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सलूम्बर में पुलिस ने फर्जी कॉल सेंटर चलाकर अमेरिकी नागरिकों से ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है

पुलिस अधीक्षक राजेश कुमार यादव ने बताया कि जिले में साइबर अपराधों की रोकथाम के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है 
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उदयपुर, Nov 13: पुलिस अधीक्षक राजेश कुमार यादव के निर्देशन में थाना सलूम्बर, साइबर सेल और DST की संयुक्त कार्रवाई में मिजोरम के दो और जयपुर के एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने उनके कब्जे से तीन लैपटॉप, चार मोबाइल फोन, तीन ब्लूटूथ हेडफोन और एक जियो राउटर जब्त किया है।

पुलिस अधीक्षक राजेश कुमार यादव ने बताया कि जिले में साइबर अपराधों की रोकथाम के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक बनवारीलाल मीणा और पुलिस उप अधीक्षक हेरंब जोशी के निर्देशन में टीम ने यह कार्रवाई की। पुलिस ने देवगांव स्थित भाग्यश्री होटल में छापा मारकर यह फर्जी कॉल सेंटर पकड़ा।

सूचना के अनुसार, होटल के कमरे नंबर 107 में तीन व्यक्ति लैपटॉप के जरिए विदेशों में कॉल कर रहे थे। जब पुलिस ने पूछताछ की तो उन्होंने अपने नाम व पता बताया। इनमे से दो व्यक्ति मिज़ोराम और एक व्यक्ति  लालरामलुना (29) निवासी रामलुन नोर्थ, आइजोल मिजोरम, एच-जोहमगैया (33) निवासी आइजोल मिजोरम, और अक्षय शर्मा निवासी अजय नगर, जयपुर बताए। तीनों ने बताया कि वे अहमदाबाद निवासी भाविन मकवाना नामक व्यक्ति के लिए सैलरी पर काम कर रहे हैं, जिसने होटल में उनके लिए कमरा किराए पर लिया था।

तीनों आरोपी इंटरनेट कॉलिंग के माध्यम से अमेरिकी नागरिकों को सस्ती दर पर लोन दिलाने का झांसा देकर उनके बैंक अकाउंट की जानकारी और पासवर्ड हासिल करते थे। इसके बाद खातों से डॉलर निकालकर उन्हें रूपये में कन्वर्ट कर ठगी करते थे।

आरोपियों के कब्जे से जब्त लैपटॉप और मोबाइल की जांच में इंटरनेट कॉलिंग और विदेशी नंबरों पर संपर्क के साक्ष्य मिले हैं। तीनों आरोपी “गूगल वॉइस” के जरिए यूएसए में कॉल करते थे। वे अपने कोड नेम से काम करते थे—लालरामलुना को ‘जेक’, जोहमगैया को ‘डेविड’ और अक्षय शर्मा को ‘केविन’ कहा जाता था।

फर्जी कॉल सेंटर “कैशनेट” नामक अमेरिकी कंपनी के कर्मचारियों के रूप में कॉल करता था। आरोपी सोशल सिक्योरिटी नंबर और बैंक डिटेल हासिल कर उन्हें अपने गिरोह के लीडर भाविन मकवाना तक पहुंचाते थे, जो खातों से पैसे निकालता था।

तीनों आरोपियों के खिलाफ थाना सलूम्बर में प्रकरण संख्या 285/2025 दर्ज किया गया है, जिसमें भारतीय दंड संहिता (बीएनएस 2023) की धाराएं 316(2), 318(4), 319(2), 112(2), 61(2) सहित आईटी एक्ट की धारा 66C और 66D जोड़ी गई हैं। मामले की जांच हेमंत चौहान, उपनिरीक्षक द्वारा की जा रही है।