई गई सार्वजनिक पार्किंग को सुचारों बनाने की जरुरत है ताकि सड़के गाड़ियों की पार्किंग बनने से बच सकें ?
क्या सडकों पर गाड़ी चलने से जुड़े कानूनों की पालना आम नागरिकों से करवाना और उन्हें इसके प्रति जागरूक करना जरुरी है ?
क्या सड़कों पर चल रही गाड़ियों के लिए स्पीडिंग लिमिट तय करना जरुरी है ?
क्या सडकों के बीच बने गड्ढों को ठीक करना जरुरी है ताकि और किसी परिवार को होना कोई सदस्य खोना नहीं पड़े ?
क्या दुकानों, शोरूम्स, प्रतिष्ठानों के बाहर से गाड़ियों की पार्किंग को हटवाना और ऐसी पार्क की गई गाड़ियों को जब्त कर जुर्माना लगाना जरुरी है ?
क्या प्रशासन द्वारा चलाये जा रही ड्राइव में भागीदारी सुनिश्चित करना जरुरी है ?
इसको लेकर प्रसाशन भी गंभीर रुख अपना रहा है इस कड़ी में सोमवार को ज़िला कलेक्टर नामित मेहता ने सम्बंधित अधिकारीयों की एक मीटिंग ली जिसमें उन्होंने लगातार हादसों वाली जगहों को चिन्हित कर जरूरी कदम उठाने ,फतहसागर रिंग रोड पर स्पीड लिमिट तय जैसे निर्देश दिए। दरअसल सड़क सुरक्षा समिति की बैठक मंगलवार को कलक्ट्रेट सभागार में जिला कलक्टर नमित मेहता की अध्यक्षता में हुई। इसमें जिले में सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने तथा यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाने को लेकर विचार-विमर्श किया गया।
इस मीटिंग के दौरान जिला कलक्टर मेहता ने सड़क हादसों पर चिन्ता व्यक्त करते हुए इनमें कमी लाने के लिए सामूहिक और प्रभावी प्रयासों पर जोर दिया। उन्होंने आई-राइड के माध्यम से दुर्घटना के आंकड़ों का एनालिसिस कर प्रतिमाह ब्लेक स्पॉट चिन्हित करते हुए हादसों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए उन स्थलों पर आवश्यक रोड़ इंजीनियरिंग के निर्देश दिए। मीटिंग के दौरान फतहसागर रिंग रोड पर कतिपय वाहनधारियों द्वारा तेजी गति से गाड़ियां चलाने और इससे पैदल घुमने वालों को परेशानी होने की बात सामने आई।
इस पर जिला कलक्टर ने फतहसागर रिंग रोड पर स्पीड लिमिट 30 किमी तय करने के निर्देश दिए। इसके लिए परिवहन अधिकारी को जगह-जगह सूचना पट्ट लगाने तथा आदेश की अवहेलना करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्यवाही करने के लिए भी निर्देशित किया। मीटिंग में फतहसागर की पाल पर शाम के समय वाहनों की रेलमपेल से जाम लगने तथा लोगों को परेशानी होना भी सामने आया।
जिला कलक्टर ने पायलट प्रोजेक्ट के तहत वीकेण्ड पर मोतीमगरी से ओवरफ्लो झरने तक कुछ घंटो के लिए नो व्हिकल जोन घोषित किए जाने के निर्देश दिए। ऐसे में देखना ये होगा की इन सभी निर्देशों की पलना कब से की जाती है. लेकिन हाँ इन सभी प्रयासों में शहर वासियों को चाहिए वह भी अपना पूरा योगदान दें ताकि हमारा शहर उदयपुर सुरक्षित, ट्रैफिक जाम रहित शहर बन सके।
भारत में सड़क किनारे गलत या अव्यवस्थित तरीके से वाहन खड़ा करना - जैसे इस तरह पार्क करना कि अन्य वाहनों का रास्ता बंद हो जाए या सार्वजनिक मार्ग पर अवरोध उत्पन्न हो - भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 और संबंधित यातायात नियमों के तहत दंडनीय हो सकता है।
संबंधित कानूनी प्रावधान भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 285 - सार्वजनिक मार्ग में खतरा या अवरोध यदि कोई व्यक्ति वाहन इस प्रकार खड़ा करता है कि उससे सार्वजनिक मार्ग पर चलने वालों को खतरा, बाधा या असुविधा हो, तो यह धारा 285 के अंतर्गत अपराध माना जा सकता है। इस धारा के अनुसार, जो कोई किसी कार्य द्वारा (जैसे लापरवाही से या अवरोध पैदा करने वाली पार्किंग) या अपने नियंत्रण में संपत्ति का उचित प्रबंधन न करके सार्वजनिक मार्ग में खतरा या अवरोध उत्पन्न करता है, उस पर ₹5,000 तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
यदि कोई व्यक्ति सड़क किनारे वाहन इस तरह पार्क करता है कि सड़क संकरी हो जाए, अन्य वाहनों का आवागमन रुक जाए, ट्रैफिक जाम या दुर्घटना का खतरा बढ़ जाए, तो इसे सार्वजनिक मार्ग में अवरोध या खतरा उत्पन्न करना माना जा सकता है। ऐसे मामलों में पुलिस द्वारा धारा 285 के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
संबंधित यातायात नियम भारतीय मोटर वाहन नियमों और सड़क नियमावली (Rules of the Road Regulations, 1989) के अनुसार वाहन इस प्रकार खड़ा किया जाना चाहिए कि अन्य सड़क उपयोगकर्ताओं को खतरा या बाधा न हो।
चौराहों, फुटपाथों, नो-पार्किंग जोन या ऐसे स्थानों पर वाहन खड़ा नहीं किया जा सकता जहां यातायात बाधित होता हो। गलत तरीके से खड़े वाहन को हटाया भी जा सकता है।
प्रवर्तन और दंड यदि कोई वाहन सड़क पर अवैध या अवरोधक तरीके से खड़ा पाया जाता है, तो पुलिस चालान काट सकती है, जुर्माना लगाया जा सकता है, वाहन को टो करके हटाया जा सकता है, और आवश्यक होने पर BNS की धारा 285 के तहत मामला दर्ज किया जा सकता है।
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