"बालिका शिक्षा ही सशक्त समाज की वास्तविक आधारशिला है" - डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़
UdaipurTimes, Aug 7, 2026 | Udaipur Local News: मेवाड़ की गौरवशाली विद्यादान परम्परा का निर्वहन करते हुए डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय, जगदीश चौक, उदयपुर की छात्राओं की सम्पूर्ण वार्षिक शुल्क राशि का वहन किया। वर्ष 2023 से निरंतर जारी यह पहल बालिका शिक्षा के प्रति उनकी सामाजिक प्रतिबद्धता और मेवाड़ की ऐतिहासिक परम्पराओं के संरक्षण का प्रेरक उदाहरण है।
इस अवसर पर डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने कहा कि बालिका शिक्षा ही सशक्त समाज की वास्तविक आधारशिला है। भारत की बेटियों ने हर क्षेत्र के साथ-साथ खेलों में भी हाल ही में आयोजित कॉमनवेल्थ खेलों 2026 में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर देश का गौरव बढ़ाया है। किन्तु आज भी ऐसी अनेक बालिकाएँ है, जो किसी न किसी कारण से पढ़ाई को बीच में ही छोड़ देती हैं। बालिकाओं को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़कर समाज और राष्ट्र की प्रगति को भी सुनिश्चित करना है। Mewar News in Hindi
अपने पूर्वजों की गौरवशाली परम्पराओं का निर्वहन करते हुए डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, पशु कल्याण, शहीद सैनिकों की वीरांगनाओं एवं पूर्व सैनिकों के कल्याण सहित विभिन्न सामाजिक सरोकारों और पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय योगदान दे ‘गो ग्रीन’ और ‘सेव वाटर’ जैसे अभियानों के माध्यम से जनजागरूकता का संदेश प्रसारित कर रहे हैं। निस्वार्थ सेवा एवं पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उनके नाम अनेक विश्व कीर्तिमान भी दर्ज हैं। Rajasthan Local News in Hindi
विद्यालय की प्राचार्या श्री दुर्गेश कुमारी शर्मा ने बताया कि मेवाड़ के विकास की नींव सुदृढ़ करने में शिक्षा का विशेष योगदान रहा है। मेवाड़ के महाराणाओं ने सदैव प्रजाहित एवं समाज उत्थान के लिये विद्यादान को परम आवश्यक मानकर, योजनागत तरीकों से शिक्षा को जन-जन तक पहुँचाने के पावन कार्य किये। डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ अपने सुनियोजित प्रयासों से शिक्षा का निर्वहन कर रहे हैं। Udaipur Local News in Hindi
162 वर्ष पूर्व मेवाड़ के 71वें श्री एकलिंग दीवान महाराणा शम्भूसिंह जी के शासनकाल (1861-1874 ई.) में उदयपुर राज्य का प्रथम विद्यालय 1864 में स्थापित किया गया, जिसे ‘शम्भूरत्न पाठशाला’ नाम दिया गया। वर्ष 1866 में इसे कन्या विद्यालय के रूप में विकसित किया गया। यह मेवाड़ रियासत द्वारा स्थापित भारत के प्रारम्भिक कन्या विद्यालयों में से एक माना जाता है।
