ह्रदय के वाल्व सिकुड़ने का सफल उपचार कर गीतांजली ह्रदय रोग विभाग ने गर्भवती महिला को दिया नया जीवन


ह्रदय के वाल्व सिकुड़ने का सफल उपचार कर गीतांजली ह्रदय रोग विभाग ने गर्भवती महिला को दिया नया जीवन

बलूनिंग तकनीक से बिना चीरफाड़ के किया सफल इलाज

 
GMCH

गीतांजली मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल एक उच्च स्तरीय टर्शरी सेंटर है जहां एक ही छत के नीचे सभी विश्वस्तरीय सुविधाएँ उपलब्ध हैं। यहाँ का कार्डियक सेंटर सभी अत्याधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित है।

गीतांजली मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल निरंतर रूप से चिकित्सा क्षेत्र में कीर्तिमान स्थापित करता आया है| यहाँ का कार्डियक सेंटर सभी अत्याधुनिक सुविधाओं से लेस है। यहाँ के ह्रदय रोग विभाग ने एक बार फिर जटिल बीमारी से ग्रसित महिला का सफल उपचार कर उसकी जान बचायी है। मरीज के वाल्व सिकुड़ने की समस्या थी और मामला इसलिए भी अधिक संवेदनशील था क्योंकि वह गर्भवती थी। अस्पताल की कार्डियक टीम ने गहन अनुसंधान और विचार विमर्श के बाद बलूनिंग उपचार प्रणाली अपनायी और मरीज को रोगमुक्त किया, गर्भस्थ शिशु भी स्वस्थ है। गीतांजली हॉस्पिटल में चिकित्सा क्षेत्र में सभी उन्नत तकनीकों को अपनाकर कुशल कार्डियोलॉजिस्ट्स की टीम में डॉ. रमेश पटेल, डा. कपिल भार्गव , डॉ. डैनी मंगलानी द्वारा ह्रदय रोगियों का निरंतर उपचार किया जा रहा है। 

डॉ. रमेश पटेल ने जानकारी देते हुए बताया कि 25 वर्षीय महिला रोगी को जब गीतांजली हॉस्पिटल लाया गया तब वह 5 माह की गर्भवती थी और तेज सांस चलना, घबराहट होना जैसी समस्या का सामना कर रही थी और समय के साथ गर्भवती महिला की परेशनियाँ भी बढ़ रही थी। इको द्वारा जांच में पता लगा कि रोगी के वाल्व में सिकुड़न है। ऐसे में रोगी को पहले दवाओं के द्वारा इलाज देना शुरू किया परन्तु इससे तबीयत में सुधार नहीं हुआ। इसके पश्चात् कार्डियोलॉजी टीम ने गंभीरता को देखते हुए रोगी के वाल्व की बलूनिंग करने का फैसला लिया, बलूनिंग में चीरफाड़ नहीं होती है और रिस्क भी कम है। टीम ने पाँव की नस के द्वारा इसे आसानी से अंजाम देते हुए सफल उपचार किया । 

आमतौर पर बलूनिंग करने में रिस्क नहीं होता है लेकिन जब बात गर्भवती महिला की हो तब कई जटिलताएं हो सकती हैं । गर्भावस्था को 5 माह हो चुके थे इस कारण वाल्व का इलाज होना बहुत आवश्यक हो जाता है। रोगी के पूरे इलाज के दौरान कार्डियोलोजी टीम के साथ स्त्री एवं प्रसूति रोग, नवजात शिशु रोग, सी.टी.वी.एस की टीम का भरपूर साथ रहा। 

डॉ. पटेल ने यह भी बताया कि इस तरह के मामलों में कई सफल इलाज दवाओं के द्वारा तथा जरूरत पड़ने पर ऑपरेशन द्वारा किये जा चुके हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि कई बार लोग गर्भवती महिलाओं में इस तरह के लक्षणों को नजरंदाज कर देते हैं जिससे महिलाओं की मृत्यु तक हो जाती है या कई मामलों में बच्चे को जन्म देते ही महिला की मृत्यु हो जाती है। इस तरह के इलाज टर्शरी सेंटर्स पर ही किये जाते हैं जहाँ गर्भवतियों को दवा व ऑपरेशन द्वारा स्वस्थ व सुरक्षित जीवन प्रदान किया जा रहा है। 

गीतांजली मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल एक उच्च स्तरीय टर्शरी सेंटर है जहां एक ही छत के नीचे सभी विश्वस्तरीय सुविधाएँ उपलब्ध हैं। यहाँ का कार्डियक सेंटर सभी अत्याधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित है।

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